नदी-​​​​​​​नालाें से चंबल में पहुंच रहा मटमैला पानी:चंबल में बाढ़-भीलवाड़ा परेशान, पानी कम और गंदा आने लगा, साफ करने का खर्च 7 गुना बढ़ा

भीलवाड़ा3 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
चंबल नदी स्थित इंटैक वैल के पास भरा पानी, मटमैले पानी काे उठाते पंप। - Dainik Bhaskar
चंबल नदी स्थित इंटैक वैल के पास भरा पानी, मटमैले पानी काे उठाते पंप।
  • साफ करने में पहले 20 हजार खर्च होते थे, अब 1.50 लाख तक

शहरवासियाें काे पेयजल उपलब्ध करवाने वाली चंबल नदी में बारिश के कारण नये पानी की आवक ने विभाग की मुश्किलें बढ़ा दी है। चंबल में मिलने वाले दूसरे नदी-नालाें से आए मटमैले पानी काे साफ करने में केमिकल की खपत बढ़ने के साथ ही पानी का वेस्टेज की मात्रा भी बढ़ गई।

पहले 5 से 10 एनटीयू टर्बीडीटी आती थी, जाे अब बढ़कर 250 से 300 एनटीयू टर्बीडीटी तक पहुंच गई। इस कारण मटमैले पानी काे साफ करने में पीएसी यानी पाॅली एल्यूमिनियम क्लाेराइड व क्लाेरिन की मात्रा बढ़ानी पड़ गई। पहले भीलवाड़ा पहुंच रहे करीब 1800 लाख लीटर पानी काे फिल्टर करने में राेज करीब 20 हजार रुपए खर्च हाे रहे थे, जाे अब बढ़कर करीब 1.50 लाख रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

बारिश के कारण नदियाें में नये मटमैले पानी की आवक के बाद चंबल से राेज मिल रहे पानी में करीब 15 प्रतिशत की कटाैती की जा रही है। इसका कारण माैसम में बदलाव से खपत घटने के साथ ही स्थानीय साेर्स में पर्याप्त पानी की आवक हाेना है। हर साल बारिश के दाैरान चंबल में मटमैला पानी कई गुना बढ़ जाता है।

पानी में शिल्ट यानी मिट्टी की मात्रा कई गुना बढ़ने से आराेली स्थित फिल्टर प्लांट में पानी काे साफ करने में अधिक भार पड़ रहा है। साथ ही विभाग काे शेष दिनाें के बजाय बारिश का पानी पहुंचने के दाैरान कई गुना केमिकल की आवश्यकता पड़ रही है।

सामान्य दिनाें में नदी के पानी काे साफ करने में 8 से 10 पीपीएम पीएसी यानी पाॅली एल्यूमिनियम क्लाेराइड लग रही थी, लेकिन वर्तमान में यह बढ़कर 70 से 120 पीपीएम यानी करीब 10 गुना बढ़ गई है।

मेजा व ककराेलिया से पर्याप्त पानी मिलने से घटाई चंबल के पानी की मात्रा

बारिश से मेजा बांध के साथ ही अन्य पेयजल स्त्राेताें में भी पानी की आवक हुई है। इसके चलते मेजा के साथ ही ककराेलिया घाटी से भी शहर में पर्याप्त पानी पहुंचने लगा है। इसके अलावा स्थानीय साेर्स, जैसे ट्यूबवैल, पनघट आदि के भी रिचार्ज हाेने से पानी मिलने से चंबल से मिल रहे पानी की खपत घटी है। मेजा बांध से करीब 100 लाख व ककराेलिया घाटी से 75 लाख लीटर पानी राेज मिल रहा है।

नये मटमैले पानी की आवक से फिल्टर प्लांट पर पड़ रहा लाेड

चंबल प्राेजेक्ट के एक्सईएन एसआर सिंह का कहना हैं कि बारिश के कारण चंबल नदी में सहायक नदी व नालाें से नये पानी की आवक से आराेली स्थित फिल्टर प्लांट पर लाेड पड़ने के साथ ही केमिकल भी अधिक लग रहा है। मटमैले पानी काे साफ करने में सामान्य दिनाें की तुलना में वर्तमान में अधिक केमिकल खर्च करना पड़ रहा है। यह स्थिति अगले कुछ दिनाें तक रहने वाली है।​​​​​​​

खबरें और भी हैं...