3 गांव, 15 दिन में हर दिन एक मौत:पंच की जान गई तो चेते सरपंच ने लगवाया कैंप, मनुहार पर भी सेंपल देने में आनाकानी, मृत्यु पर कर रहे गमी की बैठकें

चित्तौड़गढ़एक वर्ष पहले
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गांव में घर तक भी जाकर लगा रहे जांच शिविर। - Dainik Bhaskar
गांव में घर तक भी जाकर लगा रहे जांच शिविर।

शहरों से ज्यादा अब कोरोना गांवों में फैल रहा है। बस फर्क ये है कि शहरों के लिए जांच के लिए आगे आ रहे है जबकि गांवों के लोगों में अभी भी जागरूकता की कमी है। इसलिए मौतों की संख्या भी गांवों में अधिक बढ़ रही है। चित्तौड़गढ़ के ग्राम पंचायत ओछ्ड़ी के तीन गांवों में लोगों में कोरोना के लक्षण होने के बावजूद भी लापरवाही सबकी जान ले रही है। वहीं, इसी लापरवाही का शिकार वार्ड नं 2 के वार्ड पंच भी हुए। वार्ड पंच की मौत के बाद अचानक से गांव वाले सकते में आ गए। सरपंच ने शनिवार को मेडिकल टीम बुलवा कर मौके पर संक्रमित के परिवार जनों व संक्रमित के संपर्क में आए लोगों का सेम्पल लिया।

वार्ड पंच की मौत के बाद डरे लोग

बराड़ा निवासी वार्ड पंच नरेंद्र सिंह की मौत को लेकर गांव वालों में डर व्याप्त हो गया। लोग अपने घरों में कैद तो हो गए, लेकिन जांच करवाने से अभी भी मना कर रहे हैं। सरपंच द्वारा समझाइश करने पर भी कोई चिकित्सालय जाने को तैयार नहीं। जबकि लगभग हर घर में सर्दी जुखाम के मरीज है। ग्राम पंचायत में हर दिन मौत हो रही है। गुरुवार की रिपोर्ट में 30 लोग पॉजिटिव पाए गए। उनके संपर्क में आने वाले केवल कुछ ही लोगों ने सेंपल दिए हैं। ग्राम पंचायत में अब तक 15 दिन में संदिग्ध 15 मौतें हो चुकी है।

सूनी गांव की सड़कें खौफ पैदा करने लगी हैं अब।
सूनी गांव की सड़कें खौफ पैदा करने लगी हैं अब।

वार्ड पंच के इलाज को लेकर लापरवाही ने ले ली जान

सरपंच मुकेश गुर्जर ने बताया कि समझदार पढ़े-लिखे लोग भी लापरवाही कर रहे हैं। वार्ड पंच नरेंद्र सिंह कई दिनों से बीमार थे, लेकिन लापरवाही की वजह से उनका स्वास्थ्य लगातार गिरता गया। जब अंतिम समय में वह हॉस्पिटल गए तो वहां उन्हें ऑक्सीजन तो मिली लेकिन वेंटिलेटर नहीं। उदयपुर ले जाया गया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इस मौत के बाद उनके परिवार जन और उनके संपर्क में आए लोग भी सतर्क हो गए और सैंपलिंग की मांग की। शुक्रवार को बराड़ा में पीएचसी देवरी इन्चार्ज आशीष गाडरी और आरबीएसके डॉ कुलदीप के नेतृत्व में 105 सेम्पल लिए गए। स्वास्थ्य टीम में रीना चौधरी, अनिता महावर, कोमल सुखवाल, शान्ति लाल गाडरी, कमलेश रायका, दुर्गा जाट भी थे।

मृत्यु के बाद टैंट लगा कर रहे बैठक।
मृत्यु के बाद टैंट लगा कर रहे बैठक।

शोक के लिए हो रहा है सभा का आयोजन

व्यक्ति के मरने के बाद भी लोग नहीं संभले। लाल जी का खेड़ा गांव में मृतक के परिजन व ग्रामीण बैठकों का आयोजन करते दिखे। इसी तरह का नजारा अन्य लोगों के घरों में भी बना रहता है जहां वे बाहर टैंट लगा रहे हैं और दिनभर लोग यहां गमी में बैठने आ रहे हैं।

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