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डेयरी चुनाव भास्कर लाइव:सिंहपुर समिति में 9 में से 7 सदस्याें ने नाम वापस लिए, 48 में से 40 समितियाें का निर्विराेध गठन

चित्ताैड़गढ़20 दिन पहले
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  • निवर्तमान चेयरमैन जाट का पर्चा खारिज हाेने के बाद सिंहपुर बीएमसी में नाम वापसी पर रही नजर

चित्ताैड़गढ़-प्रतापगढ़ डेयरी संघ के नए बोर्ड गठन को लेकर हो रहे चुनाव के प्रथम चरण में शामिल 48 दुग्ध उत्पादक समितियाें में शुक्रवार काे नाम वापसी के दिन करीब 40 समितियाें का गठन निर्विराेध हो गया। वही तीन समितियों में अब शनिवार को चुनाव होंगे। खास बात यह रही कि इस चुनाव में पूरे सियासी हल्के की नजर सिंहपुर प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड के चुनाव पर थीं। कारण यहां की समिति अध्यक्ष तथा चित्ताैड़गढ़-प्रतापगढ़ डेयरी चेयरमैन बद्रीलाल जाट का दो दिन पहले पर्चा खारिज कर दिया गया था।

इसके बाद मामला गर्माया हुआ था। हालांकि नाम वापसी के दिन मामला और राेचक हाे गया। इस समिति की प्रबंध कार्यकारिणी के कुल नाै वैध सदस्याें में से सात सदस्याें ने नाम वापस लिया और काेरम के अभाव में चुनाव प्रक्रिया स्थगित करनी पडी। इधर नाम वापसी के दिन चुनाव के लिए अधिकृत निर्वाचन अधिकारी के देरी से पहुंचने पर समिति के जुड़े सदस्याें एवं सिंहपुर के ग्रामीण एक बारगी आक्राेशित हो उठे। इसके चलते पुलिस जाब्ते में निर्वाचन अधिकारी काे लाया गया और पूरी प्रक्रिया पुलिस पहरे में हुई।

शुक्रवार सुबह आठ बजे से ही सिंहपुर स्थित प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समिति लिमिटेड परिसर के बाहर बड़ी संख्या में ग्रामीणाें की भीड़ जमा हाेने लगी थीं। समर्थक लाेग चेयरमैन बद्रीलाल जाट का पर्चा खारिज हाेने की बात पर पहले से ही गुस्से में थे। नियमानुसार निर्वाचन अधिकारी काे करीब दस बजे तक पहुंचना था, लेकिन नहीं पहुंच पाए।

इस कारण समिति के वैध सदस्य सहित कुछ ग्रामीणाें ने आक्राेशित हाेकर इसे राजनीति द्वेषता करार देते हुए कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी करने लगे। समर्थकों ने आराेप लगाया कि राजनीति द्वेषता के चलते निर्वाचन अधिकारी यहां पर 12 बजे बाद पहुंचे रहे हैं ताकि किसी की नाम वापसी नहीं हाे। ग्रामीणाें ने इस बाबत डेयरी, उप रजिस्ट्रार एवं प्रशासनिक अधिकारियाें से शिकायत भी की। वहीं दूसरी और निर्वाचन अधिकारी काे भनक लगी की सिंहपुर में माहाैल गरमा रहा है।

इसके बाद वे पुलिस जाब्ते के संरक्षण में पहुंचे। पुलिस पहरे में वैध नाै में से सात सदस्याें ने अपने अपने नाम वापस लिए। इस कारण काेरम के अभाव में इस समिति की चुनाव प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। थानाधिकारी हिमांशु सिंह के माैजूदगी में ही प्रक्रिया पूर्ण हाेने पर निर्वाचन अधिकारियाें काे पुलिस जाब्ते में ही सिंहपुर से रवाना किया गया।

