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धर्म समाज:तेरापंथनगर में आज मनाया जाएगा आचार्य भिक्षु का 296वां जन्माेत्सव, चतुर्दशी से शुरू हाेगा महाश्रमणजी का चातुर्मास

भीलवाड़ा7 दिन पहले
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  • आचार्यश्री ने जैन दर्शन के तीन आयाम आत्मवाद, कर्मवाद और लोकवाद का मर्म समझाया

आचार्यश्री महाश्रमण के प्रवचन श्रवण मात्र से जीवन को एक नई दिशा मिलती है। वस्त्रनगरी में पावन प्रवास करा रहे आचार्यश्री के दर्शन के लिए सुबह से शाम तक श्रद्धालुओं का आवागमन जारी है। निर्धारित व्यवस्थानुसार कोविड के मद्देनजर समुचित सुरक्षा उपायों के साथ श्रावक समाज सेवा-धर्माराधना का लाभ ले रहा है।

तेरापंथ नगर के महाश्रमण सभागार में बुधवार सुबह उद्बोधन में आचार्यश्री ने कहा कि जैन दर्शन के मुख्यतः तीन आयाम है- आत्मवाद, कर्मवाद और लोकवाद। ये तीनों आपस में परस्पर संबंधित है। कर्मवाद के अनुसार पुण्य-पाप अपने-अपने होते है।

जैसी करनी वैसी भरनी। अपने कर्मो का फल व्यक्ति को स्वयं ही भोगना पड़ता है। निमित्त कोई भी मिल जाए पर कर्मफल व्यक्ति के स्वयं के होते है। जीवन के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को कर्मवाद से आंका जा सकता है।

आठ कर्मों के द्वारा ही जीवन में अनुकूलता-प्रतिकूलता होती रहती है, इसलिए व्यक्ति को हमेशा गलत कार्यों से बचते हुए शुभ योग में रहने का प्रयास करना चाहिए। साधना में आगे बढ़कर अपनी आत्मा का कल्याण कर सकते है। मुनि शांतिप्रिय, साध्वी सोमयशा ने अपनी भावनाएं व्यक्त की।

आचार्य भिक्षु ने अध्यात्म जगत में क्रांति कर धर्म की नई अलख जगाई

आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी को देशभर में तेरापंथ के आद्यप्रवर्तक आचार्यश्री भिक्षु का जन्मोत्सव एवं बोधि दिवस हर्षोल्लास से मनाया जाता है। विक्रम संवत 1783 में जोधपुर संभाग के कंटालिया ग्राम में आचार्यश्री भिक्षु का जन्म हुआ।

अध्यात्म जगत में क्रांति कर उन्होंने धर्म की नई अलख जगाई। आचार्य भिक्षु द्वारा प्रतिपादित मर्यादाएं आज भी लाखों लोगों के आत्मिक उन्नति का पथ प्रशस्त कर रही है। आषाढ़ शुक्ला चतुर्दर्शी से आचार्यश्री महाश्रमण के चातुर्मास का प्रारंभ हो रहा है।

वर्षाकाल के इन चार महीनों में विधि अनुसार जैन साधु समुदाय विहार आदि नही करते है। सन् 2010 में आचार्य बनने से लेकर अब तक आचार्यश्री महाश्रमण ने सरदारशहर, केलवा, जसोल, लाडनूं, दिल्ली, नेपाल, गुवाहटी, काेलकात्ता, चेन्नई, हैदराबाद आदि में चातुर्मास किए हैं। केलवा के बाद मेवाड़ में आचार्यश्री महाश्रमण के चातुर्मास का यह दूसरा अवसर है।​​​​​​​

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