शोर 75 डेसिबल पहुंचा:सांवलियाजी अस्पताल साइलेंट जोन, लेकिन शोर खतरनाक स्तर का

चित्तौड़गढ़एक महीने पहले
  • कॉपी लिंक

काेराेनाकाल के बाद इस साल दिवाली का उत्साह ज्यादा रहा। बाजाराें में चहल-कदमी हुई ताे आतिशबाजी भी जमकर की गई। इससे ध्वनि प्रदूषण मानक से ज्यादा रहा। व्यावसायिक की तुलना में इस बार आवासीय क्षेत्र में ध्वनि प्रदूषण मानक से 20 डेसिबल अधिक रहा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने आठवें साल भी शहर में दिवाली पर ध्वनि प्रदूषण की 3 स्थानाें पर रिपोर्टिंग कराई। आवासीय क्षेत्र का ध्वनि प्रदूषण लेवल देखने के लिए कुंभानगर और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए गोल प्याऊ चौराहे को आधार बनाया गया। साइलेंट जोन बढाते हुए जिले के बडे चिकित्सालय सांवलियाजी अस्पताल को इस क्षेत्र में रखा। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने छह-छह दिन के अंतराल में तीनाें ही जगहों पर इसका अंकन किया। लैब इंचार्ज डाॅ. गिरिराज सोनगरा के निर्देशन में गोल प्याऊ चौराहा पर कनिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी रामकिशोर कुमावत, कुंभानगर में सूर्यप्रताप मीणा व अस्पताल परिसर में मानसिंह मीणा के निर्देशन में टीम तैनात रही।

गत साल कोरोना संक्रमण से बचाव के प्रति जागरुकता, बंदिशें व भय का असर था। दीपवाली ईको फ्रेंडली मनाई थी। न बाजार में भीड़ थी और न ही पटाखाें का शोर। इस कारण 6 साल की तुलना में सबसे कम ध्वनि प्रदूषण पिछली दिवाली काे दर्ज हुअा। व्यस्ततम और भीड़भरे व्यावसायिक क्षेत्र गोल प्याऊ चौराहा पर अधिकतम डेसिबल 70 प्रतिशत ही था। जो मानक से सिर्फ 5 डेसिबल अधिक और साल 2019 की तुलना में 37 कम था। आवासीय क्षेत्र कुंभानगर में डेसिबल 60 से 65 के बीच दर्ज हुआ था। छह दिन पहले 29 नवंबर को भी शाम छह से रात 12 बजे तक तथा फिर 4 नवंबर को दीपावली के दिन भी इसी समय ये टीम तैनात रही और विशेष उपकरण के जरिये ध्वनि प्रदूषण की रिपोर्टिंग दर्ज की गई। रिपाेर्टिंग के बाद जो आंकडे सामने आए उसके अनुसार दीपावली के दिन ध्वनी 79 डेसिबल दर्ज हुई। गोल प्याऊ चौराहा पर डेसिबल 75 दर्ज हुआ जो कि मानक से 10 डेसिबल ज्यादा है। इसी तरह पहली बार बनाए गए साइलेंट जोन में डेसिबल 68 दर्ज किया गया। जो मानक से तीन डेसिबल तक ज्यादा आंका गया।

रिहायशी क्षेत्र शुरुआत में 3 डिसेबल की बढ़ोतरी हो गई कुंभानगर क्षेत्र को रिहायशी इलाका मानते हुए वहां स्थित होमगार्ड आफिस परिसर में मशीन लगाई गई। शाम साढे छह बजे डेसिबल 59.8 दर्ज हुआ। जबकि मानक 45-55 डेसिबल माना जाता है। यानी शुरुआत में ही तीन डेसिबल की बढाेतरी दर्ज हो गई थी। साढे सात बजे से ध्वनि प्रदूषण बढने लगा। दीपदान व लाइटिंग के साथ पटाखों का शोर शुरू हो गया। रात नौ बजकर दस मिनिट पर ये 77 डेसिबल तक पहुंच गया। जब कोई बम फोडने की आवाज आती तो मीटर में आंकडा तेज बढता।

व्यावसायिक क्षेत्र , रात 10.30 बजे बाद साउंड व भीड का शोर गोलप्याऊ चौराहा के पास पदमिनी पार्क में टीम ने शाम छह बजे मीटर मशीन को शुरू कर दिया था। उस समय तक पब्लिक न के बराबर थी। उस समय साउंड लेवल मानक अनुसार 65.7 डेसिबल तक ही आ गया था। हालांकि इसके बाद सात बजते बजते डेसिबल बढने लगा था। रात साढे नौ बजे अधिकतम डेसिबल 73.2 था। जो मानक 65 से 8 अधिक था। यहां रात 10 से 12 बजे के बीच का मानक डेसिबल 75.2 डेसिबल दर्ज हो गया। जबकि दो साल पहले ये 55 डेसिबल दर्ज हुआ था।

साइलेंट जोन, रेलवे स्टेशन के कारण ज्यादा दर्ज हुआ इस बार पहली बार सांवलियाजी अस्पताल परिसर को नया स्टेशन बनाते हुए साइलेंट जोन की परिधि में रखा। अस्पताल परिसर में कोटेज वार्ड के पास लगे मीटर में शाम साढे छह बजे यहां डेसिबल 60 दर्ज हो रहा था। रात आठ व दस बजे यहां 69 और 92 तक डेसीबल हुआ। लेकिन यहां पास की बस्तियों में पटाखों की गूंज के साथ ही रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ट्रेनों के आवागन की ध्वनि के कारण मीटर में आंकडा बढता, गिरता रहा। यहां औसतन 68 डेसिबल दर्ज हुआ। जो 10 से 15 डेसिबल अधिक रहा है।

शहर के लिए मानक तय शहर में साउंड लेवल मानक व्यवसायिक क्षेत्र में शाम छह से रात दस बजे तक 65 व रात दस से बारह बजे तक 55 डेसिबल तय कर रखे हैं। रिहायशी क्षेत्र में शाम छह बजे से दस बजे तक 55 और रात दस से बारह बजे तक 45 डेसीबल तय है।

  • रिहायशी कुंभानगर
  • मानक 55 डेसिबल
  • शोर हुआ 79.4 डेसिबल
  • अधिक 24 डेसिबल
  • व्यवसायिक }गोलप्याऊ
  • मानक 65 डेसिबल
  • शो हुआ 75.5 डेसिबल
  • अधिक 10 डेसिबल
  • साइलेंट जोन
  • मानक 60 डेसिबल
  • शोर हुआ 68.4 डेसिबल
  • अधिक 8 डेसिबल
खबरें और भी हैं...