आनंद गिरि के दोस्तों से खास बातचीत:बोले- दूसरे बच्चों से अलग था 'अशोक', 12 साल की उम्र में अध्यात्म भाव जागा; 15 से ज्यादा भाषाएं जानता है

भीलवाड़ाएक महीने पहलेलेखक: रावत प्रवीण सिंह

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और प्रयागराज स्थित बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि के सुसाइड केस से अब CBI पर्दा हटाएगी। प्रदेश की योगी सरकार ने महंत की मौत की CBI जांच कराने के लिए केंद्र से सिफारिश की है। संतों ने भी यही मांग उठाई थी। उधर, जेल भेजे गए महंत के शिष्य आनंद गिरि और लेटे हनुमान मंदिर के मुख्य पुजारी आद्या प्रसाद तिवारी को सेंट्रल नैनी जेल में हाई सिक्योरिटी में रखा गया है।

महंत नरेंद्र गिरि की मौत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। मामले में मिले कथित सुसाइड नोट में उनके शिष्य आनंद गिरि का जिक्र है। अपने ही गुरु को आत्महत्या के लिए मजबूर करने वाले आनंद गिरि की लाइफ स्टाइल भी काफी विवादों में रही है। भीलवाड़ा के सरेरी गांव से सांतवीं में पढ़ने वाला अशोक चोटिया बिना किसी को बताए घर से चला गया था। अशोक 12 साल बाद आनंद गिरि बनकर अपने गांव आया था।

आनंद गिरि घर से निकलने के बाद महंत नरेंद्र गिरि के साथ रहे। महंत नरेंद्र गिरि के प्रकरण में उनका नाम सामने आने के बाद परिवार के लोग और दोस्त अब भी हैरान हैं। वे लोग इस बात को मानने को तैयार नहीं है कि आनंद गिरि ऐसा कर सकता है।

कुंभ में निरंजनी अखाड़ा संत के साथ आनंद गिरि। बताया जाता है कि कुंभ में अखाड़ा का मैनेजमेंट उन्हीं के देखरेख में हुआ था।
कुंभ में निरंजनी अखाड़ा संत के साथ आनंद गिरि। बताया जाता है कि कुंभ में अखाड़ा का मैनेजमेंट उन्हीं के देखरेख में हुआ था।

दैनिक भास्कर टीम ने आनंद गिरि के सांसारिक जीवन और संत जीवन में नजदीक रहे दोस्तों से बातचीत की। इस दौरान कई चौंकाने वाले पहलू सामने आए। भले ही उन पर कितने ही आरोप लग रहे हैं, लेकिन उनके करीब, घरवाले और दोस्त इस बात को मानने को तैयार ही नहीं। उनका अब भी दावा है कि उन पर लगे आरोप सही नहीं है।

आनंद गिरि पर मठ के रुपए घर भेजने का भी आरोप लगा। इस पर भी उनके पिता और बड़े भाई ने यह दावा किया कि उन्होंने एक भी पैसा यहां नहीं भेजा। यदि वे ऐसा करते तो आज उनका परिवार इन हालातों में नहीं रहता। टीम ने जब उनके दोस्तों से बातचीत की तो उनका कहना था कि वे अपने गुरु को ही सबकुछ मानते थे। उनकी मॉडर्न लाइफ स्टाइल का सबसे बड़ा कारण उनकी एजुकेशन है। ऐसा बताया जा रहा है कि आनंद गिरि को योग गुरु के तौर पर भी लोग जानते थे।

मॉडर्न लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते हैं आनंद गिरि
मॉडर्न लाइफ स्टाइल के लिए जाने जाते हैं आनंद गिरि
आनंद गिरि को योग में महारत हासिल है। वे कई तरह के आसन बड़े आसान तरीके से करते हैं।
आनंद गिरि को योग में महारत हासिल है। वे कई तरह के आसन बड़े आसान तरीके से करते हैं।

सातवीं तक अशोक के साथ पढ़ने वाले दोस्तों ने अपना नाम न बताने की शर्त पर बात की। अशोक के दोस्तों ने बताया कि सातवीं तक उन्हें जितना जानते थे, उसके अनुसार बचपन में ही आध्यात्म का भाव ज्यादा था। इसी वजह से न तो किसी से ज्यादा बातचीत करते और न ही उसका व्यवहार दूसरे बच्चों की तरह था।

