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अनुभव:पीपीई किट पहनने के बाद मुश्किल से हिल पाते हैं, सांस छोड़ते हंै तो गर्म हवा निकलती है...मास्क से चेहरे पर निशान पड़ जाते हैं

भीलवाड़ाएक वर्ष पहले
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  • अनुभव एमजी अस्पताल के फिजिशियन डॉ. दाैलत मीणा ने आइसोलशन वार्ड में ड्यूटी अनुभव साझा किए

डाॅ. दाैलत मीणा एमजी अस्पताल में फिजिशियन हैं। वे काफी दिन से टीम के साथ कोरोना मरीजों का इलाज कर रहे हैं। उन्होंने अपने अनुभव भास्कर से साझा किए- उनका कहना है कि पीपीई किट पहनकर काम करना अासान नहीं है, लेकिन हम इससे भी बड़ी चुनाैती काेराेना से लड़ रहे हैं, जिसे हराना ही प्राथमिकता है। डॉक्टर व नर्सिगकर्मियों के पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विमेंट (पीपीई) किट पहनकर काम करना आसान नहीं होता है। इसके साथ ही मास्क व चश्मे का दबाव नाक व चेहरे पर निशान बना देता है। किसी की त्वचा कमजोर होती है तो घाव भी पड़ जाते हैं। कई बार तो ऐसा होता है कि जब सांस छोड़ते हैं तो मुंह से निकलने वाली गर्म हवा से चश्मे के कांच भी धुंधले हो जाते हैं। तब देख पाने में भी समस्या आती है। शरीर को खास उपकरणों से ढंके रखना होता है, जिससे हम लोग संक्रमित होने से बच सकें। कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले सभी डॉक्टरों को लगभग हर स्टेप के बाद सेनेटाइजर होना पड़ता है। पीपीई उतारते समय पैक कर डिस्पोजल के लिए रख दिया जाता है। पीपीई को उतारते वक्त उलटा करना होता है। मतलब बाहरी हिस्सा अंदर रहना चाहिए। फिर खुद को सेनेटाइज कर बाहर निकलना होता है।

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