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ओराई बांध भी छलका:गंभीरी एक फीट और मोरवन बांध सिर्फ आधा फीट खाली, मानसून 7 दिन और सक्रिय रहेगा

चित्तौड़गढ़8 दिन पहले
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ओराई बांध पर चादर चली। - Dainik Bhaskar
ओराई बांध पर चादर चली।
  • जिले में बरसात के साथ बांध-जलाशयों में आवक भी जारी, 24 घंटे में 1 प्रतिशत और बढ़ा पानी

मानसून का सुखद दौर जारी है। जिले का एक और बड़ा बांध ओराई भी छलक गया है। जो चित्तौड़गढ़ के साथ भीलवाड़ा जिले के भी कई गांवों को सिंचित करता है। सर्वाधिक जलग्रहण क्षमता वाला गंभीरी बांध अब सिर्फ एक फीट खाली रहा है। सोमवार देर रात में बेगूं क्षेत्र का ओराई बांध भी छलक गया। इससे बेगूं-पारसोली के साथ समीपवर्ती भीलवाड़ा जिले के कमांड एरिये में भी खुशी की लहर दौड गई। ओराई की नहरों से दोनों जिलों के निकटवर्ती गांवों के खेतों के रबी सीजन को पानी मिलता है। उल्लेखनीय है कि ओराई का ओवरफ्लो पानी चित्तौड़ तहसील के बस्सी बांध में आता है। हालांकि यह बांध इससे पहले सोमवार दोपहर को ही लबालब हो गया था।

जिले के सर्वाधिक जलग्रहण वाले गंभीरी बांध में भी पानी की आवक बनी हुई है। यह मंगलवार शाम तक 22 फीट हो गया। यानी अब सिर्फ एक फीट खाली है। गंभीरी बांध चित्तौड़गढ़ व निम्बाहेड़ा क्षेत्र के कई गांवों की लाइफलाइन है। जिले में सर्वाधिक कमांड एरिया इसी बांध का है। बांध की जलराशि देखने बड़ी संख्या में ग्रामीण भी पहुंचने लगे। जिले के कुल सिंचाई बांधों में जल भंडारण अब 35.98 प्रतिशत हो गया है। एक दिन में करीब 1 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। इधर, जिले में बरसात का दौर कुछ धीमा पड़ा मगर बंद नहीं हुआ। शहर में मंगलवार को दिनभर सूखे के बाद शाम को बादल छाए व बूंदाबांदी भी हुई। सुबह से शाम 5 बजे के बीच चित्तौड़गढ़ व गंभीरी बांध पर 3-3 मिमी बारिश हुई। जिले में मंगलवार सुबह तक कुल 648.73 मिमी बारिश हो चुकी थी। जो कुल सीजन का 86.50 प्रतिशत है।

छतीसगढ़-उड़ीसा से मप्र होकर आने वाला है एक और चक्र, गंभीरी छलकने की उम्मीद

मौसम केंद्र जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा के अनुसार वर्तमान में छत्तीसगढ़ व उड़ीसा क्षेत्र के ऊपर एक अंत्यत कम दबाव का मानसून तंत्र बना हुआ है। इसके आगामी 48 घंटे में छतीसगढ़ व मप्र होते हुए पूर्वी राजस्थान में बढ़ने की प्रबल संभावना है। इस नए सिस्टम का असर बुधवार से पड़ना शुरू होगा। पूर्वी राजस्थान के ज्यादातर भागों में 5-7 दिन मानसून सक्रिय रहेगा। गुरुवार व शुक्रवार को इसका असर ज्यादा रहेगा। कोटा व उदयपुर संभाग के कुछ जिलों में कहीं कहीं भारी या अति भारी बारिश भी संभव है। इस लिहाज से गंभीरी बांध के सीजन में पहली बार छलकने के पूरे चांस है। इसमें आवक का एक बड़ा स्त्रोत मप्र का मोरवन बांध है। जो अब आधा फीट ही खाली है। वैसे भी गंभीरी बांध करीब 90 प्रतिशत तक भरा चुका है। यदि पश्चिम मप्र व पूर्वी राजस्थान में इसके कैचमेंट एरिये में ज्यादा बारिश होती है तो बांध से बड़ी जलराशि भी ओवरफ्लो हो सकती है। इससे शहर में गंभीरी नदी का जलस्तर भी बढ़ेगा।

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