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खुलासा:फर्जीवाड़े की ओवरलाेडिंग; जाे वाहन गुजरात नहीं गए उनके 50 लाख के चालान, बाइक भी ओवरलोड दिखाई

चित्ताैड़गढ़3 दिन पहलेलेखक: दीपचंद पाराशर
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  • खान विभाग, व्यवसायी व धर्मकांटाें की मिलीभगत, माइनिंग विभाग के पाेर्टल पर चढ़ाकर अाॅनलाइन फ्राॅड

चित्ताैड़गढ़ जिले से पंजीकृत डंपर, ट्रेलर जैसे कई वाहन हैं, जो कभी राजसमंद, ब्यावर, उदयपुर या गुजरात में माल परिवहन करने गए नहीं बावजूद वहां से ओवरलाेड माल परिवहन के चालान मिल रहे हैं। कुछ खान व्यापारियाें, धर्मकांटा एवं खान विभाग की मिलीभगत से राेज यह खेल चल रहा है।

दूसरे वाहनाें के नंबर माइंस-धर्मकांटा से माइनिंग विभाग के पाेर्टल पर चढ़ाकर ऑनलाइन फ्राॅड किया जा रहा है। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि राजसमंद, उदयपुर एवं ब्यावर और गुजरात जैसे ही किसी वाहन में माल ओवरलाेड लिखा जाता है ताे खान विभाग के पाेर्टल से सीधा परिवहन विभाग के पाेर्टल पर अंकित हाे जाता है। परिवहन विभाग में आकर वाहन मालिकाें काे लाखाें के चालान जमा कराने पड़ते हैं। मामले का खुलासा कुछ जागरुक ट्रांसपाेर्टराें की मदद से हुआ। जिस धर्मकांटा पर वाहन काे तुलाई के लिए चढ़ाया जाता है। उस समय वाहन की फाेटाे ऑनलाइन सीसीटीवी से खिंची जाती है। वहीं माइनिंग विभाग के पाेर्टल तक जाती है।

इन दस्तावेज के मिलान करने पर पाया जाे भारी वाहन धर्मकांटे पर ऑनलाइन नजर अा रहे हैं, उन वाहनाें के चालान नहीं काटकर दूसरे वाहनाें के नंबर डाले जा रहे हैं और ऑनलाइन फ्राॅड सिस्टम बखूबी से कर रहे हैं। कई वाहन मालिक पुलिस व खनिज विभाग के अधिकारियों को भी शिकायत कर चुके हैं।

इस तरह जालसाजी : लाेडिंग हाेने वाले वाहन की जगह अन्य वाहनाें के नंबर की पर्ची काटते हैं
वाहन मालिक वाहन का फिसनेट रिन्यू कराने परिवहन विभाग पहुंचे ताे पता चला कि उनके वाहन पर ओवरलाेड के लाखाें के चालान कटे हैं। राशि जमा कराने के बाद फिटनेस हाेगी। इस पर विभाग से चालान के दस्तावेज, माइनिंग विभाग के पाेर्टल के दस्तावेज जुटाने के बाद वाहन मालिक फ्राॅड की हकीकत जुटाने में लगे।

बाद में खुलासा हुआ कि खदान मालिक अपने यहां लाेडिंग हाेने वाले वाहन की जगह अन्य वाहनाें के नंबर की पर्ची काटते हैं। इसके बाद खदान मालिक का जिस धर्मकांटा से लिंक हाेता है, वहां भार कराने भेजा जाता है। वहां भी खदान की पर्ची के अाधार पर नंबर लिख दिए जाते हैं।
इसलिए कर रहे फ्राॅड: खदान मालिकों के वाहनाें पर ओवरलाेड के चालान बने ही नहीं
भास्कर पड़ताल में पता चला कि खदान मालिक अपने वाहनाें पर ओवरलाेड के चालान नहीं बने इसलिए दूसरे के नंबर के लदान की पर्ची काटते हैं। कारण खदान से नियमानुसार ही माल लदान करने का नियम है। जैसे ही धर्मकांटा पर पर्ची जाती है ताे माइनिंग विभाग के पाेर्टल पर दूसरे वाहन के नंबर डाल दिए जाते हैं।

