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आरबीएसई:विद्यार्थी अब नहीं पढ़ पाएंगे मेवाड़ के बप्पा रावल का इतिहास

चित्तौड़गढ़2 महीने पहले
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  • कोरोना से पढ़ाई चौपट हुई तो 40% कम किया सिलेबस, गांधीवाद, मूल अधिकार और जीएसटी भी कोर्स से गायब

कोरोनाकाल के चलते स्कूल नहीं चलने से राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सत्र 2020-21 में 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में 40 फीसदी कटौती की है। आधा सत्र बीतने के बाद संशोधित पाठ्यक्रम लागू कर दिया। जिसमें कई मूल जानकारी और 12वीं राजनीति विज्ञान, इतिहास सहित लगभग सभी विषयों में अध्याय उतने ही हैं, विषय वस्तु में कमी की गई है। मसलन- राजनीति विज्ञान के छात्र संविधान के मूल अधिकार, नीति निर्देशक तत्व, मूल कर्तव्य नहीं पढ़ेंगे, जबकि इतिहास की किताब से मेवाड़ के संस्थापक बप्पा रावल, स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां के संदर्भ नहीं होंगे। देश में तीन साल पहले लागू जीएसटी तक को व्यवसाय अध्ययन से हटा दिया गया। लोक प्रशासन में नीति आयोग, कौटिल्य के प्रशासनिक विचारों के अलावा हिंदी, भूगोल सहित कई विषयों पर भी कैंची चली है। सिलेबस कम होने से छात्रों को तात्कालिक फायदे तो होंगे, लेकिन शिक्षाविदों के अनुसार इससे भविष्य पर भी प्रभाव पड़ेगा।

विशेषज्ञ बता रहे नुकसान : बेसिक जानकारियां हटाने से बच्चों में अधूरी रहेगी विषयों की समझ

विशेषज्ञों के अनुसार बीएड प्रवेश परीक्षा से लेकर हर प्रतियोगी और भर्ती परीक्षा में भारत का इतिहास और राजनीतिक विचारधाराओं जैसी विषयवस्तु से जुड़े सवाल पूछे जाते हैं। संविधान के मूल तत्व हटाने से स्कूल शिक्षा का ज्ञान अधूरा ही रह जाएगा। जीएसटी आज के दौर में सबसे ज्यादा प्रासंगिक है, जिसकी जानकारी होना छात्र के लिए बेहद जरूरी है। अभी भारत और पड़ोसी देशों में संबंध संवेदनशील हैं। इनकी जानकारी छात्रों को न देना भी गलत होगा। यह सब विदेश नीति वाले अध्याय में अब नहीं हैं। हर्षकालीन भारत और बप्पा रावल इतिहास के स्वर्णिम अध्याय हैं।

बोर्ड का दावा- विद्यार्थी कोर्स की अच्छी तरह से तैयारी कर सकेंगे, क्योंकि परीक्षा में सिर्फ 4 माह ही शेष रहे
बोर्ड प्रशासन का दावा है कि पाठ्यक्रमों से गैरजरूरी और कम महत्व वाली विषयवस्तु ही हटाई है। बच्चों को अब भी सालाना कक्षा के अनुसार ज्ञान मिलेगा। शेष समय में 60 प्रतिशत पढ़ाई कर पाना ही संभव है। ऐसे में वे परीक्षा तक अच्छी तैयारी कर सकेंगे। इससे परिणाम में अनपेक्षित नुकसान होने की गुंजाइश नहीं रहेगी।

11वीं : लोकतंत्र के तीनों स्तंभ गायब
भारतीय संविधान में अधिकार, विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका, संघवाद, विशिष्ट प्रावधान, स्वतंत्रता, समानता, अधिकार, नागरिकता, आर्थिक सुधार 1991, वैश्वीकरण, सुधार कालीन भारतीय अर्थव्यवस्था, सकल घरेलू उत्पाद, विकास नीतियां जैसी विषयवस्तु गायब।

12वीं : इतिहास के स्वर्णिम अध्याय कटे

हर्ष कालीन भारत, विजयनगर साम्राज्य उदय, कला-साहित्य विकास, यूनानी, शक, हूण और कुषाण- उद्देश्य और प्रभाव दाहिर सेन, नागभट्ट, बप्पा रावल, हम्मीर, रावल रतन सिंह, भूमिका, उत्पत्ति, विस्तार, उपनिवेशवादी आक्रमण
क्रांतिकारी आंदोलन: जनजातीय प्रतिरोध, अभिनव भारत, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन, गदर पार्टी
राजनैतिक आंदोलन: 1907 से 1919 प्रथम विश्व युद्ध और भारत, जलियांवाला हत्याकांड
1920 से 1947 : खिलाफत आंदोलन, गोल मेज सम्मेलन, द्वितीय विश्व युद्ध और भारत
प्रमुख अवधारणाएं: उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, गांधीवाद, संविधान में मूल अधिकार, नीति निर्देशक तत्व और मूल कर्तव्य
संघीय कार्यपालिका, राष्ट्रपति निर्वाचन और शक्तियां, प्रधानमंत्री स्थिति, कार्य राज्य स्तरीय, स्थानीय शासन, 73वें-74वें संविधान संशोधन के संदर्भ में वर्तमान स्वरूप, क्षेत्रवाद और भाषावाद, भारत के पड़ोसी देशों से संबंध, पाकिस्तान, चीन।

विशेषज्ञों ने उठाए सवाल
सोच समझकर कम करना था पाठयक्रम, बच्चे जरूरी जानकारी से वंचित रहेंगे
प्रो. चंद्रशेखर शर्मा, पाठ्यपुस्तक लेखन समिति के पूर्व सदस्य, प्रो. भानु कपिल, इतिहास विभागाध्यक्ष, बीएन विवि

शिक्षा बाेर्ड अध्यक्ष डॉ. डीपी जारोली इतना ही बोले कि हां, सिलेबस संशोधित किया है। शैक्षिक प्रकोष्ठ निदेशक राजेंद्र गुप्ता ने कहा कि शिक्षाविदों की समिति की सिफारिशों पर विषय विशेषज्ञों ने सिलेबस में कटौती की है।

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