यहीं प्रकट हुए थे सांवलिया सेठ:सिक्सलेन पर 500 मीटर ओवरब्रिज के बाद एक्सीडेंट फ्री हुआ धार्मिक चौराहा

चित्ताैड़गढ़2 महीने पहले
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  • प्राकट्य स्थल सांवलियाजी मंदिर और इसके पास चित्तौड़-उदयपुर सिक्सलेन के बदले स्वरूप की 400 फीट ऊंचाई से 180 डिग्री एंगल से ली तस्वीर

दिल्ली-अहमदाबाद वाया चित्तौड़-उदयपुर एनएच पर बागुंड-भादसोड़ा चौराहा की यह बदली हुई तस्वीर है। जहां हाइवे किनारे प्राकटय स्थल सांवलियाजी मंदिर बना है। फोरलेन से सिक्सलेन कन्वर्जन के प्रोजेक्ट में यहां 500 मीटर लंबा ओवरब्रिज 2 साल में बनकर तैयार हुआ। पहले फोरलेन होते हुए भी यह एक्सीडेंट जोन था। बड़े हादसे भी हो चुके हैं। ब्रिज बनने के बाद एक भी हादसा नहीं हुआ।

न पहले की तरह जाम लगता है। दैनिक भास्कर ने 400 फीट ऊंचाई पर जाकर 180 डिग्री एंगल से बदले हुए नजारे की यह तस्वीर ली। प्राकटय स्थल पर दर्शन व विश्राम के लिए ट्रक चालक अपने भारी वाहन भी घंटों फोरलेन पर ही खड़ा कर देते थे।

इनसे और चारों मार्ग पर आवाजाही से कई बार जाम की स्थिति बनती। दो तीन किमी तक लाइन से फोरलेन पर भी ट्राफिक बाधित होता था। अब पहले की सड़क पर हाईवे ओवरब्रिज बनने के बाद समस्या से छुटकारा मिल गया। सांवलियाजी और भादसोड़ा-शनिमहाराज सहित हाईवे पर आने की क्रासिंग इसके नीचे और सर्विस लाइनो से हो गई। हां, कई ट्रक चालक जरूर अब भी ब्रिज के ऊपर गाड़ी खड़ी कर 300 मीटर चलकर दर्शन करने जाते हैं।

जिले के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए जाने वाले मुख्य मार्ग भी यहीं से गुजरते हैं

चित्तौड़-उदयपुर हाईवे के इस चौराहे से एक मार्ग मंडफिया और दूसरा भादसोड़ा गांव और शनिमहाराज-कपासन की ओर जाता है। इसकी बड़ी अहमियत, व्यस्तता व पहचान चित्तौड़गढ़ जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों के कारण बनी। प्राकटय स्थल सांवलियाजी मंदिर तो इसी के किनारे है। मंडफिया सांवलिया सेठ सहित सांवलियाजी की तीन मूर्तियां करीब 150 साल पहले जमीन से इसी जगह प्रकट हुई थी। एक मूर्ति यहीं स्थापित होने से यह प्राकटय स्थल मंदिर कहलाता है। इसका भी धीरे धीरे काफी विकास व विस्तार हुआ। शनि महाराज आली, मंडफिया सांवलियाजी, आसावरामाता, कपासन स्थित दीवानाशाह दरगाह शरीफ सहित नाथद्वारा व निंबाहेड़ा आने जाने वाले श्रद्वालुओं व यात्रियों का भी मुख्य रास्ता होने से इस चौराहे पर ट्रेफिक दबाव रहता है। खासकर चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, शनिवार, एकादशी एवं प्रमुख त्योहारों पर।

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