अकाेला में दशहरा की अनोखी परंपरा:यहां 600 साल से खड़ा है रावण का धड़, इस पर मटके का सिर लगाकर करते हैं वध, राम-रावण की तरफ से युद्ध करते हैं ग्रामीण

चित्तौड़गढ़एक महीने पहले
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राम सेना और रावण सेना की बीच होता है संवाद, मेले में उमड़ते हैं 10 हजार लोग। - Dainik Bhaskar
राम सेना और रावण सेना की बीच होता है संवाद, मेले में उमड़ते हैं 10 हजार लोग।

दशहरे के दिन रावण दहन की परंपरा तो पूरे भारतवर्ष में है, लेकिन चित्तौड़गढ़ से 65 किमी दूर अकोला में रावण वध की अनोखी परंपरा है। यहां कई सालों से रावण का धड़ दशहरा मैदान में खड़ा है। पहले यह धड़ मिट्टी का था, लेकिन अब इसे सीमेंट से बना दिया गया है। आकोला निवासी इतिहासकार डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू बताते हैं कि ये 600 साल से भी ज्यादा समय से यहां पर रावण वध की परंपरा निभाई जा रही है।

दशहरे के एक दिन पहले कुम्हार के यहां पर रावण के सिर के लिए एक बड़ा मटका तैयार किया जाता है। मटके पर रावण के चेहरे के साथ 10 सिर बनाए जाते हैं। दशहरे के दिन मटके को धड़ पर लगाया जाता है। इसके बाद दोपहर में ग्रामीण घोड़े और ऊंट सजाकर दशहरा मैदान में लाते थे। रावण के चक्कर लगाते थे। इसके बाद गांव में छिपा समाज के चारभुजा मंदिर से बेवाण यानी शोभायात्रा निकलती है।

इसमें राम, लक्ष्मण, सीता, हनुमान के साथ पूरी सेना गांव से होती हुई बेढ़च नदी किनारे दशहरे मैदान पर पहुंचती है। मैदान में पहले से ही रावण के पुतले के पास रावण की सेना खड़ी होती है। सूर्यास्त होते ही ग्रामीण राम और रावण की तरफ से युद्ध करते हैं। राम सेना और रावण सेना के बीच संवाद भी होता है। करीब आधे घंटे केे संवाद के बाद शामिल रामधव्य डंड से रावण के सिर को धड़ से अलग कर दिया जाता है। गांव के भगवती छिपा बताते हैं कि पिछले 25-26 साल से रावण वध के साथ रावण दहन भी होने लगा है। दशहरे के दिन इस मैदान पर करीब 10,000 लोग एकत्र हाेते हैं। दो दिन कामेला भी लगता है।

अकोला निवासी नवरत्न जैन बताते हैं कि रावण वध के लिए रामध्वज डंड का इस्तेमाल होता है। सिर अलग होते ही रावण के पीछे खड़े सैकड़ों लोग सिर के ठिकेर को लेने के लिए टूट पड़ते हैं। मान्यता है कि ठिकरी घर में रखने पर खटमल नहीं होते। ये परंपरा यहां आज भी निभाई जाती है।

बताया जाता है कि यहां जब रावण के सिर को धड़ से अलग किया जाता ताे लोग धड़ पर पत्थरों की बौछार कर देते थे हालांकि अब ये परंपरा नहीं निभाई जाती।

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