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पीएम के स्वच्छता अभियान को चूना लगा रहे अधिकारी:खुले में शौच जाने के लिए मजबूर हैं प्रसूताओं के साथ सैंपऊ अस्पताल आने वाली महिलाएं

सैंपऊ14 दिन पहले
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कस्बे के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर प्रसव के लिए प्रसूताओं के साथ आने वाली महिलाएं अस्पताल के अंदर शौचालय की सुविधा नहीं होने पर सुबह के समय खुले में शौच जाने के लिए मजबूर है। अस्पताल के अंदर रोगी वार्डों में बने शौचालय रोगियों एवं स्टाफ के लिए भी अपर्याप्त साबित हो रहे हैं। जिसके चलते अस्पताल प्रशासन के द्वारा प्रसूता एवं रोगियों के साथ अस्पताल आने वाले महिला एवं पुरुषों को अस्पताल के शौचालयों का उपयोग नहीं करने दिया जा रहा है।

ऐसी स्थिति में प्रसूताओं के साथ आने वाली महिलाओं को प्रतिदिन सुबह के समय हाथों में लोटे लेकर बाड़ी मार्ग की तरफ शौंच के लिए जाते हुए देखा जा सकता है। एक ओर प्रधानमंत्री के द्वारा खुले में शौच से मुक्ति दिलाने के लिए लोगों को शौचालय निर्माण के लिए 12000 की सहायता राशि उपलब्ध कराई थी। गांवों के साथ-साथ शहरों में भी खुले में शौच जाने वालों के लिए सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया था।

इसके बावजूद भी अधिकारियों की अनदेखी के कारण योजना को पलीता लग रहा है। लोगों का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन बड़ी संख्या में रोगियों का आवागमन रहता है इसके बावजूद भी सुविधाओं के नाम पर टॉयलेट और शौचालयों की विशेष कमी है।

अस्पताल में 6 शौचालय बने हुए हैं, लेकिन एक एक प्रसूता के साथ 6-6 महिलाएं आती है, उस वजह से दिक्कत हो रही है। शौच जाने से महिलाओं को कोई नही रोकता, कभी-कभी लंबी कतारें लग जाने पर महिलाएं खुले में शौच के लिए चली जाती है तो कुछ महिलाएं खुले में शौच जाने की आदत के कारण बाहर जाती है।

डॉ. दिनेश सिंह नरूका, इंचार्ज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सैपऊ

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