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चार महीने से बेटी से मिलने भटक रहे मां-बाप:CWC ने आरोपी पक्ष के रिश्तेदार को नाबालिग को सौंपा,राज्य बाल आयोग ने कहा,भूमिका संदिग्ध होने पर होगी कार्रवाई

चित्तौड़गढ़एक महीने पहले
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काल्पनिक चित्र। - Dainik Bhaskar
काल्पनिक चित्र।

चार महीने पहले चंदेरिया थाना क्षेत्र में अहमदाबाद के एक परिवार ने नाबालिग बेटी के ससुराल वालों के खिलाफ दुष्कर्म और डराने-धमकाने का मामला दर्ज करवाया था। मामले के अनुसार परिवार ने नाबालिग बेटी की शादी चित्तौड़ में रहने वाले लड़के से कर दी। शादी के बाद नाबालिग अपने पिता के घर में ही रह रही थी। एक बार वह अपनी छोटी बहन के साथ सास की देखभाल करने ससुराल चित्तौगढ़ आई। इस दौरान देवर ने छोटी बहन से दुष्कर्म किया। मामले में परिवार की भूमिका भी संदिग्ध रही। वापस पिता के घर लौटने पर छोटी बेटी के साथ हुई घटना के बारे में परिवार को पता लगा। जिस पर ससुराल पक्ष के खिलाफ मामला दर्ज करवाया गया।

राज्य बाल आयोग में की शिकायत
पुलिस से मामला CWC (बाल कल्याण समिति) के पास पहुंचा। जहां से छोटी बेटी को परिवार के साथ भेज दिया। वहीं नाबालिग बड़ी बेटी पर दबाव बनाकर पिता के घर नहीं जाने का लिखवाया। CWC में ससुराल पक्ष के दूर का रिश्तेदार बड़ा पापा बनकर आया। उसके साथ नाबालिग को भेज दिया। चार महीने से माता-पिता बेटी को अपने साथ ले जाने के लिए चक्कर काट रहे है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर परिवार ने राज्य बाल आयोग में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई। राज्य बाल आयोग आयुक्त ने चार दिन पहले परिवार को बुलाया। नाबालिग बच्ची को भी ससुराल पक्ष के रिश्तेदार के यहां से बुलाया गया। फिलहाल बच्ची को शल्टर होम में रखा गया है। राज्य बाल आयोग की सदस्य ने मामले को लेकर कलेक्टर को निष्पक्ष जांच करने और सात दिन में जांच रिपोर्ट आयोग को सौंपने की बात कही।

CWC की भूमिका संदिग्ध
परिवार ने CWC पर आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि आरोपी पक्ष का कोई रिश्तेदार नाबालिग का बड़े पापा बनकर आया। समिति ने नाबालिग से जबरन उसके साथ जाने का लिखवाकर सौंप दिया। वहीं समिति का कहना है कि बालिका उनके साथ जाना चाहती थी ना कि परिवार के साथ।

राज्य बाल आयोग ने की बच्ची की काउंसलिंग
राज्य बाल आयोग के आयुक्त नुसरत नकवी ने बच्ची की काउंसलिंग की। बालिका ने रोते हुए कहा कि,वह अपने पिता के साथ जाना चाहती है। आयोग की ओर से निष्पक्ष जांच के लिए कलेक्टर को लेटर भेजा गया है। उनके ओर से जांच कर 7 दिनों में रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

दोषी पाए जाने पर CWC पर होगी कार्रवाई
राज्य बाल आयोग के सदस्य शैलेन्द्र पंड्या ने बताया कि मामले में जांच कलेक्टर करेंगे। बच्ची जहां कंफर्टेबल होगी,वहां भेजा जाएगा। जेजे एक्ट के अनुसार नाबालिग की शादी अमान्य होती है। ऐसे में ससुराल पक्ष को सौंप नहीं सकते। ससुराल पक्ष के खिलाफ किसी भी तरह का मामला दर्ज है तो आरोपी पक्ष को बालिका को सौंपना गैर-कानूनी है। बाल कल्याण समिति ने ऐसा किया है तो,कार्रवाई होगी।

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