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अवैध वसूली:घूसखोरी के लिए शशांक ने गाजीपुर से नीमच लगते ही बदल डाला फैक्ट्री का पूरा निजाम

चित्तौड़गढ़7 दिन पहले
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  • एसीबी के हाथों 16.32 लाख के साथ गिरफ्तार जीएम शशांक यादव को विभाग ने सस्पेंड

अफीम किसानों से लाखों रुपए की अवैध वसूली के आरोपी आईएफएस शशांक यादव को विभाग ने निलंबित कर दिया। एसीबी जांच में दलाल की भूमिका में पाए गए नीमच फैक्ट्री के दो मातहत कर्मचारियों को भी हटा दिया गया। पूरे मामले में विभाग के कुछ और बड़े अधिकारियों पर भी सवाल उठ रहे है।

जिन्होंने नीमच फैक्ट्री के जीएम का जनवरी में अचानक तबादला कर 1200 किमी दूर गाजीपुर फैक्ट्री के जीएम यादव को अतिरिक्त चार्ज दिया। यादव ने आते ही फैक्ट्री में कई कर्मचारी अधिकारी इधर-उधर कर उसका निजाम बदल दिया। जनप्रतिनिधियों और किसानों से अवैध वसूली की शिकायतें भी पहुंचने लगी थी। इसके बावजूद कोटा एसीबी की कार्रवाई तक विभाग सोता रहा।

गाजीपुर व नीमच फैक्टरी के चीफ कंट्रोलर (सीसीएफ) अनिल रामटेके ने निलंबित जीएम शशांक के स्थान पर नीमच का अतिरिक्त प्रभार ज्वाइंट कमिश्नर डॉ. चितरंजन माझी को सौंपा है। लैब व कोडिंग विभाग में यादव से मिलकर किसानों से वसूली करने वाले अजीतसिंह व दीपक यादव को भी जांच प्रक्रिया से हटा दिया है। डॉ. माझी को संपूर्ण जांच व अन्य लोगों की भूमिका की जांच करने को कहा है। ताकि उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सके।

इस बीच नीमच जांच करने पहुंची कोटा एसीबी टीम ने स्टाफ के प्रत्येक कर्मचारी से पूछताछ कर बयान दर्ज किए। दस्तावेज भी जब्त किए। इससे भी और बड़ा खुलासा संभव है। शशांक यादव को गत जनवरी में ही नीमच फैक्टरी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था।

उसने आते ही फैक्टरी स्टाफ में कई बदलाव कर दिए थे। जिससे अधिकारी व कर्मचारी भी चौक गए थे। एसीबी अब इसकी वजह ढूंढ रही है। यादव द्वारा आनन फानन में हटाए गए अधिकारी, कर्मचारियों के बयानों से यह बात सामने आ सकती है।

अफीम किसानों से वसूले गए 16.32 लाख रुपए लेकर नीमच से गाजीपुर जाते समय डा. शशांक यादव को कोटा एसीबी ने कोटा में ही धरदबोचा था। उसे चार दिन रिमांड पर लिया गया। प्रकरण दर्ज होने के बाद एएसपी चंद्रशील ने एएसपी धर्मवीर को जांच सौंपी है। जनवरी से अब तक हुई सैंपलों की जांच का रिकॉर्ड व अन्य दस्तावेज भी जब्त किए।

अफसरों को बदलने की वजह तलाश रही कोटा एसीबी, नीमच फैक्ट्री स्टाफ के बयान लेकर जब्त किए दस्तावेज

सवाल 1 - मामले में नारकोटिक्स मुख्यालय भी सवालों के घेरे में, जानिये क्यों?

यादव ने आते ही चेहतों को तैनात किया, उनमें से कई पहले से दागदार आईआरएस डॉ. शशांक यादव ने नीमच का अतिरिक्त प्रभार मिलने के बाद इस फैक्ट्री का पूरा निजाम ही बदल डाला था। कोडिंग डिपार्टमेंट, प्रयोगशाला और मशीन विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर अपने चहेतों को तैनात किया। सूत्रों के अनुसार उनमें से कई अधिकारियों के दामन पर पहले से कोई न कोई दाग लगा था। कोटा एसीबी की एक टीम ने नीमच फैक्ट्री पर दबिश के बाद यह तहकीकात शुरू कर दी है कि यादव ने आखिर किस-किस अधिकारी-कर्मचारी को क्यों हटाया और उनकी जगह किनको और क्यों लगाया गया..?

सवाल 2 - सांसद की शिकायत पर इसी जीएम को कहा गया कि पूरी निगरानी करें

सांसद सीपी जोशी के अनुसार इस बार तौल के समय हाथ से परख के बाद फैक्ट्री में अंतिम जांच रिपोर्ट के नाम पर किसानों से अवैध वसूली की शिकायतें उनके पास भी आई। जून में उच्चाधिकारियों को पत्र से अवगत कराया, जिसमें यह भी कहा था कि ऐसा पता चल रहा है कि किसानों की अफीम को घटिया या बढिया बताने और पट्टे कटने या दिलाने के नाम पर दलाल सक्रिय हंै। सांसद के पत्र को इंगित करते हुए आला अधिकारी ने अफीम फैक्ट्री के जीएम यानी आरोपी शशांक यादव को ही निर्देश दिए कि शिकायतों की जांच करें कि अवैध वसूली तो नहीं हो रही। जबकि यादव खुद इसी काम में लगा था।

सवाल 3 - यादव के ज्वाइन करते ही 150 सैंपल फेल होने पर उठे थे सवाल

जनवरी में यादव के नीमच फैक्ट्री ज्वाॅइन करने के बाद करीब 150 सैंपल फेल हो गए थे। इनको दोबारा जांच के लिए गाजीपुर फैक्ट्री भेजा गया। फैक्ट्री में आने वाली कच्ची अफीम की पहले जांच होती है, उसके बाद अन्य प्रोसेस किए जाते हैं। करीब 150 सैंपल निगेटिव पाए जाने पर किसानाें ने शिकायत की ऐसा जानबूझकर किया गया। ताकि वसूली कर सके।

सवाल 4 - पुराने जीएम प्रमोद कुमार को हटाना और इतनी दूर बैठे यादव को लगाना

नीमच फैक्ट्री जीएम पद पर अगस्त 2019 तक आनंद कुमार तैनात थे। इसके बाद बाद अक्टूबर 2019 में नीमच के डीएनसी प्रमोद कुमार की तैनाती की गई। उनका अचानक से ट्रांसफर हुआ और जनवरी 2021 में डॉ. शंशाक यादव को अतिरिक्त प्रभार दिया गया। लगभग 1200 किलोमीटर दूर बैठे अ फसर को यहां का चार्ज देना भी किसी के गले नहीं उतरा। इस फैसले पर सवाल उठने लगे थे।

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