11 दिसंबर को बालिका का विवाह होना तय था:शादी का कार्ड लेकर थाने पहुंची 14 साल की बालिका बोलीं- अंकल मुझे शादी नहीं करनी, डॉक्टर बनना है

चित्तौड़गढ़एक महीने पहले
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बाल विवाह रुकवाने के लिए माता-पिता को पाबंद करतीं एसडीएम एवं विवाह करवाने का बयान देती बालिका। - Dainik Bhaskar
बाल विवाह रुकवाने के लिए माता-पिता को पाबंद करतीं एसडीएम एवं विवाह करवाने का बयान देती बालिका।
  • बड़ीसादड़ी क्षेत्र के सरथला गांव का मामला,

सरकारी व गैर सरकारी प्रयासों के बाद भी बाल विवाह रुकने का नाम नहीं ले रहे। ये वास्तव में रुकेंगे तो खुद बच्चों की हिम्मत और सजगता से। जैसा कि बड़ीसादड़ी क्षेत्र में 14 वर्षीय बालिका कृष्णा ने दिखाई। अपनी शादी रुकवाने के लिए वो खुद प्रशासन के पास पहुंची। इसके बाद महिला एसडीएम ने भी माता-पिता को बुलाकर जमकर फटकार लगाई।

जिले के बड़ीसादड़ी थानांतर्गत सरथला गांव की कृष्णा अभी 14साल की होकर 9वीं कक्षा में पढ़ रही है। उसने सोमवार को एसडीएम बिंदुबाला राजावत के समक्ष बताया कि एक महीने से उसके घर में शादी की तैयारियां चल रही थी पर उसको किसी ने कुछ नहीं बताया कि मेरी शादी कर रहे है। शादी का कार्ड देखकर मैं हतप्रभ रह गई। जिसके अनुसार 11 दिसंबर को उसका विवाह होने वाला है। वह अभी शादी नहीं करना चाहती है।

पढ़ाई करना चाहती है और उसका लक्ष्य डाॅक्टर बनना है। बताया गया कि परिवार में बताने के बाद भी उसकी बात को नहीं सुना गया तो लड़की ने सोमवार को पुलिस तक सूचना पहुंचा दी। एसएचओ कैलाशचंद्र सोनी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम बिंदुबाला राजावत को अवगत कराया। वहीं बालिका को लेकर उनके पास पहुंचे। एसडीएम राजावत ने लड़की के बयान लेकर उसके माता-पिता को भी बुलाया। जमकर लताड़ा और विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया।

सूचना मिली कि 9वीं में पढ़ने वाली एक 14 वर्षीय बालिका का घरवाले बाल विवाह कर रहे है। इस पर प्रशासन व पुलिस की टीम भेजी गई। लड़की के बयान लिए गए। वह पढ़ना चाहती है। लड़की के माता-पिता को बाल विवाह नहीं करने के लिए पाबंद किया। बिंदुबाला राजावत, एसडीएम बड़ीसादड़ी

पिता ने कहा- यह चाहेगी, तभी करेंगे, एसडीएम ने शपथ पत्र लिखवाकर पाबंद किया

महिला एसडीएम बिंदुबाला राजावत ने अपने चैंबर में बच्ची के सामने ही माता-पिता को जमकर लताड़ पिलाई। शुरुआत में शादी करने से ना नुकुर के बाद वे फिर एसडीएम के हर सवाल पर एक ही बात कहते रहे कि अब कैंसिल कर दिया। नहीं करेंगे। एसडीएम ने यहां तक कहा कि जब इतना गैर जिम्मेदाराना कदम उठा लिया तो अब आपके पर कैसे भरोसा करें? कैसे बच्ची को आपके हवाले करे? आप पर किसका दबाव था? वापस कम उम्र में शादी करा दी तो? माता-पिता बोले कि आप हर बार इसके बयान लेना। यह चाहेगी, तब ही शादी करेंगे। एसडीएम ने दोनों से शपथ पत्र लिखवाकर पाबंद किया।

दोहरी कुप्रथा आंटा-सांटा में कर रहे थे विवाह

मामले में मुख्य बात यह भी सामने आई कि यह बाल विवाह एक और कुप्रथा आंटा-सांटा के चक्कर में हो रहा था। खुद लड़की के माता-पिता की भी ज्यादा इच्छा नहीं थी पर लड़की की भुआ सहित परिवार के अन्य बुजुर्गों का दबाव गहराया। भुआ ने अपने बेटे की शादी के बदले उसी परिवार के बेटे से कृष्णा का रिश्ता तय करा दिया। जो इसी गांव का है। हैरत की बात है कि शादी के कार्ड में परिवार के जो नाम छपे, उनमें पढ़े लिखे लोग भी है।

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