माइनिंग विभाग के पाेर्टल पर ओवरलाेड दर्शाते ही जानकारी परिवहन विभाग के पाेर्टल पर डाल दी जाती है। सूत्रों का कहना है कि इसमें माइनिंग विभाग के कर्मचारियों की मिलीभगत संभव है क्योंकि ऑनलाइन फ्राॅड करने वालाें के तार माइनिंग विभाग से जुड़े हैं।

चौंकाने वाले किस्से... जहां कभी ट्रक नहीं गया चालान में वहां माल भर दिया

1 12 डंपर के ओवरलाेड के 26 लाख के चालान: बापूनगर सेंती के यश अग्रवाल ने बताया हमारे 15 डंपर हैं। 12 डंपर के 25 बार ओवरलाेड के चालान बने हैं। परिवहन विभाग में इन वाहनाें का मार्च से दिसंबर तक का 26 लाख रुपए जमा कराना है। मेरे वाहन ब्यावर, राजसमंद व उदयपुर में संबंधित माइंस पर माल भरने ही नहीं गए ताे भी ओवरलाेड के चालान बन गए।

2 मोटरसाइकिल का चालान 10 हजार रुपए बन गया: चंदेरिया के लादू गुर्जर के पास बुलेट है। माेबाइल पर 26 जुलाई काे मैसेज आया कि गाड़ी ओवरलाेड हाेने से गुजरात के थान नगर क्षेत्र में चालान कटा है। आरटीओ से मालूम हुआ कि बुलेट आरजे 09 जीएस 0743 का ओवरलाेड का चालान कटा और 10 हजार 400 जमा कराने हैं। मेरी बुलेट कभी गुजरात गई नहीं।

3 ट्रेलर चित्ताैड़ में, उसी दिन गुजरात में ब्लैक लिस्ट कर दिया: निंबाहेड़ा दिलीप पामेचा ने बताया कि मेरा ट्रेलर तीन अक्टूबर 2020 काे वंडर सीमेंट से महाराष्ट्र जाने की तैयारी में था। उसी दिन गुजरात के थानगढ़ में ट्रेलर ब्लैक लिस्ट बताई। अब उक्त वाहन काे ब्लैक लिस्ट माइनिंग विभाग में बताया जा रहा है। अब अब किसी भी खनिज का लाेडिंग नहीं कर पा रहे हैं।

जिम्मेदारों का कहना

कुछ वाहन मालिकों की शिकायत विभाग को मिली हैं। वैसे नियम ये है कि जिस क्षेत्र में यह ऑनलाइन फ्रॉड हुआ है उस क्षेत्र के संबंधित अधिकारी ही कार्रवाई करने का अधिकार रखते हैं। जो शिकायत आई हैं उन्हें संबंधित जिलों के अधिकारियों को भेजा जा रहा है।
-पूरणमल सिंघाड़िया, एमई खनिज विभाग

इस प्रकार का मामला मेरी जानकारी में नहीं है। यह मामला खनिज विभाग से संबंधित है। यदि किसी के साथ ऑनलाइन फ्राॅड हुआ है ताे, मुकदमा दर्ज कराना चाहिए। इस मामले से परिवहन विभाग का काेई लेना देना नहीं है।
-जेपी बैरवा, आरटीओ, चित्ताैड़गढ़

भास्कर सवाल

भास्कर की इस पड़ताल में सामने आया कि इस फ्रॉड में माइंस और धर्मकांटा संचालकों की मिलीभगत से हुआ है। इसके बावजूद अभी जिम्मेदार अफसरों ने इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है। सवाल ये है कि कोई बाइक का ओवरलोड का चालान कैसे बनाया जा सकता है।

जबकि मंगलवाड़ में कुछ दिन पहले ऐसा गिरोह पकड़ा गया है, जो ओवरलोड की फर्जी पर्चियां तैयार कर रहा था। इसलिए जिम्मेदार अफसरों को यह जिम्मा उठाना चाहिए कि वे पूरे मामले में दोषियों को सामने लाएं।

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