उन्होंने बताया कि सातवीं में पढ़ने के बाद वे घर से निकल गए। जब लौटे तो उन्हें साधु के रूप में ही देखा, लेकिन बड़ी बात यह थी कि उनके स्वभाव में अब भी कोई अंतर नहीं था। बचपन में वे सीधे और सरल स्वभाव के थे। आनंद गिरि पर लग रहे आरोपों पर उनका कहना है कि वे ऐसा नहीं कर सकते हैं। गांव के लोगों में वे अब भी पूज्यनीय है।

अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की, आस्ट्रेलिया और कजाकिस्तान सहित कई देशों की यात्रा कर वहां योग की ट्रेनिंग दी।
अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की, आस्ट्रेलिया और कजाकिस्तान सहित कई देशों की यात्रा कर वहां योग की ट्रेनिंग दी।

उनके संत जीवन में करीबी रहे बीकानेर के महा मंडलेश्वर सरजू दास महाराज ने बताया कि करीब 6 साल पहले इलाहाबाद में आनंद गिरि से उनकी मुलाकात हुई थी। काफी शांत और सरल स्वभाव रखने वाले आनंद गिरि ने योग शिक्षा में P.hd. भी कर रखी है।

सरजू महाराज ने कहा कि महंत नरेंद्र गिरि से अनबन से पहले और उसके बाद भी कई बार आनंद गिरि से मुलाकात हुई, लेकिन इस मुद्दे पर आनंद गिरि ने कुछ भी नहीं कहा।

सरजू महाराज का कहना था कि इस विवाद के बाद बाहर अफवाहों का दौर चल रहा था। वहीं आनंद गिरि ने अपने गुरु नरेंद्र गिरि को ही अपना सब कुछ बताया था। सरजू महाराज का यह भी कहना है कि आनंद गिरि के स्वभाव से कभी नहीं लगा कि वह अपने गुरु को ब्लैकमेल करेंगे या उन्हें आत्महत्या के लिए उकसा सकते हैं। मामले की पूरी जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। सत्य सामने आ जाएगा।

आनंद गिरी ने योग शिक्षा में P.hd. भी कर रखी है। उनकी पहचान इंटरनेशनल योग गुरु के तौर पर भी है।
आनंद गिरी ने योग शिक्षा में P.hd. भी कर रखी है। उनकी पहचान इंटरनेशनल योग गुरु के तौर पर भी है।

योग में PhD 15 से ज्यादा भाषाओं का ज्ञान सातवीं पढ़ने के बाद आनंद गिरि अपने घर से निकल गए थे। इसके बाद उनकी पूरी शिक्षा महंत नरेंद्र गिरि के सानिध्य में ही हुई थी। आनंद गिरि ने वैदिक शिक्षा ले रखी है। योग में PhD भी कर रखी है। उसकी पहचान योग गुरु के तौर पर भी है।

आनंद गिरी ने अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोप, तुर्की, आस्ट्रेलिया और कजाकिस्तान सहित कई देशों की यात्रा कर वहां योग की ट्रेनिंग दी। आनंद गिरि को करीब 15 भाषाओं का ज्ञान है। संत बनने के बाद 2013 में आनंद गिरि ने स्वर्ण भूमि प्रयाग नाम से एक किताब भी लिखी। इसके अलावा कई यूनिवर्सिटी में बतौर गेस्ट फैकल्टी योग की क्लास भी लेते थे।

पांच महीने पहले जब वे भीलवाड़ा अपने गांव आए।
पांच महीने पहले जब वे भीलवाड़ा अपने गांव आए।
आनंद गिरि की लाइफ स्टाइल काफी मॉडर्न है
आनंद गिरि की लाइफ स्टाइल काफी मॉडर्न है

वैदिक व योग शिक्षा के साथ हायर एजुकेशन, इसलिए लाइफ स्टाइल में इतना बदलाव
उनके करीबी रहे जानकारों से जब उनकी लाइफ स्टाइल के बारे में पूछा गया तो उन्होंने सफाई दी कि उच्च शिक्षा का ज्ञान होने के कारण उनकी लाइफ स्टाइल काफी मॉडर्न थी। दोस्तों का कहना है कि आनंद गिरि ने कम उम्र में ही वैदिक शिक्षा, धर्म और संत जीवन को समझ लिया था। उनकी ओर से दावा किया जा रहा है कि कम उम्र में इतनी शिक्षा लेने वाले वे अकेले हैं।

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