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धर्म समाज:देवशयनी एकादशी पर मंदिर में दिवाली जैसी आभा; बाणमाता को धराया लाल शृंगार 1008 दीपक से विशेष आरती की

चित्ताैड़गढ़15 दिन पहले
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दुर्ग स्थित बाणमाता मंदिर में देवशयनी एकादशी पर विशेष श्रंगार कर 1008 दीप जलाकर महाआरती की गई। जो श्रद्वालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र भी रहा। सेवक मुकेश पालीवाल के अनुसार आषाढ़ माह शुक्ल ग्यारस मंगलवार शाम विशेष श्रृंगार लाल पोशाक का रहा।

स्वर्ण आभाओं से युक्त पिछवाई रही। मसन छतर कलश हंस शोभित लाल, सफेद हरी पुष्पों की पुष्पमाला के साथश्रृंगार किया। मोगरा इत्र, गुगल धुप, सुगंधित, धुप बत्ती गुगल की खुशबु से महकता वातावरण सोम्य गोधुलिक वातावरण हो गया।

ये श्रृंगार महिपालसिंह, छतरसिंह सिसोदिया बैंगलोर की ओर से करवाया गया। लक्ष्मण गहलोत की ओर से चुनर पुष्प हार एवं1008 दीपक प्रज्वलित करवाए गए। विशेष श्रंगार में एरि के पॉम की पतिया भी शोभित थी, जो पर्यावरण में आक्सीजन के महत्व को समझा रही थी।

एकादशी का क्या है महत्व

देवशयनी एकादशी का महत्व भारतीय संस्कृति में आदिकाल से रहा है। माना जाता है कि इस दिन से भगवान विष्णु यानी देव 4 मास के लिए चयन में चले जाते हैं। इस दौरान कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। बायण माताजी मेवाड़ कुलदेवी मानी जाती हैं।

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