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जांच संबंधी पत्र सौंपा:प्रधान ने कहा ग्राम विकास अधिकारी नहीं तो फिर कैसे उठी तनख्वाह

चित्तौड़गढ़एक महीने पहले
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भूपालसागर पंचायत समिति में एक ग्राम विकास अधिकारी काे लाखों रुपए भुगतान मामले की जांच भूपालसागर प्रधान हेमेंद्रसिंह राणावत ने उठाई। तत्कालीन बीडीओ ने आरोप नकार दिया। प्रधान राणावत ने शुक्रवार को कलेक्टर ताराचंद मीना, जिला परिषद सीईओ ज्ञानमल खटीक को जांच संबंधी पत्र सौंपा। इसमें प्रधान राणावत ने बताया कि एक ग्राम सेवक पदेन सचिव पंचायत समिति रेलमगरा स्थानांतरण होकर वर्ष 2015 में इस पंचायत समिति में कार्यरत है।

पंचायत समिति में पदस्थापन अवधि में अब तक बिना किसी ग्राम पंचायत में पदस्थापन किए बिना किसी कार्यालय में उपस्थिति के ही इन्हें नियमों में विपरित लाखों रुपए वेतन भुगतान किया है। जांच कराकर कार्रवाई की जाए।

प्रधान राणावत ने ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के आयुक्त को भी पत्र लिखा है। जब भूपालसागर के तत्कालीन कार्यवाहक बीडीओ भवानीशंकर से पूछा तो उन्होंने कहा कि कार्मिक का भुगतान उपस्थिति के कारण ही किया। जब वह कार्यवाहक बीडीओ थे तब यह कार्मिक पंचायत समिति में कार्यरत था।

प्रधान बोले-काम और हाजिरी भी नहीं है तो तनख्वाह किस बात की

भूपालसागर प्रधान राणावत ने आरोप लगाया कि जब आदमी नहीं है, काम और हाजिरी नहीं है तो तनख्वाह किस बात की। भूपालसागर पंचायत समिति की बैठक में ग्राम सेवक के बारे में पूछा तो कुछ नहीं बताया। जांच की तो पता चला कि मामला गडबड़ी का है। उन्हें एक पंचायत में पहले पदस्थापित बताया।

इस कार्मिक के पुराने अवकाश के 147 पीएल के लिए दस्तावेज देखे जाए तो वह गलत तैयार कर आॅनलाइन भुगतान करना जैसा प्रतीत होता है। जिसने यह स्वीकृत की तब वे अधिकारी नहीं थे। ऐसे में किस सत्यापन के आधार पर पहले की तारीख की छुटटी कैसे स्वीकृत होकर भुगतान हो गया।

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