डॉक्टर की सलाह:हल्के सर्दी-जुकाम में घबराएं नहीं, गाइडलाइन मानें, घर से भी उपचार लें सकते हैं

चित्ताैड़गढ़6 महीने पहले
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डाॅ. दिनेश वैष्णव, पीएमओ जिला चिकित्सालय - Dainik Bhaskar
डाॅ. दिनेश वैष्णव, पीएमओ जिला चिकित्सालय
  • जिला अस्पताल की मेडिकल विंग और कोविड अस्पताल में 370 बेड हैं...अधिकांश पर कोविड या इसके संदिग्ध मरीज हैं

कोरोना की दूसरी लहर में सांवलियाजी राजकीय जिला अस्पताल सामान्य रोगियों के लिए उपचार दूर होता जा रहा है। यहां मेडिकल विंग और निम्बाहेड़ा मार्ग स्थित कोविड अस्पताल में मिलाकर 370 बेड है। जो करीब 90 प्रतिशत भरे हैं। अधिकांश कोरोना या कोरोना संदिग्ध रोगी ही भर्ती है।

ऐसे में सर्दी-जुकाम या हल्के लक्षणों वाले मरीजों को अस्पताल की बजाय घर पर ही इलाज लेने की सलाह दी जा रही है। डाक्टर्स का कहना है कि हल्के सर्दी जुकाम से घबराए नहीं। कोरोना की गाइडलाइन को समझे और पालना करे। हल्के लक्षण वाले मरीज घर रहते हुए भी ठीक तरह से ट्रीटमेंट ले सकते हैं, केवल नियमाें एवं डाक्टर्स के परामर्श अनुसार दवाइयां लेते रहे।

टिप्स 1 अगर हल्के लक्षण हों तो घर पर ऐसे आइसोलेशन में रहें

  • बुखार ज्यादा तेज न हो और हल्के लक्षण हों तो घर में आइसोलेटेड रहे। फिजिकल डिस्टेंसिंग रखें, मास्क पहन कर रखें, हाथों को साफ करते रहें ।
  • सेंप्टोमेटिक मेनेजमेंट पर ध्यान दें। आवश्यक दवाएं जैसे बुखार के लिए, मल्टीविटामिन लें, हाइड्रेट होते रहें।
  • अपने फिजिशियन के संपर्क में रहें। शरीर का तापमान - ऑक्सीजन चेक करते रहें। पांच दिन से अधिक समय तक सांस लेने में परेशानी हो रही हो, तेज बुखार हो, सीवियर कफ हो तो तत्काल डॉक्टर को दिखाएं।

टिप्स 2 बिना ऑक्सीजन बेड वाले मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं दिलाएं

  • प्रति मिनट सांस लेने की रफ्तार 24 और ऑक्सीजन का स्तर 90-93 हो।
  • ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाए। चेस्ट टेस्ट करवाएं। .नॉन रिबिदिंग फेस मास्क का इस्तेमाल हो। वक्त - वक्त पर ऑक्सीजन थेरेपी दी जाए। जरूरत पड़ने पर लंग्स का एचआरसीटी और अन्य टेस्ट करवाए ।
  • अस्पताल में भर्ती मरीज की हालत गंभीर है, तो उसे रेमडेसिविर दी जाए। होम आइसोलेट या अस्पताल में बिना ऑक्सीजन बेड के भर्ती मरीजों को रेमडेसिविर ना दी जाएं।

टिप्स 3 आईसीयू तब ही जरूरी जब ऑक्सीजन 90 से कम होने लग जाए

  • सांस लेने की दर प्रति मिनट 30 से अधिक हो। ऑक्सीजन लेवल 90 से कम हो जाए ।
  • 60 वर्ष से अधिक के लोग , तनाव , कार्डियोवस्कुलर डिजीज, डायबिटीज, लंग / किडनी / लीवर, सेरेब्रोवस्कुलर डिजीज या मोटापे से ग्रसित गंभीर संक्रिमितों के लिए ये ज्यादा जरूरी है ।
  • वेटिलेटर का इस्तेमाल प्रोटोकॉल से किया जाए। मरीज की गंभीर स्थिति में इसका इस्तेमाल हो। रिपोर्ट कोरोना निगेटिव और बाकी सारी जांचे सही पाए जाने पर डिस्चार्ज किया जाए ।

95 प्रतिशत कोरोना मरीज घर पर ही ठीक हो जाते है

ऐसा करना क्याें जरूरी, विशेषज्ञाें के अनुसार कोरोना होने के बाद सीधे अस्पताल दौड़ने के बजाए संक्रमितों को पहले अपनी स्थिति को देखना चाहिए। क्योंकि करीब 95% कोरोना मरीज घर पर ठीक हो सकते हैं। ऐसे समय जब अस्पतालों में बेड, आईसीयू, ऑक्सीजन की कमी हो रही है।

तब साधारण कोरोना मरीजों को अस्पताल भर्ती नहीं होना चाहिए। इससे जरूरतमंद मरीजों को अस्पताल में जरूरी सुविधाएं मिल सकेंगी। हालांकि संक्रमित होने के बाद डॉक्टर से संपर्क जरूर करें क्योंकि अलग-अलग मरीजों पर यह अलग तरह से असर करता है।

इन बाताें का विशेष ध्यान रखें

  • कोविड मरीज ऑक्सीजन लेवल मॉनिटर करते रहे। 93 से कम होने पर हॉस्पिटल जाएं ।
  • सभी मरीजों को रेमडेसिवीर, प्लाज्मा, इवरमेक्टिन, ब्लड थिनर्स जैसी चीजों की जरूरत नहीं है।
  • बेड , ऑक्सीजन सिलेंडर और आईसीयू उन मरीजों के लिए हैं जो गंभीर हैं।
  • वैक्सीन लगवाने पर जोर दें। ज्यादा लोगों का टीकाकरण होगा अस्पताल पर बोझ कम होगा।
  • सरकार काे अपना सिस्टम मजबूत करना हाेगा, सख्त नियम भी जरूरी
  • जिनका इलाज घर पर हो सकता है उन्हें भर्ती न करें। सरकार एडमिशन नियम सख्त बनाए।
  • वार्ड लेवल पर प्रचार करना होगा कि किन लक्षणों के मरीज घर पर रहें , कौन से मरीज अस्पताल जाएं ।
  • टेस्टिंग , इंजेक्शन, ऑक्सीजन के लिए परिजन लाइनों में लग रहे हैं। इस भीड़ को कम करें।
  • स्राेत...परिवार कल्याण मंत्रालय व स्वास्थ्य विशेषज्ञ
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