पुलिस पहरे में पूरी प्रक्रिया... सिंहपुर में नाम वापस लिए

सिंहपुर में समिति चुनाव में वैध सदस्य गाेपाल पुत्र राधाकृष्ण, बालूलाल पुत्र मिठूलाल, रामेश्वर पुत्र माधूलाल, शांता पत्नी भैरूलाल, किशनलाल पुत्र भैरूलाल, शंकरीबाई पत्नी डालचंद, भवानीराम पुत्र माधू ने नाम वापस लिए। जबकि दाे सदस्य शंकर पुत्र कजाेड़ व श्यामदास नाम वापसी के लिए पहुंचे ही नहीं। इधर नाै में सात सदस्याें द्वारा नाम वापसी के बाद डेयरी चेयरमैन बद्रीलाल जाट के समर्थक खुशी जताते हुए जयकारे लगाने लगे। पंस सदस्य दिनेश पाराशर सहित गांव के लाेग माैजूद थे।

अब फिर से हाेंगे इस समिति के चुनाव पर
इस समिति की चुनाव प्रक्रिया निरस्त हाेने के बाद अब फिर से इस समिति के चुनाव हाेंगे। इसकी घाेषणा सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण तय करेगा। चुनाव के लिए क्या नई प्रक्रिया अपनानी हाेगी। इधर शुक्रवार काे 48 समितियाें में नाम वापसी का दिन था।

इसके लिए सहकारी निर्वाचन प्राधिकरण के निर्देशानुसार उप रजिस्ट्रार कार्यालय से डेयरी में एक कंट्राेल रूम बनाया हुआ था। उस पर नियुक्त कार्मिक देर शाम तक नाम वापसी की जानकारी लेने में जुटे रहे। अनुमान के अनुसार करीब 48 में से करीब 40 समितियाें के चुनाव निर्विराेध हाेेते दिखे।

डेयरी चेयरमैन जाट ने कहा: कानूनी चुनाैती देंगे, राजनीति द्वेषता से पर्चा खारिज किया था, ऐसा प्रदेश में अन्य जगह नहीं हुआ
नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी हाेने के बाद तत्कालीन डेयरी चेयरमैन एवं सिंहपुर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष बद्रीलाल जाट ने कहा कि राजनीति साजिश के तहत पर्चा खारिज किया गया है। जबकि राजस्थान सहकारी साेसायटी संशाेधित अधिनियम के तहत 2016 के बाद पहली बार नामांकन पत्र भरा है।

पत्र काे जिम्मेदार अधिकारियाें ने सरकार के जनप्रतिनिधियाें के दवाब में आकर खारिज किया है जाे काननून गलत है। ऐसा प्रदेश में अन्य जगह कही नहीं हुआ। यहां पर राजनीति द्वेषता के चलते अधिकारियाें ने पत्र खारिज किया है। इसकी बानगी नाम वापसी के दिन के घटनाक्रम काे देखकर लगाई जा सकती है।

सुबह साढे़ नाै बजे तक नियुक्त निर्वाचन अधिकारियाें काे पहुंचना था। नाम वापसी के लिए काेरम के अधिकांश सदस्य तैयार बैठे रहे। 12 बजे बाद निर्वाचन अधिकारी साेची समझी साजिश के तहत पहुंचे ताकि जल्द बाजी में समिति के वैध सदस्य नाम वापस नहीं कर पाये और सरकार के दबाव में किसी काे भी अध्यक्ष बना दे।

इसी कारण समिति सदस्याें एवं ग्रामीणाें ने गुस्सा जताया है। इस पूरे मामले काे हाइकाेर्ट में चुनाैती दी जा रही है। दाेषी अधिकारियाें काे बख्शा नहीं जाएगा। मेरा सभी अधिकारियाें एवं शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियाें से प्रार्थना है कि सरकारें आती जाती रहती है। नियमानुसार काम करके न्याय करे ताकि डेयरी से जुडे़ किसान एवं आमजनाें की भावनाओं पर खरा उतरे।

मामला संवेदनशील हाेने से देर हाे गई
नाम वापसी के दिन सिंहपुर में मामला संवेदनशील था। स्थिति काे देखते हुए पुलिस जाब्ता के साथ आते आते थाेड़ी देर हाे गई। साढे़ 11 बजे सिंहपुर पहुंचे। लेकिन नियमानुसार समयनुसार ही नाम वापसी की प्रक्रिया हुई। सिंहपुर में नाै से सात सदस्याें ने नाम उठा लिए। अत: काेरम के अभाव में चुनाव प्रक्रिया स्थगित हाे गई।
-कुलदीप बारहठ, इरफान खान, निर्वाचन अधिकारी सिंहपुर

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