भास्कर खुलासा:दो नंबर का माल दिल्ली, मुंबई पहुंचाने के लिए बना लिया काेड वर्ड, कच्ची गाड़ी, कबूतर बोलने पर ही कटता है बिल

भीलवाड़ा3 महीने पहलेलेखक: पंकज पारीक
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  • एक नंबर में करीब 12 टन माल इंदौर भेजने के लगते हैं 15 से 17 हजार, दो नंबर में 30 से 35 हजार ले रहे

डबल भाड़ा, माल भीलवाड़ा। ये सुनने में अजीब लगे लेकिन भीलवाड़ा से दिल्ली, अहमदाबाद, नासिक, मुंबई और इंदौर जाने वाली गाड़ियों की यही हकीकत है। इन बसाें में टेक्स चुराने के लिए बिना बिल व बिल्टी के माल पहुंचाया जा रहा है।

दैनिक भास्कर टीम ने इस मामले का खुलासा करने के लिए लगातार सात दिनाें तक ट्रेवल्स बसाें के कार्यालय व वाणिज्यिक कर विभाग की कार्रवाई पर नजर रखी। इसमें सामने आया कि काेड वर्ड के जरिए माल लाया जाता है और पहुंचाते हैं।

भास्कर पड़ताल में सामने आया कि कच्ची गाड़ी यानी दो नंबर का माल पहुंचाने वाली ट्रेवल्स और ट्रकें। जो दो नंबर का माल का भाड़ा दोगुना लेकर आती जाती है। भीलवाड़ा से रोजाना ऐसी आधा दर्जन गाड़ियां आती-जाती है। यानी करीब 50 से 60 टन माल रोजाना इधर उधर होता है। वाणिज्यिक कर विभाग के अफसराें काे पता हाेने के बावजूद नाममात्र की कार्रवाई हाेती है।

भास्कर रिपाेर्टर ने 04 ट्रेवल्स संचालकाें से की बात, विभाग कर रहा अनदेखी, रोज 50-60 टन माल भेजने का वसूल रहे दाेगुना किराया

खानापूर्ति- छह माह में मात्र दाे कार्रवाई...पिछले छह महीने में वाणिज्यिक कर विभाग ने सिर्फ दो कार्रवाई की है। जिसमें 6.96 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है। डेढ़ महीने की लॉकडाउन अवधि छोड़ भी दी जाए तो भी जनवरी से लेकर जुलाई तक हुई 2 कार्रवाई बहुत ही नाममात्र की है। जबकि आए दिन इस तरह टेक्स चाेरी हाे रही है।

निकाला रास्ता- एक नंबर माल तो भाड़ा एक नंबर, दो नंबर माल तो भाड़ा दोगुना...जीएसटी लागू होने के बाद इस तरह की गतिविधि में कमी आई है लेकिन इसका भी तोड़ ट्रेवल्स संचालक और ट्रांसपोर्टरों ने निकाल लिया है। एक नंबर माल होने पर प्रति किलो 2.15 से 2.50 रुपए मालभाड़ा लगता है। अगर माल दो नंबर यानी बिना बिल वाला है तो यह किराया दोगुना होकर प्रति किलो 5 से 6 रुपए हो जाता है।

डबल भाड़ा- 60 टन माल दो लाख रुपए लेकर पहुंचाते है इधर उधर...एक नंबर में 12 टन माल इंदौर पहुंचाने के करीब 15 से 17 हजार रुपए लगते है। लेकिन यही माल दो नंबर होने पर 30से 35 हजार रुपए का भाड़ा लगता है। अब 5 गाड़ियां दिल्ली, इदौर, अहमदाबाद और मुंबई के लिए जाती है। करीब 2 लाख रुपए भाड़ा लेकर दो नंबर का माल पहुंचाया जाता है।

ये हैं कोड वर्ड कच्ची गाड़ी, कबूतर बिल...दो नंबर का माल लाने ले जाने के काम में कोड वर्ड का उपयोग किया जाता है। बिना कोड वर्ड के माल नहीं ले जाते हैं। भास्कर रिपोर्टर ने ऐसे ही एक ट्रेवल्स संचालक के पास जाकर दो नंबर का माल भेजने की बात की तो मना कर दिया। लेकिन जैसे कोड वर्ड बोला तो माल भेजने के लिए तैयार हो गया। ऐसे ही कबूतर बिल कोड वर्ड इस्तेमाल होता है।

ऐसे हाेता है कर चाेरी का खेल ई वे बिल की व्यवस्था शुरू हो चुकी है। लेकिन कच्ची गाड़ी भेजने के लिए ऑफलाइन बिल्टी का इस्तेमाल किया जाता है। ताकि वाणिज्यिक कर विभाग की टीम पकड़ ले तो बहाना बना सके। दो नंबर का माल ले जाने वाली गाड़ी को अगर विभाग पकड़ ले तो जुर्माना भर देते हैं, जिसका माल होता है उससे वसूला जाता है। माल पकड़ा जाए तो जुर्माना भी माल भिजवाने वाला देगा।

लॉकडाउन से पहले दो ट्रेवल्स पकड़ी थी। ये अहमदाबाद से भीलवाड़ा आई थी। चैकिंग में पता चला कि पॉलीथिन बैग्स, रेडीमेड और मसाले थे। इनसे 6.96 लाख रुपए वसूले हैं। जब भी चैकिंग में ऐसी ट्रेवल्स की जानकारी मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी। हां, इनका कुछ काेडवर्ड भी हाेता है। हम इस तरह के मामलाें में कार्रवाई करते हैं।

मो. हुसैन अंसारी, अतिरिक्त आयुक्त(प्रशासन) वाणिज्यिक कर विभाग

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