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दुष्कर्म व तस्करी मामले:अस्पताल में सुबह 5 बजे क्वारेंटाइन सेंटर की छत से कूदकर भागे 5 संक्रमित बंदी

चित्तौड़गढ़11 दिन पहले
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क्वारेंटाइन सेंटर जहां से 5 बंदी भागे - Dainik Bhaskar
क्वारेंटाइन सेंटर जहां से 5 बंदी भागे
  • पॉजिटिव होते हुए भी ढूंढा भागने का रास्ता, पिछले साल भी हो चुका ऐसा, पहली मंजिल पर बने कमरे से निकले

जिला अस्पताल में अलग से बने क्वारेंइन सेंटर से सोमवार सुबह 5 बजे 5 बंदी फरार हो गए। अलग-अलग थानों के विचाराधीन बंदी कोरोना संक्रमित होने से यहां भर्ती थे। गत साल भी दो-तीन बंदी क्वारेंटाइन होकर अस्पताल से भाग गए थे। पुलिस ने उनको पकड़ लिया था। कुछ घंटाें बाद पुलिस ने दाे बंदियाें काे पकड़ लिया। तीन अन्य बंदियाें की अगल-अलग टीमें तलाश कर रही हैं।

यहां क्वारेंटाइन सेंटर में 9 संक्रमित बंदी भर्ती हैं। भवन के नीचे अस्थायी चौकी इंचार्ज के अनुसार सुबह 4.30 बजे तक ये सभी देखे गए। करीब 5 बजे 5 बंदी कमरे से बाहर निकले। सीढ़ियों के लोहे के दरवाजे को ऊंचा कर छत पर पहुंचे और कूदकर भाग गए। एक अन्य बंदी ने ही गार्ड को इस बारे में बताया। सूचना पर सदर सीआई दर्शनसिंह जाब्ते के साथ पहुंचे।

नाकाबंदी करवाई। एएसपी हिम्मत सिंह देवल, डीएसपी लालूराम विश्नोई, मनीष शर्मा भी पहुंचे। फरार बंदियों का आपराधिक रिकाॅर्ड खंगाल कर तलाश शुरू की गई। फरार बंदियों में कपासन क्षेत्र के किशनियाखेड़ी निवासी कुलदीप पुत्र उम्मेद सिंह राजपूत, पारसोली क्षेत्र के हरपुरा निवासी पिंटू पुत्र संतोष शर्मा, चावंडिया निवासी मुकेश उर्फ पप्पू पुत्र कन्हैयालाल सालवी, सिंगोली नीमच के धारड़ी निवासी संजय पुत्र सुकरत, चंदेरिया क्षेत्र के घोसुंडा निवासी पप्पू पुत्र रतनलाल जोगी हैं।

इसमें तीन पाॅक्सो और शेष ज्यादती व तस्करी के मामलों में बंदी थे। संजय के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट का मामला था। कुलदीप 25 अप्रैल, पिंटू व मुकेश को 29 अप्रैल, संजय को एक मई व पप्पूू को दो मई को यहां लाया गया था। यह दूसरों में संक्रमण फैला सकते हैं।

यहां संक्रमित बंदियों को रखा जाता है। ऐसे में भवन के दरवाजे पर बाहर से ताला लगा रहता है। खिड़की से भोजन, पानी व दवा दी जाती है। भवन के सामने तंबू लगाकर बनाई अस्थायी चौकी में 24 घंटे आधा दर्जन पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं, वे स्वास्थ्य सुरक्षा के कारण बंदियों के कमरे में जाकर चेक नहीं कर सकते। एएसपी हिम्मतसिंह देवल ने छत के दरवाजे को वेल्डिंग कर पूरी तरह से बंद करने को कहा। प्रारंभिक जांच के अनुसार बंदी सीढ़ियों के दरवाजे को ऊंचा कर छत पर पहुंचे। पास मोर्चरी की छत पर कूदे। वहां से कूदकर फरार हुए। दोनों भवन परिसर में मुख्य भवन के पीछे है।

इसके ठीक पीछे मंडी की सीमा है। बंदी मंडी के रास्ते भागे। मोर्चरी की छत की ऊंचाई कम है, इसलिए भागने में आसानी हुई। गत साल इसी अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड से दो बंदी देर शाम वायरगेज तोड़कर नीचे कूद कर भाग गए थे। हालांकि पुलिस ने दोनों को कुछ समय बाद ही पास के एक गांव से पकड़ लिया था। वहीं नारकोटिक्स विभाग द्वारा करीब 200 किलो अफीम के साथ गिरफ्तार हुआ बंदी भी गार्ड को चकमा देकर भाग गया था। उसे कोरोना जांच के बाद वार्ड में रखा था। उसे भी बाद में पकड़ लिया था।

दाे बंदियाें काे पकड़ा, तीन की तलाश

एसपी दीपक भार्गव ने बताया कि कोविड केयर सेंटर की छत से कूदकर भागे बंदियों की तलाश के लिए जिले भर में नाकाबंदी करवाई। चंदेरिया थाना पुलिस ने बंदी पप्पू जोगी व बेगूं थाना पुलिस ने बंदी संजय वाल्मीकि को गिरफ्तार कर लिया। फरार अन्य बंदियों की गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग टीमें तलाश कर रही हैं।

पिछले साल कोरोना संक्रमण की शुरुआत के बाद से नियम है कि गिरफ्तार आरोपियों को कोविड टेस्ट करवाने के बाद जेल में रखा जाएं। शुरू में इनको जांच रिपोर्ट आने से पहले और संक्रमित मिलने पर अन्य रोगियों के साथ ही अस्पताल वार्ड में रखा जाता था। जब यहां से फरार होने का मामला हुआ तो पुलिस व अस्पताल प्रशासन ने अस्पताल परिसर में ही बने नगर परिषद के दो मंजिला रैन बसेरा भवन को बंदियों के लिए क्वारेंटाइन सेंटर बनाया।

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