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  • The House Was Mortgaged With The Bank, But Twice The Registry Was Done In A Fake Manner, Saying That The Original Documents Were Lost, They Kept Doing The Registry With Photocopy

अपने घर का सपना चकनाचूर:बैंक के पास गिरवी मकान की दो बार कर दी फर्जी तरीके से रजिस्ट्री, ओरिजिनल डाक्यूमेंट्स गुम हो जाने की बात कह कर फोटोकॉपी से किया फर्जीवाड़ा

चित्तौड़गढ़6 दिन पहले
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जिले के कोतवाली थाने में धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है, जहां बैंक के पास सीसी लिमिट के रूप में गिरवी एक मकान की दो बार फर्जी तरीके से रजिस्ट्री हो गई। तीसरे पीड़ित पक्ष ने दलाल को आधे से ज्यादा रुपए दे दिए। उसके बदले में ना रजिस्ट्री हुई और ना रुपए मिले तो पीड़ित ने दो दलाल सहित तीन जनों के खिलाफ मामला दर्ज करवाया है।

एएसआई नवलराम ने बताया कि बापूनगर, सेंती निवासी परमानंद पुत्र प्रभुदयाल गौड़ ने दो दलालों की मदद से एक व्यक्ति से मकान खरीदा था और एग्रीमेंट के हिसाब से 11 लाख 21 हजार में से 6 लाख रुपए मकान मालिक को चेक के जरिए दे दिए थे। उसके बाद परमानंद ने कई बार रजिस्ट्री के लिए बात करी, लेकिन बार-बार मकान मालिक ने आनाकानी की तो परमानंद ने इस बारे में जानकारी निकाली। जानकारी में मामला सामने आया कि यह मकान बैंक के पास गिरवी है और 10 लाख रुपए की उधारी है। इससे पहले भी दो बार बिना बताए गलत तरीके से रजिस्ट्री हो चुकी है। मामला जानते ही परमानंद कोतवाली थाने में दोनों दलाल सहित मकान मालिक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया।

बैंक के पास गिरवी होने के बाद भी बेचते रहे मकान को

गांधीनगर क्षेत्र में स्थित एक मकान रविंद्र पटवा पुत्र बद्रीलाल पटवा का है, जिस पर रविंद्र ने यूको बैंक से 10 लाख रुपए की सीसी लिमिट करवाई थी। रविंद्र ने यह मकान लोहार मोहल्ला निवासी शबनम पुत्री शकील अहमद को 16 लाख 50 हजार रुपए में बेच दिया।

उस दौरान रविंद्र ने शबनम को बैंक लोन के बारे में बताया और 10 लाख रुपए का बकाया रख बाकी के 6 लाख 50 हजार रुपए ले लिए। रविंद्र ने शबनम के नाम पर रजिस्ट्री भी करवा दी। इसके बाद शबनम ने यह मकान प्रवीण पटवा नाम के एक व्यक्ति को बेच दिया और बैंक के बकाया के बारे में कोई भी जानकारी नहीं दी।

प्रवीण ने यह मकान परमानंद को दो दलाल प्रमोद छीपा और विष्णु छीपा के जरिए 11 लाख 21 हजार में बेच दिया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच ऐग्रीमैंट हुआ और एडवांस के तौर पर प्रवीण ने 6 लाख रुपए परमानंद से ले लिए। जब परमानंद ने दोनों दलालों को रजिस्ट्री की बात कही तो प्रवीण ने रजिस्ट्री कराने से मना कर दिया।

कई बार रजिस्ट्री की बात चली, लेकिन आनाकानी करने पर पीड़ित ने परेशान होकर इस बारे में पूरा पता किया। पीड़ित ने इस दौरान प्रवीण से 6 लाख रुपए वापस करने की भी बात कही, लेकिन प्रवीण ने नहीं की। पता करने पर सारा मामला सामने आया। पीड़ित परमानंद में थाना कोतवाली में जाकर प्रवीण पटवा, प्रमोद छिपा और विष्णु छिपा के खिलाफ भादस की धारा 406 और 420 में मामला दर्ज करवाया।

ओरिजिनल डॉक्यूमेंट बैंक के पास गिरवी इसलिए फोटो कॉपी से करा दी रजिस्ट्री

प्रार्थी परमानंद के कहने पर प्रवीण रजिस्ट्री के लिए जब तैयार नहीं हुआ तो उसने मकान के डाक्यूमेंट्स का पता किया। इस दौरान प्रार्थी को पता चला कि मकान पर बैंक की सीसी लिमिट बाकी है और डाक्यूमेंट्स गुम होने की बात कहकर रजिस्ट्री करवाई गई थी जबकि ओरिजिनल पेपर्स तो बैंक के पास गिरवी पड़े हुए हैं।

प्रार्थी ने यह भी बताया कि रविंद्र ने शबनम के नाम रजिस्ट्री करवाने के दौरान फोटोकॉपी को आधार बनाया था और शबनम ने प्रवीण के नाम भी इसी तरह रजिस्ट्री करवा दी। हालांकि रविंद्र ने शबनम को बैंक के बकाया के बारे में जानकारी दी थी। रविंद्र और शबनम के बीच के एग्रीमेंट में इसका हवाला जरूर था लेकिन रजिस्ट्री में इस बात का हवाला नहीं दिया गया। वहीं शबनम ने प्रवीण को बेचते टाइम किसी भी तरह के सीसी लिमिट की बात नहीं बताई। एएसआई नवलराम का कहना है कि अभी इस बारे में जांच चल रही है। केवल फोटोकॉपी के आधार पर उप पंजीयन कार्यालय में रजिस्ट्री कैसे की गई, यह भी एक जांच का विषय है।

खुद की राशि वसूल ली लेकिन बैंक को चुकाना भूल गए

इस मकान पर 10 लाख रुपए की सीसी लिमिट जारी की गई थी और रजिस्ट्री करवाने वालों ने अपनी अपनी राशि तो वसूल कर ली लेकिन बैंक का बकाया चुकाना भूल गए। इसलिए इंटरेस्ट जोड़कर अब दस लाख की राशि 17 लाख की हो गई। जबकि इस मकान का 11 लाख 21 हजार रुपए में विक्रय किया गया है। वही मकान की वास्तविक कीमत कम बताई जा रही है।

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