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काबू में काेराेना:तीसरी लहर से पहले एमजीएच में एक साल तक के बच्चों के लिए न्यू बॉर्न केयर यूनिट बनाई, 10 बेड का वार्ड तैयार

भीलवाड़ा23 दिन पहले
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महात्मा गांधी अस्पताल में कोरोना वार्ड में पहले सारे बेड भरे थे। अब अधिकाशं खाली। - Dainik Bhaskar
महात्मा गांधी अस्पताल में कोरोना वार्ड में पहले सारे बेड भरे थे। अब अधिकाशं खाली।
  • एसएनसीयू में जरूरत के अनुसार 50 बेड कर सकते हैं...नवजात शिशुओं के उपचार में मिलेगी मदद
  • 41 संक्रमित मिले, 4 की मौत, 245 स्वस्थ हुए

काेराेना की तीसरी लहर काे लेकर तैयारियां पूरी हाे गई हैं। बताया जा रहा है कि इसमें बच्चाें की संख्या अधिक संक्रमित हाेगी, ऐसे में जिला प्रशासन व चिकित्सा विभाग ने कई किए हैं। एमजी अस्पताल में बच्चाें के लिए अलग से 10 बेड का वार्ड तैयार किया जा चुका है। साथ ही एक साल से छाेटे बच्चाें के लिए स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) भी बनाई गई है। एमजी अस्पताल के पीएमओ डाॅ. अरुण गाैड़ ने बताया कि तीसरी लहर से निबटने तैयारी की जा रही है।

इसके लिए एसएनसीयू में 6 बेड तैयार किए गए हैं। साथ ही जरूरत के अनुसार 50 बेड भी किए जा सकते हैं। इसमें जन्म से एक साल तक के बच्चाें की देखभाल हाे सकेगी। बच्चों के लिए 10 बेड का वार्ड भी है। इसमें बेड बढ़ाए जा सकेंगे। तीसरी लहर से बच्चाें काे बचाने के लिए उनकी इम्युनिटी बढ़ाई जाएगी।

जिला प्रशासन ने भी शिक्षा विभाग के साथ योजना बनाई है। कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते ने बताया कि लाॅकडाउन शिक्षा विभाग ने बच्चाें काे पढ़ाने के लिए ऑनलाइन पाेर्टल शुरू किए थे। साेशल मीडिया पर ग्रुप बनाए थे। अब इन ग्रुप में ऑडियाे व वीडियाे डालेंगे इसमें आयुष की गाइडलाइन जैसे काढ़ा, हल्दी का दूध पीने, याेग-प्राणायाम के लिए बच्चाें काे प्रेरित करेंगे। बच्चाें की उम्र के हिसाब से दाे ग्रुप बनाए हैं। इसमें छह से 12 व 13 से 18 साल जायु तक के दाे ग्रुप बनाए हैं। शिक्षा िवभाग के अधिकारी इसकी मॉनिटरिंग करेंगे।

काेराेना काे लेेकर अब राहत है। पंद्रह दिन पहले जहां प्रदेश में कहीं भी ऑक्सीजन युक्त बेड नहीं मिल रहे थे वहीं अब आसानी से मिलने लगे हैं। जिले में 9 अप्रैल से पीक शुरू हुआ था। 9 अप्रैल काे 245 संक्रमित मिले थे जाे उस समय के सर्वाधिक थे। पीक के दाैरान संक्रमिताें की संख्या 778 तक पहुंच गई थी। माैत का आंकड़ा भी एक दिन में 30 तक पहुंच गया था। 15 मई के बाद संक्रमिताें व मौत के आंकड़ाें में कमी आई। हालांकि अभी हर दिन औसत 4 से 5 माैतें प्रतिदिन हाे रही हैं। आरआरटी प्रभारी डाॅ. घनश्याम चावला ने बताया कि जिले में रविवार काे काेराेना के 41 संक्रमित सामने आए है। वहीं 245 ठीक हुए हैं। 4 की उपचार के दाैरान माैत हुई है। अब तक जिले में 787 लाेगाें की माैतों हाे चुकी है। वहीं अब तक 31 हजार 582 काेराेना आ चुके हैं व 30 हजार 676 व्यक्ति ठीक हाे चुके है। जिले में अभी 760 एक्टिव केस है जाे घराें व अस्पतालाें में उपचार ले रहे हैं। 1145 सैंपल की जांच में से 41 पाॅजिटिव आए हैं।

बदलाव की ये तस्वीर है सुखद : 15 दिन पहले खाली नहीं थे ऑक्सीजन युक्त बेड, अब 929 में से 727 खाली

