राजस्थान में रावण का अंतिम संस्कार:शैया पर लेटाकर परंपरा के अनुसार रस्म अदा की,गोबर से 8 फीट का पुतला बनाकर दी विदाई

चित्तौड़गढ़3 महीने पहले
रावण के पुतले का अंतिम संस्कार करते हुए।

दशहरे में रावण के पुतले का दहन हर साल होता है। एक तरीके से रावण की मौत का जश्न मनाया जाता है, मगर राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में पहली बार रावण को सम्मान देते हुए अंतिम संस्कार किया गया। गोबर से बने 8 फीट के पुतले को शैय्या पर लेटाकर पूरे विधि-विधान के साथ अंतिम विदाई दी गई। गोनंदी संरक्षण समिति और श्री नीलिया महादेव गोशाला समिति के सदस्य राण के पुतले की अर्थी लेकर आए। शहर के पाडन पोल क्षेत्र में आज दोपहर सनातन और शास्त्रों के अनुसार रावण को विदाई दी गई।

सनातन धर्म के अनुसार दी अंतिम विदाई
कामधेनु दिवाली महोत्सव समिति के संयोजक कमलेश पुरोहित ने बताया कि रावण का करीब 8 फीट का पुतला गाय के गोबर और अन्य इको फ्रेंडली सामान से तैयार किया गया था। समिति के सदस्य रावण की अर्थी लेकर पहुंचे और मंत्रोच्चार के साथ अंतिम संस्कार की विधी की गई।
पुरोहित ने कहा कि आज तक रावण के पुतले को खड़ा कर जलाया जाता है। पहला मौका है, जब पुतले को लेटा कर सनातन परंपरा के अनुसार क्रियाएं की गई। रावण एक वीर योद्धा और ब्राह्मण था। दुश्मन ही क्यों न हो अंतिम संस्कार हमेशा सम्मानपूर्वक होना चाहिए। रावण की मौत पर जश्न मनाने की परंपरा के विपरीत हिन्दू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार की रस्म अदा की गई।

रावण के पुतले की अर्थी को लाते हुए।
रावण के पुतले की अर्थी को लाते हुए।

शास्त्रों में नहीं है रावण दहन पर उत्सव मनाने की परंपरा
कामधेनु दिवाली महोत्सव समिति के संयोजक पंडित विष्णु दत्त शर्मा ने कहा कि देश में लंबे समय से रावण दहन की गलत परंपरा चली आ रही है। इस परिपाटी को बदलने की जरूरत है। रावण ब्राह्मण, योद्धा और वीर था। रामायण या शास्त्रों में कहीं भी रावण के दहन पर उत्सव या आतिशबाजी का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि बाजारवाद के इस दौर में रावण का दहन एक तमाशा बन गया है। समिति की कोशिश है कि दशहरे की सही और साथर्क परंपरा को आगे बढ़ाया जाए।

1008 गांवों में भेजे जाएंगे दीपक
रावण दहन के बाद दीपावली की तैयारियां शुरू हो जाएगी। श्रीनिलिया महादेव गौशाला समिति की ओर से भगवान राम के स्वागत के लिए 1008 गांव में गाय के गोबर से बने दीपक भिजवाए जाएंगे। गोबर से बने दीपकों से मंदिरों में भी रोशनी की जाएगी।

गोबर से दीपक, अगरबत्ती बनाते
श्रीनिलिया महादेव गौशाला समिति की ओर से करीब 4 साल से गोबर से बने गणेश जी, दीपक, अगरबत्ती बनाए जा रहे हैं। गोबर से बने 11 फीट 4 इंच की गणेश जी की मूर्ति स्थापित की हुई है। इसके अलावा हर साल लगभग 2000 मूर्ति बनाकर बाहर भेजते हैं। पिछले साल दिवाली में सवा लाख गोबर के दीपक दिए थे, जिसे दुर्ग पर जलाए गए थे। समिति ने नई परंपरा शुरू की है, जिसमें गजानन बनाने के बाद विसर्जन न कर जलवा पूजन किया गया।

खबरें और भी हैं...