भास्कर खास:गांवों में दिखाई जाएंगी पैडमैन और पीरिएड एंड ऑफ द सेंटेंस फिल्में

सरमथुरा2 महीने पहले
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  • माहवारी के प्रति चुप्पी तोड़ो अभियान के तहत लुपिन फाउंडेशन ने शुरू की नई पहल

लुपिन के बहुउद्देश्यीय कौशल प्रशिक्षण केंद्र पर युवतियों को माहवारी के प्रति जागरूक करने के लिए पैडमेन ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित लघु फिल्म पीरिएड एंड ऑफ द सेंटेंस दिखाई गई। किशोरियों व महिलाओं को माहवारी के दौरान स्वच्छता के लिए जागरूक करने का निर्णय लिया है। लुपिन ओर मंजरी फाउंडेशन के द्वारा पैडमेन ओर ऑस्कर पुरस्कार से सम्मानित लघु फिल्म पीरिएड एंड ऑफ द सेंटेंस का भी प्रदर्शन गांवों में किया जाएगा।

फ़िल्म दिखाने का मुख्य लक्ष्य महिलाओं को स्वच्छता के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि अभियान से 10 से 19 वर्ष तक की सभी किशोरियों को जोड़ा जाएगा। महिलाएं व खास कर किशोरियों को स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूक कर ही गांव व समाज को बदल सकता है। इस मौके पर नीतू झा ने कहा कि मासिक धर्म कोई अपराध नहीं, बल्कि एक सामान्य शारीरिक प्रक्रिया है। जिस पर घर और समाज में खुलकर बात की जाए तो इस दौरान स्वच्छता के महत्व को भी समझा जा सकता है।

जिसके लिए हमें एक माहौल बनाना होगा और पुरानी परंपरागत सोच को बदलना होगा। यह स्वच्छता महिलाओं को रखेगी स्वस्थ और देगी विश्वास आगे बढ़ने का, कभी नहीं रुकने का और डर को जड़ से खत्म कर देने का। पहले के जमाने में इस विषय पर कोई भी खुलकर बात नहीं करता था और न ही चाहता था कि इतना बेबाकी से इस विषय पर दूसरे उनसे खुलें।

महिलाओं को अपने शरीर की एक प्राकृतिक क्रिया के बारे में समय से पहले बताया ही नहीं जाता था तो उनके मानसिक रूप से तैयार होने और स्वच्छता बनाए रखने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। उल्टा उस स्थिति में उनसे, यह मत करो, वह मत करो। मंदिर मत जाओ, अचार मत छुओ। एक जगह बैठो, ऐसा सब कहा जाता था। जो बहुत ही अजीब और बुरी लगती थी, लेकिन उन्हें झेलना पड़ता था।

हालांकि आज फिर भी इन टैबू पर काफी हद तक लगाम लग चुकी है लेकिन आज भी गांव-देहात की महिलाएं मासिक धर्म को लेकर भ्रांति में जी रही हैं। उनमें न तो जागरूकता है और न ही उन्हें इससे होने वाली बीमारियों के बारे में पता है। मासिक धर्म में स्वच्छता नहीं होने के कारण देश की महिलाओं की जान भी जा रही है।

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