कोरोना पर फतह की 2 कहानियां:बुजुर्गों के फेफड़े में 75 फीसदी तक संक्रमण, वेंटिलेटर भी लगा; पर बेटे-बेटियों ने नहीं हारने दी हिम्मत और महामारी को दी शिकस्त

चित्तौड़गढ़7 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
भालचंद्र वानखेड़े और चंद्र प्रकाश शर्मा। - Dainik Bhaskar
भालचंद्र वानखेड़े और चंद्र प्रकाश शर्मा।

कोरोना से जंग में दवाओं के साथ ही सकारात्मक सोच रखना आवश्यक है। हौसलों को कायम रख इस महामारी का मुकाबला करना आसान है। खासतौर से जब स्थिति नाजुक हो तो दवा से ज्यादा हिम्मत काम आ रही है। चिकित्सक भी इस बात को मान रहे हैं। चित्तौड़गढ़ में 2 बुजुर्गों की कहानी सामने आई है, जिन्होंने अपनी हिम्मत और परिजनों के साथ से महामामरी को मात दी है। एक के फेफड़े में 60 तो दूसरे के फेफड़े में 75 फीसदी इंफेक्शन फैल चुका था। बेटों-बेटियों ने पूरा ख्याल रखा, हिम्मत दी तो दोनों मरीजों का हौसला नहीं डिगा और अब दोनों स्वस्थ हैं। कोरोना को मात देकर घर लौट आए हैं।

कंधा से कंधा मिलाकर डटे रहे दोनों बेटे
कल्याण नगर निवासी 64 वर्षीय भालचंद्र वानखेड़े 24 मार्च को अपनी पत्नी संग महाराष्ट्र से चित्तौड़ लौटे थे। तबीयत बिगड़ी तो कोविड टेस्ट कराया गया। रिपोर्ट निगेटिव आई, पर स्वास्थ्य लगातार गिर रहा था। उनकी पत्नी में कोई लक्षण नहीं था, बावजूद रिपोर्ट पॉजिटिव आई। ऐसे में महिला होम क्वारेंटाइन हो गई। भालचंद वानखेड़े को उनके बेटे राहुल वानखेडे ने बिरला हॉस्पिटल में भर्ती कराया। उनका सिटी स्कैन किया गया। वानखेड़े के फेफड़े में 60 प्रतिशत इंफेक्शन फैल चुका था। उनकी दिन-ब-दिन हालत खराब होती गई। बिरला हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने भी हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद वानखेड़े को उदयपुर के महाराणा प्रताप चिकित्सालय ले जाया गया। वहां पर फिर से सैंपल लिया गया, जो पॉजिटिव आया। उन्हें तुरंत कोविड केयर सेंटर भेज दिया गया। वहां उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया। वानखेड़े करीब 1 महीने तक कोरोना से जंग लड़ते रहे। इस दौरान उनकी 3 बार रिपोर्ट पॉजिटिव आई। डॉक्टर ने भी हाथ खड़े कर दिए थे। उनको संभालने के लिए उनके दोनों बेटे विनायक वानखेड़े और राहुल वानखेडे मजबूत कंधा बनकर साथ थे। इतने में राहुल वानखेडे भी संक्रमण की चपेट में आ गए। पास में ही उन्हें आइसोलेट किया गया। बड़े बेटे विनायक लगातार पिता की सेवा में लगे हुए थे। बेटों की सेवा ने भालचंद्र को हिम्मत दी और वह कोरोना की जंग जीत गए। रिपोर्ट निगेटिव आई और उन्हें जनरल वार्ड में शिफ्ट किया गया।

बेटियों ने दी हर दिन नई उम्मीद

कुंभा नगर निवासी 75 वर्षीय चंद्र प्रकाश शर्मा की कहानी भी इस कोरोना काल में हिम्मत देती है। यहां चित्तौड़गढ़ में वह अकेले रहते थे। वे जिला चिकित्सालय से रिटायर हो गए हैं। कोरोना काल में उनकी तबीयत खराब हो गई। इस दौरान बेगूं निवासी बेटी जया व्यास अपने पिता की तबीयत का सुनकर चित्तौड़गढ़ पहुंचीं। कोविड टेस्ट के लिए कहा लेकिन शर्मा ने यह कहते हुए मना कर दिया कि यह नॉर्मल वायरल है। उनकी दिन-ब-दिन बिगड़ती हालत से उनकी बेटी घबरा गई। उन्हें अस्पताल ले गए। जिला चिकित्सालय में उनका सैंपल लिया गया, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उनकी तबीयत और खराब हो गई। जिस पर उन्हें बिरला हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। सिटी स्कैन किया गया, तो 75 प्रतिशत फेफड़ों में इन्फेक्शन फैल चुका था। इतने में रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। सीपी शर्मा की हालत दिन-ब-दिन बिगड़ने के कारण उनकी बेटी जया ने उन्हें तुरंत उदयपुर के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती करवाया। 18 दिन कोरोना से जंग लड़ते रहे। नेगेटिव रिपोर्ट आते ही अस्पताल वालों ने ट्रीटमेंट पूरा करने की बात कहकर उन्हें ले जाने के लिए कहा, लेकिन उस टाइम भी उनकी हालत खराब थी। वे न उठ पाते थे। खाना भी नहीं खा पा रहे थे। उनको उदयपुर से डायरेक्ट जालौर उनकी दूसरी बेटी शिवानी के घर ले जाया गया। यहां शिवानी ने उनका पूरी तरह से ख्याल रखा। राज शिवानी अपने पिता को हिम्मत दे रही थी। बार-बार वह यही कहती रहती थी कि आप बहुत जल्दी ठीक हो जाएंगे। सकारात्मक माहौल और सोच के कारण आज वे ठीक हो गए हैं। पूरी तरह रिकवर होने में थोड़ा वक्त लगेगा।

खबरें और भी हैं...