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चित्तौड़ के छोटे से गांव का युवक बना RAS:किसान का बेटा बना RAS, 55 हजार की नौकरी छोड़ने के बाद छोटे भाई दुर्गाशंकर ने उठाई जिम्मेदारी, भाई को दिया पढ़ने का मौका

चित्तौड़गढ़12 दिन पहले
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मोतीराम जाट ने हासिल किया ओबीसी में 78वी रैंक। - Dainik Bhaskar
मोतीराम जाट ने हासिल किया ओबीसी में 78वी रैंक।

RAS 2018 का रिजल्ट आ चुका है। इसमें चित्तौड़गढ़ के समीपवर्ती एक छोटे से गांव से 37 वर्षीय मोतीराम पुत्र वरदु जाट का चयन हुआ है। युवक ने इससे पहले 2016 में भी RAS का एग्जाम दिया था, लेकिन कामयाबी हाथ में लगी। 2018 में फिर से RAS का एग्जाम दिया, जिसमें ओबीसी श्रेणी में 78वी रैंक और सामान्य में 441वी रैंक हासिल की।
2015 में 55 हजार की नौकरी छोड़ शुरू की तैयारी
चित्तौड़गढ़ से थोड़ी दूरी पर एक छोटा सा गांव बैजनाथिया में निवासरत मोतीराम जाट शुरू से ही सरकारी स्कूल और कॉलेज से ही पढ़ाई की। बैजनाथिया से 5वीं तक, नेतावल से 8वीं तक, घोसुण्डा से 12वीं तक की पढ़ाई कर कपासन कॉलेज से ITI किया।
वहीं से मोतीराम का केंपस सिलेक्शन हुआ। जयपुर की एक निजी कंपनी BOSCH Limited में 2005 से 2015 तक जॉब की। सैलरी भी 55 हजार तक थी लेकिन दूसरे RAS अधिकारियों को देखकर RAS बनने का सपना देखा। इसलिए कंपनी से वीआरएस ले लिया।
पहले खुद ने उठाई छोटे भाई की जिम्मेदारी, बाद में छोटे भाई को दिया आगे बढ़ने का मौका
कंपनी में कार्य करने के दौरान मोतीराम ने अपने छोटे भाई दुर्गाशंकर को पढ़ाया लिखाया। घर की भी सारी जिम्मेदारी उठाई। छोटा भाई दुर्गाशंकर को जब वर्ष 2016 में मोटर वाहन उपनिरीक्षक के पद पर चयन हुआ तो मोतीराम ने अपने छोटे भाई के सामने अपने सपने का जिक्र किया।
इस पर छोटे भाई दुर्गाशंकर ने घर की सारी जिम्मेदारी उठा कर अपने भाई को आरएएस की तैयारी करने के लिए कहा। 2016 के एग्जाम में जब असफलता हाथ लगी तो मोतीराम ने हार नहीं मानी और 2018 में फिर से ट्राय किया। इस बार RAS के लिए चयन हो गया।
पिता को समझाया RAS का मतलब, बेटे का दिया पूरा साथ
मोतीराम का कहना है कि उनके पिता खेती करते हैं और मां ग्रहणी है। वही पिता चौथी पास है तो मां निरक्षर है। पिता को यह तक नहीं पता था कि RAS का मतलब क्या होता है लेकिन जब समझाया तो उन्होंने भी बेटे को हिम्मत दी कि वह आगे बढ़े। मोतीराम ने सेल्फ स्टडी कर यह मुकाम हासिल किया।

मोतीराम ने अपने लक्ष्य प्राप्ति में छोटे भाई दुर्गाशंकर को माना सबसे बड़ा पिलर।
मोतीराम ने अपने लक्ष्य प्राप्ति में छोटे भाई दुर्गाशंकर को माना सबसे बड़ा पिलर।
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