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बागौर:सीआईडी के एएसआई की मौत...थोड़ी देर पहले बेटे काे फाेन पर कहा- जी घबरा रहा

भीलवाड़ा10 महीने पहले
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  • रात भर ढूंढते रहे परिजन, सुबह बागाेर क्षेत्र के बांसड़ा रामपुरिया के पास मिली लाश

सीआईडी सीबी जाेन में तैनात एएसआई का शव मंगलवार काे बांसड़ा रामपुरिया के पास मेजा बांध की नहर से कुछ दूरी पर सूनसान जगह मिला। साेमवार काे ड्यूटी जाने की बात कहकर निकले एएसआई ने माैत से कुछ घंटे पहले बेटे काे फाेन कर जी घबराने और प्यास लगने की बात कहते हुए पानी की बाेतल लाने काे कहा था। लेकिन वे लाेकेशन नहीं बता पाए और और फाेन स्विच ऑफ हाे गया। 

परिजन ढूंढते रहे और दूसरे दिन सुबह उनका शव मिला। एसएचओ खींवराज गुर्जर ने बताया कि मंगलवार सुबह कारोई थानाधिकारी से बांसड़ा रामपुरिया के पास नहर के पास शव मिलने की सूचना पर मौके पर गए। शव से लगभग 100 फीट की दूरी पर एक बाइक खड़ी थी।

पास में ही एएसआई के कपड़े, जूते और जहर की शीशी भी मिली। सुरेन्द्र सिंह चारण पुत्र बहादुर सिंह निवासी गेगवा तहसील फूलिया सीआईडी जाेन भीलवाड़ा में एएसआई थे। सूचना पर गंगापुर डीएसपी बुद्धराज, मांडल सीआई राजेन्द्र गोदारा, कारोई थानाधिकारी प्रेमसिंह भी पहुंचे।

सहकर्मी ने ओल्या खिलाया तब से बीमार रहने लगे, काेराेना काे लेकर आशंकित थे

पुलिस के अनुसार एएसआई सुरेन्द्रसिंह के शरीर पर केवल बनियान और बरमूडा था, जबकि उनके कपड़े और जूते 100 फीट दूर बाइक के पास पड़े थे। माैके पर जहर की शीशी और उल्टी हाेने के हालात भी मिले। एएसआई के कपड़ाें की जेब से सुसाइड नोट भी मिला। सुसाइड नाेट का हवाला देते हुए मृतक के जीजा धनदानसिंह ने रिपाेर्ट में लिखा कि शीतला सप्तमी काे सुरेन्द्रसिंह के कार्यालय में कार्यरत एक सहकर्मी द्वारा ओल्या खिलाया गया था।

इसके बाद से वह बीमार रहने लगे थे। उनकी लाश पर काेई चाेट के निशान नहीं हैं। इधर, पुलिस सुसाइड नाेट के आधार पर हर पहलू से जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एएसआई सुरेन्द्रसिंह मार्च के पहले पखवाड़े में बीमार भी रहे थे। उल्टी-दस्त की शिकायत पर जांच करवाने के बाद वे कुछ दिन तक काेराेना संक्रमण काे लेकर आशंकित भी रहे थे।

अफसोस : बेटे ने कहा - काश पापा लाेकेशन बता देते...एएसआई सुरेन्द्रसिंह के बेटे विक्रमसिंह ने बताया कि साेमवार शाम करीब सात बजे पिता का फोन आया। पूछने पर बताया कि नहर के पास एक लाल चट्टान के पास हूं। इसके बाद फोन बंद हो गया। हमें नहीं पता वाे किस कंडीशन में थे। अगर उसी समय लाेकेशन मिल जाती ताे हम पहुंच जाते और उन्हें बचा लेते। मोबाइल लोकेशन के आधार पर पूरी रात रामपुरिया क्षेत्र में ढूंढा, लेकिन पता नहीं चला।

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