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स्वच्छता में पिछड़ रहा भीलवाड़ा:नगर परिषद का दावा- 100% होता है कचरा संग्रहण, सच - कंपोस्ट प्लांट में 25 टन कचरा कम आ रहा

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • 130 टन से अधिक कचरा रोजाना उत्पादन करता है शहर

स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ रहे भीलवाड़ा शहर को लेकर चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। असल में नगरपरिषद लगातार दावे करती रही है कि शहर में हाेने वाला एकत्रित कहीं नहीं छाेड़ा जा रहा है।

भास्कर ने हकीकत जानने के लिए शहर की गलियों से उठने वाले कचरे के पाइंट से लेकर कंपोस्ट प्लांट तक पहुंचने वाले आखिरी पाइंट काे देखा।

एक सर्वे के अनुसार यदि शहर में पूरा कचरा संग्रहण हो तो कंपोस्ट प्लांट में रोजाना 130 टन से अधिक कचरा प्रोसेस होने के लिए पहुंचना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता है। अभी सिर्फ 95 से 105 टन कचरा ही पहुंच रहा है।

यानि शहर की गलियों, बाजारों और मोहल्लों में 25 टन कचरा उठाया ही नहीं जा रहा है। जबकि परिषद का दावा है कि शहर के हर घर से कचरा उठता है। 100 प्रतिशत डोर टू डोर कलेक्शन करते हैं।

कचरा संग्रहण से लेकर निस्तारण प्रक्रिया और लापरवाही

कचरे का संग्रहण - डोर टू डोर कचरा संग्रहण। ऑटो टीपर रोजाना नहीं पहुंच रहे है। कई बार कॉलोनी में मकानों को छोड़ दिया जाता है। गीला और सूखा कचरा अलग अलग संग्रहित नहीं करके एक साथ उठाया जा रहा है। कचरे का परिवहन - कचरे ले जाने के लिए ऑटो टीपर लगा रखे हैं, लेकिन दो दिन में एक बार या कई बार तीन दिन में एक बार आते हैं।

खुले डंपरों में जाता है कचरा, गिर जाता है सड़कों पर

जिन पाइंट पर ऑटो टिपर द्वारा कचरा लाकर डाला जाता है वहां से डंपर उठाकर ले जाता है। परिषद का एक भी डंपर ऐसा नहीं है जिस पर तिरपाल ढकी हो। ऐसे में कचरा पाइंट लेकर कीरखेड़ा स्थित कंपोस्ट प्लांट तक पहुंचने में सड़कों पर एक तिहाई गिर जाता है।

सच्चाई - दो दिन पहले टीपर बुलवाकर 15 दिन का कचरा उठवाया... पूर्व सभापति मंजू पोखरना ने बताया कि शहर में 100 फीसदी कचरा संग्रहण का दावा सच नहीं है।

शहर की पॉश कॉलोनियों से जरूर कचरा उठ जाता है, लेकिन बाहरी कॉलोनियां और बस्ती से कचरा नहीं उठता है। दो दिन पहले मुझे काशीपुरी, साबुन मार्ग से लोगों ने फोन किया था, जिस पर मैंने नगर परिषद से ऑटो टीपर बुलवाकर 15 दिन पुराना कचरा उठवाया था। मुश्किल से शहर का 60 से 70 प्रतिशत कचरा कंपोस्ट प्लांट तक पहुंचता है। बाकी शहर की गलियों, बाजार, मोहल्लों में ही रह जाता है।

नतीजा - 105 टन कचरा ही पहुंच रहा ट्रेचिंग ग्राउंड, 25 टन रह जाता है शहर में...कंपोस्ट प्लांट जब से शुरू हुआ तब से लेकर अभी तक एक भी बार 130 टन या इससे अधिक कचरा उसके पास नहीं पहुंचा है। हमेशा 96 टन से लेकर 105 टन तक कचरा ट्रेचिंग ग्राउंड तक पहुंचा है। 25 टन कचरा शहर में ही रह जाता है। यदि ऐसा नहीं होता तो इतने महीनों में कभी तो 130 टन कचरा पहुंच पाता।

कचरा डिस्पोजल यूनिट भी नहीं इसलिए यह तर्क भी संभव नहीं

शहर के रेस्टोरेंट, होटल, मैस, तीन हजार वर्गमीटर से अधिक बड़े मैरिज गार्डन, 300 फ्लैट व मकान वाली सोसायटी, जहां प्रतिदिन 100 किलो से अधिक कचरा निकलता है, उनका कचरा नगर निकाय की ओर से नहीं उठाया जाएगा।

उन्हें कचरे का प्रबंध करने के लिए डिस्पोजल यूनिट लगानी होगी, लेकिन किसी भी जगह डिस्पोजल यूनिट नहीं लगी है। उनका कचरा भी परिषद की ओर से उठाया जा रहा है तो भी कचरा कम मात्रा में कंपोस्ट प्लांट पहुंच रहा है। इसलिए इसका बहाना बनाकर भी नगर परिषद यह नहीं कह सकती है कि इसलिए 100 फीसदी कचरा उठ रहा है।

कई बार ऑटो टिपर खराब होते हैं इसलिए कचरा उठता नहीं होगा। बाकी कचरे का संग्रहण 100% होता है। बाकी अगर कोई बात है तो मैं इसके बारे में पता करती हूं।
दुर्गा कुमारी, आयुक्त

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