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RTE के भुगतान को लेकर स्कूल संचालकों की उलझन:कई निजी विद्यालयों में नहीं हुई ऑनलाइन क्लासेस, कैसे होगा RTE का भुगतान, डोर-तो-डोर पढ़ाने का रिकॉर्ड भेजना भी मुश्किल

चित्तौड़गढ़25 दिन पहले
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जिले में कई निजी विद्यालय ऐसे होंगे जहां ऑनलाइन क्लासेस नहीं हुई हैंं। ऐसे में शिक्षा के अधिकारी (RTE) भुगतान के लिए ऑनलाइन क्लासेज के रिकॉर्ड विद्यालय नहीं दे पा रहा है। कई विद्यालयों द्वारा ऑफलाइन पढ़ाये जा रहे हैं जबकि रिकॉर्ड के आधार पर RTE का भुगतान करने की मांग की जा रही है। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा जिन विद्यालयों ने अपने रिकॉर्ड नहीं भेजे, उनको अपना रिप्रेजेंटेशन भेजने को कहा गया है।

जिले में लगभग 650 निजी विद्यालय हैं। छोटे विद्यालयों के संचालको ने अभी तक ऑनलाइन क्लासेज के रिकॉर्ड नहीं भेजे हैं।स्कूल प्रबंधकों का कहना है कि कोरोना काल में ऑनलाइन क्लासेज का रिकॉर्ड दे पाना आसान नहीं है। ऐसे में भुगतान के लिए इसे आधार नहीं बनाना चाहिए।

दरअसल, 6 मई को आदेश जारी करते हुए निदेशालय ने निर्देश दिए थे कि सत्र 2020-21 के लिए ऑनलाइन कक्षा विवरण और विद्यार्थियों की सूची देनी होगी। यानी स्कूलों को वेरिफिकेशन के लिए ऑनलाइन क्लासेज का रिकॉर्ड देना होगा। जिसके आधार पर अध्ययनरत कुल विद्यार्थियों का भुगतान होगा।

डोर तो डोर पढ़ाने का कैसे दे हिसाब?

गैर अनुदानित निजी शिक्षण संस्था संचालक समिति के जिलाध्यक्ष नरेंद्र पुरोहित ने बताया कि कई विद्यालय ऐसे है, जहां ऑनलाइन क्लासेस आयोजित ही नहीं हुई है। शिक्षक डोर टू डोर जाकर पढ़ाई करवाई। कई बच्चों के अभिभावकों के पास स्मार्ट फ़ोन नही है। उनको वर्क बुक के आधार पर पढ़ाई करवाई गई। ऐसे में ऑनलाइन क्लासेज का रिकॉर्ड कैसे भेजा जा सकता है। वहीं, एक अन्य समस्या भी सामने है। लागू लॉकडाउन के बीच स्कूल टीचर्स और प्रिंसिपल घर से बाहर भी नहीं जा सकते। ऐसे में ऑनलाइन क्लासेज का रिकॉर्ड कैसे देंगे।

RTE भुगतान ना होने से अटके शिक्षकों की भी सैलरी

जिलाध्यक्ष नरेंद्र पुरोहित ने बताया कि जो बच्चे गरीब परिवार के हैं और आर्थिक स्थिति सही नहीं है उनसे इस लॉकडाउन में रुपए मांगना भी मुश्किल हो रहा है। हालांकि कोर्ट के आदेश पर हम अपनी ओर से रुपए मांग सकते हैं लेकिन उनके आर्थिक स्थिति देखकर कैसे मांगे। ऊपर से RTE का भुगतान नहीं होने पर शिक्षकों को भी सैलरी देना मुश्किल हो गया है, जिन्होंने साल भर डोर टू डोर जाकर बच्चों को शिक्षा दी है, उन्हीं शिक्षकों के पास आज पैसे नहीं है। इसके अलावा भी गाड़ियों का इंस्टॉलमेंट, नल, बिजली, बाई और स्टाफ की सैलरी सब कुछ मेंटेन करना मुश्किल हो रहा है।

एक साल से अटका है RTE का भुगतान

RTE का लगभग एक साल से भुगतान नहीं हुआ है। यहां जिले में काफी छोटे स्कूल हैं, जिन्हें अभी तक राहत नहीं मिली। 2020-21 के RTE में हुए एडमिशन की पहली किस्त अभी तक नहीं आई तो इस वर्ष की तो उम्मीद ही नहीं कर सकते। कई विद्यालय तो ऐसे हैं जिनके 2019-20 की दूसरी क़िस्त का भुगतान भी नहीं हुआ है। अभी वर्क बुक और ऑफलाइन रिकॉर्ड के हिसाब से भुगतान करने की मांग की जा रही है लेकिन शिक्षा विभाग की ओर से अंतिम रिप्रेजेंटेशन मांगा गया है कि विद्यालय द्वारा ऑनलाइन क्लासेस का रिकॉर्ड क्यों नहीं दिया जा रहा है। सबने यही सारी प्रॉब्लम लिख कर भेजी है।

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