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आपदा अवसर में बदली:निम्बाहेड़ा के मरजीवी गांव में किसान ने 2019 में नया ट्राय करने के लिए उगाई अश्वगंधा के फसल, कोविड ने कर दिया दुगुना मुनाफा; दो सालों से जुड़ रहे हैं अन्य किसान

चित्तौड़गढ़13 दिन पहले
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मरजीवी में अश्वगंधा की खेती (फाइल फोटो)। - Dainik Bhaskar
मरजीवी में अश्वगंधा की खेती (फाइल फोटो)।

जिले के किसान अब औषधीय फसलों पर ज्यादा से ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। कोविड-19 के समय में औषधीय पौधों पर लोगों का भरोसा बहुत अधिक बढ़ा है। जिले के एक छोटे से गांव में एक किसान ने नया ट्राई करने के लिए अश्वगंधा की खेती शुरू की।

उसके बाद कोरोना संक्रमण शुरू होने से एकदम से इसकी डिमांड बढ़ गई। इससे किसान को दोगुना मुनाफा मिलने लगा। निंबाहेड़ा उपखंड के एक गांव मरजीवी में दशरथ पुत्र श्रीलाल आंजना ने 2019 में पहली बार अश्वगंधा की खेती शुरू की थी।

यह फसल लगभग साढ़े 4 महीने की होती है। अश्वगंधा की खेती सर्दियों की फसल है। गर्मियों में इसकी कटाई होने के बाद उसे नीमच में मंडी में बेची गई। इसके बाद 2020 में कोरोना के समय जब इसकी डिमांड बढ़ी तो किसान को रिटर्न अच्छा मिला। अब इसी गांव के 10 से 15 किसानों ने अपने-अपने खेतों में इस फसल की शुरुआत की।

3 आरी जमीन से की शुरुआत, केवल 500 रुपए के खर्चे पर मिले 8 हजार रुपए

दशरथ आंजना ने बताया कि एक बीघा जमीन के लिए लगभग 4 से 5 किलो बीज की जरूरत पड़ती है। इसकी फसल सर्दी में रेडी होती है। इन साढ़े चार महीनों में लगभग 6 बार इसकी पिलाई की जाती है। शुरू में मध्यप्रदेश में उनके एक परिचित ने इसका आईडिया दिया था।

मन में शंका होने के कारण सिर्फ 3 आरी जमीन पर टेस्टिंग के लिए बुवाई की थी। उन्होंने बताया कि कोविड-19 यह समय आएगा पता नहीं था। अश्वगंधा ऐसी फसल है जिसकी जड़, बीज, भूसी तीनों काम आती है। केवल 500 रुपए के खर्चे पर आठ हजार रुपए का प्रॉफिट हुआ।

तीनों से जब अच्छा रिटर्न मिला तो 2020 में सवा बीघा जमीन पर फिर से इसकी खेती की गई। सबसे अच्छी बात है कि लोग भी अब जुड़ने लगे हैं। गर्मियों में इसकी कटाई के बाद तीनों चीज वापस नीमच मंडी में बेच दी गई। मध्यप्रदेश में अश्वगंधा की बहुत डिमांड है। इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इस इसकी दवाइयां बनाई जाती हैं जिसके लिए अन्य राज्यों में भी इसे भेजा जाता है।

अश्वगंधा की लहराती फसल (फ़ाइल फोटो)
अश्वगंधा की लहराती फसल (फ़ाइल फोटो)

अश्वगंधा के बीज, जड़ और भूसी के मिलते हैं अच्छे दाम

आंजना ने बताया कि सवा बीघा जमीन में लगभग 3.5 से 5 क्विंटल पैदावार होती है। वर्ष 2020 में सब किसानों का मिलाकर 15 से 20 बीघा जमीन पर इसकी बुवाई की गई थी। हालांकि इसमें मजदूर अधिक लगते हैं। सवा बीघा जमीन से इसकी 3 से 4 क्विंटल जड़ मिली है। जड़ 30 हजार पर क्विंटल के हिसाब से बिकती है। एक बीघा जमीन में 15 क्विंटल भूसी भी निकली है जो 4 से 5 हजार क्विंटल के हिसाब से बिकती है। इसके जो बीज है वह भी 100 रुपए किलो के हिसाब से बेची जाती है। 2020 में सवा बीघा जमीन पर 2 लाख 10 हजार रुपए का रिटर्न मिला हुआ है। उनमें से केवल 15 से 20 हजार मजदूरों के और बीज का खर्चा हुआ था। बाकी सब प्रॉफिट हुआ है।

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