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गांधीसागर सेंचुरी में छोड़े गए 80 चीतल:चीतों के शिकार के लिए प्रे-बेस बनाने के लिए छोड़े जा रहे चीतल, इसी महीने 132 चीतल छोड़े गए, सेंचुरी में चीते लाने की हो रही प्लानिंग

चित्तौड़गढ़एक वर्ष पहले
गांधी सागर सेंचुरी में छोड़े गए 80 चीतल।

चित्तौड़गढ़ सीमा से लगे गांधीसागर सेंचुरी में वन विभाग ने चीतों को लाने का काम तेज कर दिया गया। जिसके चलते बोमा पद्धति से चीतल पकड़ कर यहां छोड़े जा रहे हैं। गुरुवार को भी यहां 80 चीतल छोड़े गए। चित्तौड़गढ़ सीमा से लगते हुए गांधी सागर सेंचुरी में गुरुवार को 80 चीतल छोड़े गए। यहां चीतों का निवास हो सके इसकी तैयारी की जा रही हैं। चीते के शिकार के लिए प्रे-बेस बनाने के लिए ये चीतल छोड़े गए हैं। यह अभियान जनवरी में ही शुरू हो चुका था, लेकिन कोरोना के कारण अभियान पर ब्रेक लग गया। कोरोना केस कम होते ही अब दुबारा अभियान शुरू किया गया है।

जनवरी से शुरू किया था अभियान, कोरोना के लगा ब्रेक

चीतों को गांधीसागर वन अभ्यारण में लाने और उनके खाने के लिए नृसिंहगढ़ सेंच्युरी से चीतल लाने का अभियान शुरू किया गया था। मार्च में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए अभियान रोक दिया गया था। गांधीसागर के जंगलों में गुरुवार को 80 चीतल छोड़े गए।

कोरोना के बाद यह दूसरी खेप है। इसी महीने में अब तक 132 चीतल गांधीसागर वन अभ्यारण में छोड़े जा चुके हैं। रेंजर पत्रालाल रायकवार ने बताया कि पहले शासन स्तर पर इस सेंचुरी में देश के जाने-माने विशेषज्ञों ने निरीक्षण किया, इस दौरान उन्होंने इसको चीतों के लिए अनुकूल और सुरक्षित बताया था। इसके तहत चीतल को यहां बसाया जा रहा है। अधीक्षक एस. के. अटोले ने बताया कि जनवरी से लेकर अभी तक 196 चीतल गांधीसागर सेंचुरी में छोड़े जा चुके हैं।

बोमा पद्धति से हुई शिफ्टिंग

रेंजर पत्रालाल रायकवार ने बताया कि चीतलों को बोमा पद्धति से शिफ्ट किया गया। इसमें चीतलों को पहले लगभग 20 से 50 एकड़ में चारा डाला गया। लगभग 10 दिन तक एक ही जगह पर खाने के आदी होने के बाद इस एरिया की फैसिंग की गई। इसके बाद धीरे-धीरे इस एरिया को कम किया गया। इसके बाद पिंजड़ा लगाकर इन्हें पकड़ा गया।

रावतभाटा क्षेत्र और गांधीसागर सेंचुरी को माना गया था चीते के लिए उपयुक्त

पिछले दिनों कुछ विशेषज्ञ दल ने जिले के रावतभाटा क्षेत्र और गांधी सागर सेंचुरी क्षेत्र का दौरा किया गया था। इस दौरान उन्होंने चीते के लिए सबसे अच्छी जगह माना था। भले ही चीते को गांधीसागर सेंचुरी में छोड़ा जाएगा लेकिन रावतभाटा तक उसका क्षेत्र होगा।

बढ़ेगा इको टूरिज्म, ग्रामीणों को मिलेगा रोजगार

चीतों को लाने से रावतभाटा क्षेत्र में भी ईको टूरिज्म भी बढ़ेगा। साथ में पर्यावरण को भी लाभ होगा। क्षेत्र में टूरिस्ट आएंगे तो लोकल ग्रामीणों को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे। एक तरफ मुकुंदरा नेशनल पार्क और दूसरी तरफ गांधीसागर सेंचुरी में पैंथर, टाइगर के साथ अब चीता भी दिखेगा। इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में हिरण और अन्य वन्य जीव मौजूद हैं जो पैंथर, टाइगर और चीते के लिए अच्छे शिकार हैं। इनके विकास और विस्तार के लिए यह लाभदायक स्थिति है।

छोडने के बाद जंगल की तरफ भागते हुए चीतल।
छोडने के बाद जंगल की तरफ भागते हुए चीतल।

कंटेंट और वीडियो दिलीप वाधवा, रावतभाटा

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