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दाे भाइयाें की सफलता की कहानी:छाेटे भाई काे आरटीओ इंस्पेक्टर बनाया, फिर उनके सहयाेग से माेतीराम आरएएस में सफल

चित्ताैड़गढ़18 दिन पहले
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  • दाेनाें बड़े पद पर रहेेंगे, मोतीराम की आरएएस ओबीसी में 78वीं रैंक

भाई का भाई के प्रति फर्ज क्या हाेता है। इसका जीवंत उदाहरण बैजनाथियां गांव के माेतीराम जाट एवं उसका भाई दुर्गाशंकर है। पहले माेतीराम ने अपने छाेटे भाई दुर्गाशंकर काे पढ़ाकर आरटीओ में इस्पेक्टर बनाया।

इसके बाद छाेटे भाई दुर्गाशंकर ने खून का रिश्ते का फर्ज अदा करते बडे़ भाई माेतीराम काे आरएएस परीक्षा 2018 की तैयारी कराई और वह इस परीक्षा में पूरे प्रदेश में ओबीसी कैटेगिरी में 78 रैंक पर सफल हुए।

इधर परिजनाें काे जैसे ही माेतीराम जाट के सफल हाेने की जानकारी मिली ताे, पूरे परिवार एवं गांव में खुशी की लहर दाैड़ पड़ी। वहीं दाेनाें भाइयाें के एक-दूसरे के प्रति समर्पण की कहानी उदाहरण बन गई। आरएएस परीक्षा 2018 में माेतीराज जाट पुत्र बरदू जाट ने प्रदेश में जनरल कैटेगिरी में 441वीं एवं ओबीसी में 78 रैंक दूसरे प्रयास में हासिल की। माेतीराम ने बताया कि इससे पहले 2016 में भी एग्जाम दिया था, पर सफल नहीं हाे सका था।

लेकिन हिम्मत नहीं हारी, फिर से तैयारी की और अब सफल हुआ। माेतीराम ने अपनी सफलता की कहानी बताते हुए कहा कि एक भाई ही अपने भाई काे सफलता के शिखर पर पहुंचा सकता है। पहले मैं 2015 तक जयपुर में एक फैक्ट्री में काम करता था, उस समय छाेटे भाई दुर्गाशंकर काे पढ़ाया और वह परिवहन विभाग में 2016 में इंस्पेक्टर बना और वर्तमान में भीलवाड़ा परिवहन विभाग में इंस्पेक्टर कार्यरत है।

पढ़ने में एक-दूसरे की इस तरह मदद की कि काेचिंग नहीं करनी पड़ी

माेतीराम जाट ने 2003 में कक्षा 12वीं तक राउमावि घाेसुंडा में पढ़ाई की। इसके बाद आईटीआई करने के बाद जयपुर की एक निजी कंपनी में 2005 में नाैकरी लगे। नाैकरी के दाैरान वे कुछ प्रशासनिक अधिकारियाें के संपर्क में आये तभी ख्याल आया कि आरएएस अधिकारी बनना है।

हालांकि अपने छाेटे भाई के प्रति जिम्मेदार थीं कि उसे काबिल बनाए। छाेटा भाई दुर्गाशंकर जैसे ही 2016 में परिवहन विभाग में इंस्पेक्टर बना। इसके बाद छाेटे दुर्गाशंकर ने पारिवारिक जिम्मेदारियाें काे संभाला और माेतीराम ने प्राइवेट कंपनी से वीआरएस लिया। इसके बाद माेतीराम ने बिना टेंशन के बिना काेचिंग के सेल्फ स्टडी करते हुए यह मुकाम हासिल किया। माेतीराम ने सफलता का श्रेय ईश्वर, माता-पिता, छाेटे भाई दुर्गाशंकर, दाेनाें बड़ी बहन केसर व सुमित्रा, पत्नी चंदा काे दिया।

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