वेंटीलेटर भी है खाली शहर में ऑयुक्त 929 बेड है जिसमें अभी 202 बेड भरे हुए है। वहीं 727 खाली है। आईसीयू में वेंटीलेटर के साथ 67 बेड है जिसमें से 45 भरे हुए है व अभी 22 खाली है। आईसीयू बेड जिसमें वेटीलेटर नहीं है वाे 93 बेड है जिसमें से 47 भरे हुए है व 46 खाली है।

संक्रमण राेकने के लिए ये प्रयास रहे सफल
1 करीब डेढ़ महीने से लाॅकडाउन हाेने के कारण से लाेग बाहर कम आ रहे हैं। मिलना-जुलना बंद हो गया।
2 जिले में घर-घर सर्वे किया गया जिसमें सर्दी, खांसी, जुखाम व बुखार वालाें काे चिह्नित किया गया और उपचार किया गया। 16 हजार लोगों को घरों में दवा दी गई।
3 प्रशासन, पुलिस व चिकित्सा विभाग ने टीम वर्क के साथ काम किया जिसका नतीजा रहा कि काेराेना संक्रमिताें की संख्या कम हुई है।
4 काेराेना की दूसरी लहर आने के कारण से लाेग जागरुकता के साथ वैक्सीनेशन करवाने लगे हैं।

ब्लैक फंगस से बुजुर्ग की माैत
शहर के एक बुजुर्ग की रविवार काे जयपुर में ब्लैक फंगस से उपचार के दाैरान माैत हाे गई। शहर के अरिहंत हाॅस्पिटल के पास रहने वाले 70 साल के बुजुर्ग काे 7 मई काे काेराेना हुआ था। इसके बाद ब्लैक फंगस हाेने पर एमजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया। 19 मई काे जयपुर रैफर किया था जहां रविवार काे माैत हाे गई। यह तीसरे व्यक्ति हैं जिनकी ब्लैक फंगस से माैत हुई है। इससे पहले गुलाबपुरा व पीथास के पूर्व सरपंच की माैत हाे गई थी।

न्यू बॉर्न केयर यूनिट में शिशु के वजन में कमी, पीलिया जैसे रोगों का करेंगे इलाज
जांच की कमी के कारण नवजात शिशु के वजन में कमी, हांफना, पीलिया, हाइपोथर्मिया, कोल्ड शॉक, कोमा, दस्त, रक्तस्त्राव व अन्य लक्षणों का त्वरित उपचार नहीं हो पाता है। इन लक्षणों के त्वरित उपचार के लिए एमजीएच में एसएनसीयू स्थापित करने का निर्णय लिया है। एसएनसीयू में विशेष चिकित्सा अधिकारी के अतिरिक्त बाल रोग विशेषज्ञ, प्रशिक्षित नर्स और एक अधिकारी को नियुक्त किया गया है।

अब पाैधाें की सार-संभाल कलेक्टर ने बताया कि अब हर घर में औषधीय पौधे दिए जाएंगे। इनके सार-संभाल की जिम्मेदारी बच्चाें काे दी जाएगी। इसमें तुलसी, अश्वगंधा जैसे पौधे हाेंगे ताकि इनका महत्व बच्चाें काे शुरू से पता लग सके। बच्चाें की इम्युनिटी मजबूत रखेंगे ताकि काेराेना जैसी महामारी से बचाया जा सके।

काेराेना हाेने पर घबराएं नहीं। समय रहते उपचार कराएं। जिले में बहुत ही कम बच्चे पाॅजिटिव हैं जाे आए उनकाे भर्ती करने की जरूरत नहीं पड़ी। काेराेना जैसे लक्षण आने पर डाॅक्टर से संपर्क करें। शुरूआत में ही उपचार करवाएं। तीसरी लहर में अधिक बच्चे के आने की संभावना है। ऐसे में 18 साल से अधिक उम्र के सभी लाेगाें काे वैक्सीनेशन करवाना जरूरी है। बच्चाें के माता पिता को टीका लगना इसलिए भी ज्यादा जरूरी है क्योंकि सबसे अधिक बच्चों के संपर्क में वे ही आते हैं। नई गाइडलाइन के अनुसार स्तनपान करवाने वाली महिला भी वैक्सीनेशन करवा सकती है।
डाॅ. राकेश मूंदड़ा, शिशु राेग विशेषज्ञ व चिकित्सा अधिकारी शहरी प्राथमिक स्वाथ्य केंद्र चपरासी काॅलाेनी गायत्री नगर

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