संशोधन:कोरोना की संजीवनी माना गया रेमडेसिविर इंजेक्शन अब डब्लूएचओ और एम्स की गाइडलाइन में नहीं रहा

भीलवाड़ा6 महीने पहले
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  • एम्स ने कहा- काेराेना हाेने के नाै दिन में ही रेमडेसिविर लगवाने पर असर करता है

रेमडेसिविर काे लेकर आमजन में यह धारणा बन चुकी है कि काेराेना हाे गया है और सिटी स्कैन में स्काेर अधिक आ रहा है या सांस लेने में परेशानी हाे रही है ताे रेमडेसिविर इंजेक्शन का लगवाया जाए जिससे व्यक्ति ठीक हाे जाएगा। एमजी अस्पताल के पीएमओ डाॅ. अरुण गाैड़ ने बताया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने रेमडेसिविर इंजेक्शन काे काेराेना उपचार से की लिस्ट से ही हटा दिया है।

पहले डब्लूएचओ ने गाइडलाइन जारी की थी उसमें उपयोग ले सकते थे अब नकार दिया है। वहीं एम्स ने भी रेमडेसिविर काे इनकार दिया है। एम्स ने गत दिनाें कोरोना संक्रमितों के इलाज के अपने प्रोटोकॉल में अहम बदलाव किए। काेराेना हाेने के नाै दिन में ही रेमडेसिविर इंजेक्शन लगवाने पर असर करता है। अभी कई लाेग आकर कह रहे है हमें ताे रेमडेसिविर इंजेक्शन लगा दाे जब कि उनकाे जरूरत ही नहीं है।

उनका ऑक्सीजन लेवल सही है। साथ ही सीटी स्कैन में स्काेर भी 12 प्रतिशत से कम आ रहा है। रेमडेसिविर वायरल का असर कम करता है साथ ही अस्पताल में मरीज के हाेने वाले स्टे काे कम करता है। उन्हाेंने बताया कि लाेगाें में भ्रांति है कि रेमेडेसिविर इंजेक्शन लगाने ठीक हाे जाएंगे। जबकि रेमेडेसिविर इंजेक्शन जरूरत वाले मरीजाें काे ही दी जाती है।

यह सभी काे नहीं दी जा सकती है। कई मरीज ताे अस्पताल में आते ही कहते है कि रेमेडेसिविर इंजेक्शन लगा दाे नहीं लगाते है ताे स्टाॅफ से लड़ने लग जाते है। अस्पताल में आने वाले व्यक्ति जिसकाे जरूरत हाेती है उसे रेमडेसिविर लगा रहे है। इन दिनाें युवा अधिक पाॅजिटिव आ रहे है इसके लिए गाइड लाइन की पालना युवाओं काे भी करनी बहुत ही जरूरी है।

एक्सपर्ट रेमडेसिविर कोरोना बीमारी की अवधि को कम करता है, पर यह जीवनरक्षक दवाई नहीं है एवं मौत की दर को घटा नहीं सकता। यह एक एंटी वायरल ड्रग है और संक्रमण के शुरुआती दिनों में कारगर साबित होता है। संक्रमण अधिक फैलने पर लंग्स खराब होने की स्थिति में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।

कोरोना के हर मरीज को इस इंजेक्शन की आवश्यकता नहीं पड़ती है। सामान्य लक्षणों वाले मरीजों को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं लगाना होता है। वे घर पर डी आइसोलेशन और सही देखरेख से ठीक हो सकते हैं, लेकिन वे मरीज जिनमें गंभीर लक्षणों के साथ-साथ ऑक्सीजन लेवल की कमी पाई जाती है, उन्हें यह इंजेक्शन देना जरूरी होता है। डाॅ. अरुण गाैड़, पीएमओ एमजी अस्पताल

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