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  • Councilors Are Demanding Money For Work In Wards ... The Council Has Rs 6.50 Crore. Because The Finance Commission Did Not Get The Installment

नगर परिषद में बजट संकट:पार्षद मांग रहे वार्डों में काम के लिए पैसा...परिषद के पास 6.50 करोड़ रु. क्योंकि वित्त आयोग की किश्त नहीं मिली

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • हर साल आठ से दस करोड़ रुपए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी होते हैं
  • चुंगी समाप्त होने पर मिलने वाला ढाई करोड़ रुपए का अनुदान नहीं मिला

कोरोना से पहले और बाद में नगर निकायों को मिलने वाला फंड प्रभावित हो रहा है। इससे विकास कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। क्योंकि जितना बजट होगा उतने विकास कार्यों के लिए टेंडर निकाला जा सकता है। ये फंड वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से जारी किया जाता है।

दरअसल भीलवाड़ा नगर परिषद को हर साल 8 से 10 करोड़ रुपए इस मद में मिलते हैं। लेकिन इस साल छह महीने निकल चुके हैं और सातवां चल रहा है इसके बावजूद किश्त का एक रुपया सरकार से नहीं मिला है। कोरोना काल की वजह बताकर सरकार की ओर से पैसा भी नहीं भेजा रहा है। इसके अलावा चुंगी बंद करने पर भी दो से ढाई करोड़ रुपया पैसा नगर परिषद को मिलता है इस मद में भी पैसा नहीं मिला है।

हाल ही में पार्षदों की ओर से सीसी रोड, नाली की मरम्मत और नई बनाने को लेकर प्रत्येक वार्ड से डिमांड की गई थी। इसके लिए टेंडर लग चुके हैं। श्मशान की व्यवस्था बेहतर करने, रोशनी की डिमांड अभी भी बरकरार है। लेकिन नगर परिषद के पास इतना बजट नहीं है कि वह इन डिमांड के लिए पैसा जारी कर सके।

विकास कार्यों में खर्च होता है वित्त आयोग और चुंगी समाप्ति का पैसा
सरकार ने करीबन 25 साल पहले चुंगी बंद की, तब से नगर परिषद की इनकम का बड़ा जरिया बंद हो गया। चुंगी बंद करते वक्त जो आय हो रही थी, उसी हिसाब से सरकार ने अनुदान तय कर दिया। सालों पहले तय अनुदान हर साल 10 फीसदी बढ़ाया जाता है। इसी तरह वित्त आयोग की सिफारिश पर केंद्र और राज्य सरकार अपनी आय में से एक हिस्सा नगर निकायों को देती है ताकि विकास कार्य में परेशानी न हो।

इन विकास कार्यों में सीसी रोड, नालियां बनाना और मरम्मत, पार्कों की हालात सुधारना, श्मशान और कब्रिस्तान की व्यवस्था सुधारना। रोशनी के लिए पोल लगाना, लाइटें लगाना आदि शामिल है, लेकिन अब इस साल रुपए नहीं आने से विकास कार्य प्रभावित हुए है।
इतना बजट परिषद के पास नहीं 10 करोड़ रुपए की है दरकार

  • नगर परिषद के बजट में फिलहाल साढ़े छह करोड़ रुपए ही बचे हैं। इस साल वित्त आयोग का पैसा नहीं आने से विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। पार्षद प्रत्येक वार्ड में और कार्य कराने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब इतना बजट नगर परिषद के पास नहीं है। करीब 10 करोड़ रुपए और परिषद के पास होते तो कई और सीसी सड़क, नालियों की मरम्मत, पार्कों की व्यवस्था सुधार सकते थे। - मंजू चेचाणी, सभापति, नगर परिषद

शहर को सेनिटाइज करने में औपचारिकता; कोरोना पॉजिटिव के घर व संक्रमित क्षेत्र को छोड़कर दूसरी जगह कर्मचारी कर रहे हैं सेनिटाइजेशन

एक तरफ कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है दूसरी तरफ शहर को सेनिटाइज करने में सिर्फ औपचारिकता की रही है। जिन गलियों में कोरोना संक्रमित मिल रहे हैं वहां और उसके आसपास के क्षेत्रों में सेनिटाइजेशन नहीं करके दूसरी जगह सेनिटाइजेशन किया जा रहा है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब पता चला कि सेनिटाइजेशन की प्रक्रिया रात में दमकलों से कराया जा रहा है।

इसको लेकर आयुक्त नारायणलाल मीणा ने दमकल शाखा प्रभारी राजेंद्र गुप्ता को पाबंद भी किया कि रात में सेनिटाइजेशन नहीं करके दिन में किया जाए ताकि अधिक से अधिक क्षेत्र में सेनिटाइजेश हो सके, दूसरा जहां जरूरत है वहां कॉलोनीवासी बता सके कि इस जगह सेनिटाइजेशन किया जाना चाहिए। लेकिन रात के अंधेरे में कॉलोनीवासी घरों के अंदर होते हैं और बाहर सेनिटाइजेशन हुआ नहीं इसकी जानकारी भी नहीं मिल पाती है।

  • दमकल प्रभारी राजेंद्र गुप्ता को पाबंद कर दिया है कि सेनिटाइजेशन में दिन में ही करें रात को नहीं है। अगर फिर भी ऐसा किया जा रहा है उन पर कार्रवाई की जाएगी। - नारायणलाल मीणा, आयुक्त, नगर परिषद

संक्रमितों की गलियाें में बेरिकेड हैं वहां नहीं हो रहा सेनिटाइजेशन...संक्रमित के मकान, दुकान वाले क्षेत्रों की गलियों को बल्लियां लगाकर आवागमन रोक दिया जाता है। ऐसे में वहां प्रवेश भी नहीं हो सकता है। तब दमकल की ओर से कहां सेनिटाइजेशन किया जा रहा है? अगर दूसरी जगह सेनिटाइजेशन किया जा रहा है तो वह औपचारिकता भर ही है।

रात में दमकल के सायरन से परेशानी...देररात दमकल जब जाकर सेनिटाइजेशन करने जाती है तो सायरन बजता रहता है इससे लोगों को परेशानी होती है। इसकी शिकायत परिषद में आयुक्त कर चुके हैं। इसको लेकर आयुक्त मीणा ने दमकल प्रभारी राजेंद्र गुप्ता को सेनिटाइजेशन दिन में करने के लिए पाबंद किया। इसके बावजूद रात में सेनिटाइजेशन जारी है। दो-चार दिन पहले दमकल ने ख़ड़ी कार को टक्कर मार दी। इसकी शिकायत वाहन मालिक ने परिषद से की। इसके बावजूद रात में औपचारिकता वाला सेनिटाइजेशन जारी है।

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