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इंडियन एयर फोर्स के जांबाज:सैनिक स्कूल के स्टूडेंट उड़ा रहे सुखोई, भर चुके एक से दो हजार घण्टे उड़ान, हर्षित फाइटर जेट उड़ाने वाले चित्तौड़ के पहले पायलट

चित्तौड़गढ़19 दिन पहले
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स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी। - Dainik Bhaskar
स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी।

चित्तौड़गढ़ के सैनिक स्कूल से निकले दो स्टूडेंट इन दिनों ऐसे फाइटर प्लेन की उड़ान भर रहे हैं, जो हर जवान का सपना जैसा होता है। बचपन से उड़ान को अपना पैशन बनाने वाले ये स्टूडेंट इन दिनों फाइटर जेट सुखोई से आसमान की ऊंचाइयां नाप रहे हैं, दुश्मन के ठिकानों की गिनती कर रहे हैं। इनमें एक स्टूडेंट चित्तौड़ और दूसरा जयपुर का रहने वाला है। इंडियन एयरफोर्स डे पर जानते हैं कैसे दोनों ने 1000 से 2000 घंटों तक की कठिन उड़ान चुटकियों में पूरी की।

चित्तौड़ के हर्षित त्यागी जिले के पहले ऐसे इंडियन एयर फोर्स ऑफिसर है जिनको फाइटर जेट सुखोई उड़ाने का गौरव मिला है। इसी तरह चित्तौड़ सैनिक स्कूल के ही जयपुर मूल निवासी अमरचंद्र अग्रवाल भी सुखोई उड़ा रहे है।ं

स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद्र अग्रवाल।
स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद्र अग्रवाल।

स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी ने माता-पिता के कहने पर 2001 में सैनिक स्कूल जॉइन किया था। उनका कहना था कि खेलने कूदने का शौक था तो सैनिक स्कूल में जाने के लिए काफी उत्सुक भी थे। 2005 में वो वहां से पासआउट होकर निकले और इंडियन नेशनल डिफेंस अकादमी जॉइन किया। इसके बाद स्क्वॉड्रन लीडर त्यागी ने 2009 के जून महीने में एयर फोर्स जॉइन कर लिया। जब 33 वर्षीय स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी से यह पूछा गया कि एयर फ़ोर्स ही क्यों? तो सहज रूप से हंसते हुए कहते हैं कि छोटी उम्र में जब भी कोई यह पूछे कि आप सैनिक स्कूल से निकल कर क्या बनना चाहते हो तो सभी प्लेन उड़ाने की इच्छा जाहिर करते हैं।

स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी अपनी पत्नी के साथ।
स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी अपनी पत्नी के साथ।

सुखोई के अलावा हॉक भी उड़ा चुके है स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी

स्क्वॉड्रन लीडर त्यागी का कहना था कि वे मैथ्स और फिजिक्स में काफी अच्छे थे और पायलट बनने के लिए इसकी जानकारी होना ज्यादा जरूरी था, इसलिए मैंने इसको चुना। फिर मूवी में तो देखते ही रहते हैं तो इच्छा अपने आप ही जाग उठी। सुखोई में अब तक 1300 घंटे बिताने वाले स्क्वॉड्रन लीडर त्यागी की अभी बरेली में पोस्टिंग है। उनका अनुभव फाइटर प्लेन उड़ाने का 2000 घंटे का है। उन्होंने सुखोई के अलावा हॉक को भी उड़ाया है। स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित यागी के पिता सत्यवीर सिंह त्यागी कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यरत थे, जो अभी रिटायर्ड हो चुके हैं। इसी तरह मां पंचायत समिति में टीचर रह चुकी हैं और उनकी पोस्टिंग अरनिया पंथ में थी। वह भी अभी सेवानिवृत्त हो चुकी हैं। सुखोई उड़ाने वाले चित्तौड़ से स्क्वॉड्रन लीडर हर्षित त्यागी पहले फाइटर प्लेन पायलट बने।

कंपाउंडर के बेटे को सैनिक स्कूल में देख जागी थी इच्छा

इसी तरह 28 वर्षीय अमरचंद अग्रवाल ने 2003 में पहली बार सैनिक स्कूल में कदम रखा था। उनका कहना था कि जयपुर जिले में पिता हरिकिशन अग्रवाल का मेडिकल शॉप हुआ करता था, वहां एक कंपाउंडर के बेटे का सैनिक स्कूल में सिलेक्शन हुआ था। उसको देखकर पिता और अमरचंद्र ने खुद को सैनिक स्कूल ज्वाइन होने की इच्छा जागी, जिसके बाद उन्होंने 2003 से 2010 तक चित्तौड़गढ़ के ही सैनिक स्कूल में अपनी पढ़ाई की। इसके बाद 2010 में उन्होंने एयर फोर्स जॉइन किया और 2014 के जून महीने में उनको रैंक मिली।स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद को भी सुखोई उड़ाने का गौरव प्राप्त हुआ। उनका कहना था कि 2009 में स्कूल की ओर से उन्हें पुणे एयर बेस ले जाया गया, वहां पहली बार उन्हें पायलट बनने की इच्छा हुई। तब उन्होंने सोच लिया था कि उन्हें पायलट ही बनना है। स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद ने बताया कि उन्हें हॉर्स राइडिंग और बास्केटबॉल दोनों का ही बहुत शौक है। शुरू में उन्होंने हॉर्स राइडिंग भी काफी की है।

सुखोई में 1000 घंटे की उड़ान भर चुके हैं अमरचंद्र

स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद की पोस्टिंग अभी इस वक्त आसाम के डिब्रूगढ़ में है। उन्हें सुखोई में 1000 घंटे की उड़ान भर चुके हैं। अमरचंद बालाकोट, उड़ी और कोविड-19 में कोरोना योद्धाओं का स्वागत में जैसे प्रोजेक्ट में इंवॉल्व रहे हैं।

स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद्र के परिवार।
स्क्वॉड्रन लीडर अमरचंद्र के परिवार।
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