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ऐसी इंसानियत की जरूरत:अजनबी मरीज को प्लाज्मा देने पहुंची दुल्हन रीना

चित्तौड़गढ़12 दिन पहलेलेखक: राजनारायण शर्मा
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  • चित्तौड़ आई दुल्हन का रिप्लेसमेंट में नाम लिखवाकर मरीज को दिलाया प्लाज्मा

कोरोना संक्रमण की भयावहता के बीच मानवता का जज्बा भी कायम है। उदाहरण दुल्हन रीना सोनी है। शादी के दौरान ही एक कोविड मरीज को प्लाज्मा की जरूरत सुनी तो वो वह भाई के साथ प्लाज्मा देने निकल पड़ी। हालांकि इसकी तय समयावधि कुछ कम होने अस्पताल ने दोनों का नाम रिप्लेस में लिखते हुए मरीज को प्लाज्मा चढ़ा दिया।

सूरत निवासी रीना का 27 अप्रैल को शहर के चंदनपुरा निवासी कैलाश सोनी के पुत्र नितिन के साथ भीलवाड़ा में विवाह हुआ। विवाह कार्यक्रम के दौरान होटल मालिक के वाॅटसएप स्टेटस पर उनके एक परिचित को तुरंत प्लाज्मा की जरुरत होने का संदेश दिखा। दुल्हन रीना और उसके भाई विनोद सोनी प्लाज्मा यानी रक्तदान के लिए जाने को तैयार हो गए। हतप्रभ परिजन एकबारगी कुछ नहीं समझ पाए। रीना ने कहा कि हम भाई-बहन मार्च में कोरोना संक्रमित हुए थे। रिकवर होने के बाद अब प्लाज्मा दे सकते हैं। मेरा ब्लड ग्रुप भी बी पाॅजिटिव है।

दुल्हन व भाई ने अस्पताल पहुंच कर ब्लड टेस्टिंग करा दी। उन्हें बताया कि आप कुछ दिन बाद ब्लड दे सकेंगे। अभी एंटी बॉडीज पूरी तरह डवलप नहीं हुई है। दोनों को रिप्लेस मानते हुए होटल मालिक के परिचित मरीज के लिए दूसरी जगह से प्लाज्मा की व्यवस्था हो सकी। अब जैसे ही इस ग्रुप के प्लाज्मा की जरूरत पड़ेगी, वे रक्तदान करने भीलवाड़ा जाएंगे।

शादी का इससे अच्छा उपहार और क्या हो सकता है, सभी आगे आएं
आपदा के समय सभी पात्र व्यक्तियों को रक्तदान के प्रति जागरूक होना पड़ेगा। उसने कई साल पहले रक्तदान किया था। कोविड संक्रमित से रिकवर होने के बाद अब वह जरूरतमंद को प्लाज्मा देना चाहती हैं। यह किसी को जीवनदान से कम नहीं है। मुझे इसके लिए काका ससुर राजेंद्र व काकी सास सीमा से भी प्रोत्साहन मिला। आखिर शादी का इससे बड़ा यादगार उपहार और क्या हो सकता है?
रीना सोनी, दुल्हन चंदनपुरा चित्तौड़गढ़

कोरोना रोगियों के लिए ऐसे दे सकते हैं प्लाज्मा
कोरोना रोगियों के लिए अस्पतालों में प्लाज्मा की भी मांग है। कोरोना पॉजिटिव रह चुके जिन लोगों की दो बार रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, 3 सप्ताह पहले ठीक हो चुके हैं। उनकी उम्र 18 से 60 साल के बीच और वजन 50 किलो या ज्यादा है। ऐसे लोग कोरोना रोगी का जीवन बचाने के लिए प्लाज्मा दान कर सकते हैं।

जिला अस्पताल में ब्लड की उपलब्धता

  • 1000 हजार यूनिट ब्लड रखने की क्षमता
  • 450 यूनिट अभी ब्लड बैंक में
  • 15 से 20 यूनिट प्रतिदिन खपत होती है

भास्कर अपील
60 दिन तक रक्तदान नहीं कर सकेंगे युवा, इसलिए पहले करें... कोरोना संक्रमण के इस कठिन समय में जहां वैक्सीनेशन ही एकमात्र इलाज नजर आ रहा है, वहीं रक्तदान के लिहाज से यह अगले दो-तीन महीने संकटकालीन भी हो सकता है। इस माह में 18 से 45 साल तक के लिए कोविड टीकाकरण शुरू हो रहा है। देश में सबसे बड़ी आबादी इसी उम्र वर्ग की है और स्वेच्छिक रक्तदान में भी इन्हीं का बड़ा योगदान रहता है। कोविड वैक्सीन की पहली और दूसरी डोज में करीब 42 दिन का अंतराल रहेगा। इसके भी 28 दिन बाद तक वैक्सीनेटेड व्यक्ति का रक्त नहीं लिया जा सकता। यानी टीका लगने के बाद 60-70 दिन तक कोई रक्तदान नहीं कर सकता। अक्सर मई-जून में ही अस्तपालों में ब्लड संकट आता है। क्योंकि भीषण गर्मी में कैंप नहीं हो पाते हैं। फिर कोरोनाकाल के कारण भी एक साल से कैंप बहुत कम ही हो पा रहे हैं। ऐसे में अपील है कि टीका लगवाने से पहले अधिक से अधिक लोग रक्तदान करें।

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