बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट:दिल्ली-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए जमीन का सर्वे भी हाई टेक्नोलॉजी से हैलीकॉप्टर से पता कर रहे ट्रैक की जमीन पर कितने पेड़-मकान

चित्तौड़गढ़11 दिन पहले
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दिल्ली अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए सर्वे पर उड़ान भरता हेलीकॉप्टर। - Dainik Bhaskar
दिल्ली अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए सर्वे पर उड़ान भरता हेलीकॉप्टर।

दिल्ली-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की डीपीआर का काम और तेज गति पकड़ गया है। उदयपुर से चित्तौड़गढ़ के बीच प्रस्तावित ट्रैक के लिए मंगलवार को हेलीकाप्टर से लीडार सर्वे का काम पूरा हो गया।

एनएचएसआरसीएल अधिकारियों ने करीब 150 किमी जमीनी दूरी का हवाई सर्वेक्षण किया। जो मंगलवार को दो चरणों में करीब 5-6 घंटे चला। इसमें नेशनल हाईस्पीड रेलवे कार्पोरेशन के संयुक्त महाप्रबंधक मार्तंडसिंह राठौड़ के साथ तकनीकी टीम ने आसमान से सिक्सलेन नेशनल हाईवे के आसपास की भौगोलिक स्थिति का जायजा लिया। इस परीधि में ही हाईस्पीड रेल का ट्रैक बनना है। विशेष तकनीक से लैस हेलीकॉप्टर ने लेजर किरणें डालकर इमेज ली। अभी भारत में भी रीडाल सर्वे बहुत कम ही होते हैं। निर्माणाधीन अहमदाबाद-मुंबई हाईस्पीड रेल प्रोजेक्ट के लिए भी यही तकनीक काम में ली गई थी।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने देश में हाईस्पीड रेल के 6 और कॉरिडार की योजना बनाई है। जिसमें से दिल्ली-अहमदाबाद कॉरिडोर की डीपीआर फिलहाल सर्वोच्च प्राथमिकता पर है ताकि दिल्ली से मुंबई हाईस्पीड ट्रेन से जुड़ जाएं। इसके लिए हवाई सर्वे कुछ महीने पहले शुरू हो चुका था लेकिन बीच में बारिश के कारण पूरा नहीं हुआ। प्रस्तावित कॉरिडोर में चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, उदयपुर, अजमेर, जयपुर, अलवर व डूंगरपुर के रूप में सर्वाधिक 7 जिलों मेंं इतने ही स्टेशन राजस्थान में बनेंगे। ये ट्रेन औसत 250 से 350 किमी प्रति घंटा की स्पीड से चलेगी।

क्या है लीडार सर्वे: आसमान से पेड़ की ऊंचाई तक माप लेते

लीडार सर्वे एक बहुत ही उन्नत और आधुनिक टेक्नॉलॉजी है। जिसमें हेलीकॉप्टर प्रस्तावित प्रोजेक्ट स्थल पर लेजर किरणें डालता है। इससे धरती पर मौजूद पेड़-पौधे, पहाड, नदी, भवन, खेत, पुल या गुफा आदि हर चीज की उसके वास्तविक क्षेत्रफल सहित इमेज आ जाती है। यहां तक कि कोई पेड़ कितनी ऊंचाई का है। वो भी पता चलता है।

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