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डायबिटीज:परिजनों को लगा कोरोना है, जांच में डायबिटीज, बीमारी का पता नहीं चलता तो हो सकती थी बच्चे की मौत

भीलवाड़ाएक महीने पहले
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  • भीलवाड़ा में एक साल के बच्चे में टाइप-1 डायबिटिज दुर्लभ क्याेंकि देश के 3 लाख बच्चों में से एक में ऐसा

शहर में पहली बार डायबिटीज का दुर्लभ केस सामने आया है। मात्र एक साल के बच्चे में डायबिटीज हाेने की पुष्टि हुई है। यह मामला दुर्लभ इसलिए है क्योंकि 3 लाख बच्चों में से एक बच्चा ही एेसा होता है जिसमें यह बीमारी होती है। इससे भी बड़ी बात यह है कि कुछ ही डॉक्टर्स होते हैं जो इतनी कम उम्र बच्चों में डायबिटीज का पता लगा पाते हैं। ऐसा एक केस शहर के स्पर्श हॉस्पिटल में मिला है जहां डॉ. अतुल हेड़ा ने इसका पता लगाया अाैर बच्चे को मौत के मुंह से बाहर निकाल लाए। एक साल के मोहम्मद कैफ को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उसकी हालत देखकर परिजन परेशान होने लगे।

रातों रात स्पर्श हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। डॉ. हेड़ा से संपर्क किया और कहा कि सांस लेने में परेशानी हो रही है कहीं कोरोना तो नहीं है। मोहम्मद कैफ की जांच करना शुरू किया तो पता चला कि उसे कोरोना नहीं बल्कि डायबिटीज है। वह भी टाइप वन। इसका मतलब हाेता है कि रोजाना इंसुलिन के इंजेक्शन लगेंगे।

शुगर नहीं पता चलता तो मौत हो जाती
बच्चे की सांस का पैटर्न देखते हुए डॉ. अतुल हेड़ा ने माता-पिता को सलाह दी कि बच्चे का शुगर टेस्ट कराया जाए। खून व पेशाब में शुगर और कीटोन बॉडीज पॉजिटिव आते ही बच्चे में डायबिटिक कीटोएसिडोसिस निकला। यह एक इमरजेंसी होती है। तुरंत बच्चे का इस हालत में इलाज शुरू किया गया। सुबह तक बच्चे की सांस की तकलीफ सही हो गई। इस कंडीशन में बच्चे की मौत तक हो सकती थी। अगले 3 दिनों में बच्चे की इंसुलिन की मात्रा सेट करते हुए बच्चे को सही हालात में डिस्चार्ज कर दिया गया।
एक साल के बच्चे में डायबिटीज इसलिए गंभीर
भारत में 15 साल तक की उम्र वाले प्रति एक लाख बच्चों पर लगभग 3 बच्चे डायबिटीज से ग्रसित होते हैं। इन बच्चों में से लगभग एक फीसदी बच्चाें का ही एक साल से पहले की उम्र में पता चल पाता है। यानी तीन लाख बच्चों में से केवल एक बच्चा 1 साल से पहले की उम्र में डायबिटीज से ग्रसित होने की जानकारी मिल पाती है। इतनी कम उम्र में डायबिटीज का पता लगाना डॉक्टर के लिए भी मुश्किल काम है क्योंकि 1 साल से कम उम्र के बच्चों में डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों का अभाव होता है।

कोरोना काल में नवजात की सांस का ध्यान रखें
डॉ. हेड़ा ने बताया कि कोरोना काल में नवजात और इससे अधिक उम्र के बच्चों की सांसों पर ध्यान रखें। कुछ अलग पैटर्न दिखता है या सांस लेने में परेशानी होती है तो सिर्फ कोरोना ही नहीं है बल्कि दूसरी भी बीमारी हो सकती है। डॉक्टर के पास जाकर जांच कराएं क्योंकि अन्य बीमारी होने पर गंभीर नतीजे हो सकते हैं।
डाॅ. अतुल हेड़ा और माेहम्मद कैफ

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