5 साल बाद भी शुरू नहीं मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट:जगह को लेकर ग्रामीणों के विरोध के बाद न सरकार जागी न कंपनी

चित्तौड़गढ़10 महीने पहले
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राज्य सरकार की ओर से चित्तौड़गढ़ में मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फेसेलिटी प्लांट 5 साल से अटका हुआ है। 2016 में सरकार ने इसकी मंजूरी दी, फिर टेंडर निकाले, लेकिन जो जमीन आवंटित की वो आबादी क्षेत्र के पास कर दी। इस पर ग्रामीणों का विरोध हुआ और फिर मामला ठप हो गया। इसके बाद न सरकार जागी न प्लांट बनाने वाली कंपनी। अब नए सिरे से सरकार नगर विकास न्यास (UIT) ने जमीन आवंटित की है।

असल में चित्तौड़गढ़ के धनेतकला में यूआईटी की ओर से मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट के लिए कंपनी को जमीन आवंटित की थी, लेकिन आबादी के पास होने के कारण ग्रामीणों ने इसका जमकर विरोध किया था। अब यूआईटी ने नए सिरे से बोजंदा के पास जाफरपुरा में प्लांट लगाने के लिए कंपनी ई-टेक प्रोजेक्ट को आवंटित कर दी है। यहां कोई विवाद नहीं हुआ और सब कुछ ठीक-ठाक रहा तो चित्तौड़ को जल्द ही मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट मिल सकता है।

एनवायरनमेंट क्लीयरेंस के लिए किया अप्लाई
UIT ने कंपनी को बोजंदा के पास जाफरपुरा में जमीन आवंटित की है। जहां प्लांट स्थापित किया जाना है। कंपनी मैसर्स ई टेक प्रोजेक्ट ने इसके लिए एनवायरमेंट क्लीयरेंस के लिए एक बार फिर अप्लाई किया है। कंपनी के डायरेक्टर जावेद वारसी ने बताया कि पहले दी गई जमीन किसी ओर निर्माण के लिए अलॉट थी। उसके पास वाटर बॉडी होने के कारण एनवायरमेंट क्लीयरेंस के लिए अप्लाई नहीं कर पाए।

नगर परिषद के एईएन सतीश का कहना है कि जमीन के लिए धनेतकलां के ग्रामीणों ने आबादी क्षेत्र के पास होने के कारण विरोध जताया था। कई बार प्रदूषण निवारक ट्रस्ट और कलेक्टर को शिकायत की। इस कारण प्लांट स्थापित नहीं किया गया। अभी बायोवेस्ट उदयपुर में निस्तारित किया जा रहा है।

2016 में आवंटित की थी जमीन
UIT ने समीपवर्ती गांव धनेतकलां में एक जमीन आवंटित की थी। जहां कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फेसेलिटी प्लांट बनाया जाना था। साल 2016 में ही इसका टेंडर जारी हो चुका था। इसमें वहां पर कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फेसिलिटी डीबीओओटी मोड पर विकसित करनी थीं। चित्तौड़गढ़ में बीकानेर की कंपनी मैसर्स ई टेक प्रोजेक्ट को कार्यादेश जारी किए गए। इसके बाद में कंपनी को तुरंत ही प्लांट स्थापित कर काम शुरू करना था। ग्रामीणों ने वहां की जमीन पर प्लांट बनाने के खिलाफ लगातार विरोध शुरू कर दिया। इसके अलावा प्लांट की जमीन लगभग आबादी क्षेत्र में आने के कारण काम शुरू नहीं हो पाया। इसके अलावा कंपनी को भी एनवारमेंट क्लियरेंस नहीं मिल पाया।

इसलिए भी है इसकी जरुरत
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। गांव तक नए अस्पताल खुल रहे हैं। चिकित्सकों का कहना है कि मेडिकल वेस्ट का सही ढंग से निस्तारण नहीं होने से बीमारियां फैलने का खतरा भी रहता है। खुले में ही निडिल पड़ी होने से पशुओं को लग जाती है, जिससे उन्हें बीमारी हो जाती है। मवेशी मेडिकल वेस्ट का सेवन भी कर लेते हैं। ये जलाने से भी नहीं जलते है और वायु प्रदूषण फैलाते हैं। कुछ वेस्ट तो सैकडों साल तक नष्ट नहीं होता हैं। संबंधित कंपनी अपने स्तर पर कवर्ड व्हीकल की सुविधा से अस्पतालों से मेडिकल वेस्ट एकत्रित कर प्लांट पर डिस्पोजल करेगी। इसके बदले में सरकार निर्धारित राशि अदा करेंगी।

एक घंटे में होगा 150 किलो मेडिकल वेस्ट का डिस्पोजल
बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फेसेलिटी प्लांट उच्च क्षमता का होगा। संबंधित कंपनी ईटेक के प्रबंधक जावेद वारसी ने बताया कि पहले चेंबर में 850 से 900 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जाएगा। सेकंड चेंबर में 1050 से 1100 डिग्री सेल्सियस तापमान होगा। उन्होंने बताया कि प्रति घंटा डेढ़ सौ किलो मेडिकल वेस्ट का निस्तारण किया जा सकेगा। क्षमता प्रति माह 45 टन होगी। इससे जो राख निकलेगी, उसे बाद में सीमेंट बनाने में उपयोग लिया जा सकेगा।

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