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शारदीय नवरात्र:चैन्नई से माता-पिता के साथ फ्लाइट में सवा किलो इलायची की माला लेकर आया भक्त,दिनभर महकता रहा पूरा मंदिर

चित्तौड़गढ़9 दिन पहले
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दुर्ग स्थित बाण माता मंदिर में इलायजी की माला धारण करवाते हुए पुजारी
  • कोरोना में भी मेवाड़ की कुलदेवी बाणमाताजी के प्रति अन्य प्रांतों में प्रवासी भक्तों की आस्था में कमी नहीं

रविवार सुबह 8 बजे। दुर्ग स्थित बाणमाता-अन्नपूर्णा माता मंदिर सामान्य धूप-अगरबत्ती व नवरात्र अनुष्ठान, श्रृंगार के साथ कुछ अलग भीनी-भीनी सुगंध से महक रहा है। पता चला कि यह दक्षिण भारतीय फूलों और इलायची से बनी सवा किलो वजनी और सवा चार किलो लंबी आकर्षक माला का कमाल है। जो कि बाणमाताजी का एक भक्त ठेठ चैन्नई से लेकर आया है।

कोरोनाकाल के शारदीय नवरात्र में प्रसिद्व शक्तिपीठों पर भले ही जनभेदनी और मेले-जत्थे दिखाई नहीं दे रहे। रविवार को तो असावरामाताजी, झांतलामाताजी व जोगणियामाता के साथ दुर्ग स्थित कालिकामाता मंदिर भी दर्शनार्थ बंद रहा। इसके बाद भी देवी भक्तों की श्रद्वा और आस्था में कमी नहीं है। रविवार को दुर्ग पर ही इसके दो उदाहरण देखने में आए।

पहला आबादी क्षेत्र में स्थित बाणमाता मंदिर में। जहां चेन्नई से आया युवक माता को दक्षिण भारत के सुंगधित पुष्पों के साथ इलाइची की वजनी माला पहना कर रवाना हो गया। चूंकि यहां दर्शन खुले हैं, इसलिए रविवार को मेवाड़-मारवाड़ सहित गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत तक से आए भक्तों ने अपनी मुराद व मन्नत पूरी की।

थर्मल स्क्रीनिंग और सेनेटराइज के साथ ही एंट्री...दुर्ग पर कालिकामाता के साथ बाणमाता-अन्नपूर्णा माता मंदिर परिसर में भी कोविड गाइडलाइन देखते ही बनती है। मास्क पहने श्रद्वालुओं की सबसे पहले थर्मल स्क्रीनिंग और हाथ सेनेटाइज करने के बाद घुमावदार बेरिकेडिंग के जरिये मंदिर में जाने दिया जा रहा। उसमें भी डिस्टेसिंग के साथ सिर्फ दर्शन की अनुमति। माला-प्रसाद पर प्रतिबंध है। सीसीटीवी कैमरों से नजर रखने के अलावा सुरक्षा गार्ड भी तेनात है।

सवा चार फीट लंबी माला लाया परिवार...देवी को शादी का न्यौता देकर गए
भक्त की गुजारिश पर ही भास्कर उनका नाम नहीं लिख रहा। वह चेन्नई से शुक्रवार को अपने माता-पिता के साथ फ्लाइट में निकला और उदयपुर से टैक्सी कर शनिवार शाम चित्तौड़गढ़ शहर में पहुंच गया। पुजारी मुकेश पालीवाल के अनुसार हमारे पास दो दिन पहले ही फोन आ गया था कि ये वहां से सवा किलो वजनी ग्रीन सुंगधित इलायची और वहीं के फूलों की माला बनवाकर ला रहे हैं। इसलिए इसे आज देवी के

राजराजेश्वरी श्रृंगार में शामिल किया गया। सवा चार फीट लंबी ऐसी माला पहली बार अर्पित हुई। वैसे भी पूजा में इलायची का महत्व है। पुजारी पालीवाल के अनुसार यह युवक चार साल और उसके माता-पिता 20 साल से बाणमाता के दर्शन करने आ रहे हैं। परिवार इसे अपनी कुल और इष्टदेवी मानता है। नवंबर में युवक की शादी भी है। इसलिए परिवार विशेष तरह की माला के साथ निमंत्रण पत्रिका की प्रथम प्रति भी देवी चरणों में भेंट कर गया।

क्या है इतिहास-इसलिए मूर्ति का महत्व अलग... इतिहासकार डा श्रीकृष्ण जुग्नू के अनुसार श्रीबाणमाताजी मेवाड़ राजपरिवार की कुलदेवी है। चूंकि यहां शिशोदिया राजवंश रहा है। इसलिए देशभर में किसी भी जाति में विभक्त हुए शिशोदिया गौत्र वाले परिवार इसे अपनी कुलदेवी मानकर दर्शन व पूजा के लिए आते हैं। छठी सदी से आज तक चल मूरत पूजन प्रचलित है। क्षीरसागर में कमल-आसीन, अंकुशधारी माताजी की

रजत पटटी पूजित रही है। अंकुश क्यों-क्योंकि समाज में बुराइयों को पूरी तरह नहीं निकाला जा सकता। वह तो सतयुग से चली आ रही है किंतु एक कुशल शासक उन पर अंकुश अवश्य लगा सकता। पुजारी मुकेश पालीवाल के अनुसार प्रतिमा सातवी शताब्दी में शासक बप्पा रावल के समय स्थापित हुई मानते हैं। मूर्ति में चार हाथ है जो दुर्गा सप्तसती के अनुसार ब्राहमणी स्वरूपा का रूप है। इसी परिसर में अन्नपूर्णा माता इष्ट

देवी के दर बंद रहे पर सीढियों पर लाइव दर्शन के साथ आरती में शामिल हुए आए हुए भक्त...नवरात्र के पहले दिन दर्शन खुले रखने वाले कालिकामाता मंदिर समिति ने भी रविवार को दरवाजे पूरी तरह बंद रखे। इसकी पूर्व सूचना के बावजूद अल सुबह से शाम तक भक्त आते रहे। सुबह श्रृंगार आरती के दौरान चेनल गेट बंद रखकर वहां एलइडी लगाई गई। मास्क पहने श्रद्वालु देर तक सीढियों पर ही खड़े खड़े लाइव दर्शन के साथ आरती गाते रहे। अंदर व बाहर पुलिस व मंदिर कर्मचारी तैनात रहे।देवी है। जो एक तरह से महालक्ष्मी ही है। मेवाड़ में धन-धान्य का महत्व रहा है। इसलिए इसे अन्नपूर्णा नाम दिया।

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