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रिश्वतख़ोर कंप्यूटर ऑपरेटर:संविदा के बाद भी 9 साल से जमा है कंप्यूटर ऑपरेटर, कार खरीदते ही विभाग में लगा दी

चित्तौड़गढ़3 महीने पहले
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  • सरकारी सहायता राशि जारी कराने के नाम पर मजदूर से 22 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार आरोपी को जेल भेजा

श्रम विभाग में एक कंप्यूटर ऑपरेटर सरकारी सहायता राशि जारी करवाने के नाम से रिश्वत बटोरने लगा। ऐसा दबदबा बना लिया कि संविदा पर होने के बाद भी करीब 9-10 साल से जमा है। पिछले महीने किसी रिश्तेदार के नाम पर कार खरीदते ही उसे इसी कार्यालय में लगवा दिया। एसीबी उदयपुर द्वारा यहां रेलवे ट्रैक पर किए गए ट्रैप मामले में आरोपी प्यारचंद कच्छावा को दूसरे दिन शनिवार को उदयपुर एसीबी कोर्ट में पेश किया गया।

कोविड जांच के बाद उसे कोर्ट ने फिलहाल जेसी करा दिया। इंस्पेक्टर हरीशचंद्रसिंह के अनुसार दो दिन की छुटटी आ गई। इसलिए श्रम कार्यालय में दस्तावेजों व रिकार्ड आदि की जांच सोमवार से गति पकडेगी। उसके बाद ही साफ होगा कि मामले में कार्यवाहक उप श्रम आयुक्त करणसिंह यादव आदि की भी लिप्तता है या नहीं। हालांकि श्रम कल्याण योजना में डेढ़ साल पहले के आवेदन पर अब तक भी सरकारी राशि जारी नहीं होना और उसके नाम पर ऑपरेटर द्वारा 22 हजार रुपए की रिश्वत लेना विभाग पर गंभीर सवाल तो बन ही गया है।

अब तक मिली जानकारी अनुसार प्यारचंद पहली बार प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये 2012 में संविदा पर कंप्यूटर आपरेटर लगा था। एक, दो साल बाद अनुबंध खत्म होने पर हटना पड़ा तो वो हाईकोर्ट तक चला गया। बाद में अन्य प्लेसमेंट एजेंसी के जरिये वापस इसी कार्यालय में लग गया। तब से यहां जमा है।

सूत्रों के अनुसार विभाग ने करीब एक महीने पहले ही एक प्राइवेट कार को अनुबंध पर लगाया। जो प्यारचंद के नजदीकी रिश्तेदार के नाम पर ही है। हालांकि इसके लिए निविदा की औपचारिकता पूरी की गई पर मजेदार बात यह कि नई स्विफ्ट डियाजर कार शोरूम से बाहर आते ही करीब 28 हजार मासिक रुपए पर इस कार्यालय में लग गई। यानी उसका पूरा प्रोसेस पहले से तय था।

इसी कार से योजना में लाभार्थियों का सत्यापन करने जाते है: विभाग में पहले भी दूसरी प्राइवेट कार लगी थी। मियाद पूरी होने पर नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया की गई। बताया गया कि श्रम निरीक्षक व प्रबंधक आदि इसी कार से श्रमिक कल्याण योजना में लाभार्थियों का सत्यापन आदि करने जिले में जाते हैं। एसीबी ने इस योजना में ही गत पांच साल में यह चौथा ट्रैप किया।

कंप्यूटर ऑपरेटर पर ऑनलाइन वर्किंग का ही फायदा उठाने लगा
आरोपी कंप्यूटर आपरेटर का काम महज अधिकारी कर्मचारी के बताए लेटर टाइप करने, मेल चेक करने या करने आदि का है। श्रमिक कल्याण योजना में आवेदन आने के बाद उसके सत्यापन और ओके कर आगे भेजने का काम सबंधित श्रम निरीक्षक और प्रबंधक का होता है। चूंकि अब आवेदन और अन्य प्रोसेस ऑनलाइन हो गए। इसलिए कंप्यूटर ऑपरेटर इसी का फायदा उठाते हुए दलाली या खुद रिश्वत लेने जैसा काम करने लगा।

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