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ठगी करने में जामताड़ा से आगे शेखपुरा:एक ही ठग के चार-चार आधार कार्ड; बिना कॉल, ओटीपी के खातों से राशि ट्रांसफर, 10 साल के बच्चों को दे रहे ट्रेनिंग

भीलवाड़ा4 दिन पहलेलेखक: राकेश पाराशर
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बिहार के शेखपुरा थाना में आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई करती भीलवाड़ा पुलिस के अधिकारी। - Dainik Bhaskar
बिहार के शेखपुरा थाना में आरोपियों की गिरफ्तारी की कार्रवाई करती भीलवाड़ा पुलिस के अधिकारी।
  • झारखंड के जामताड़ा से ज्यादा शातिर बिहार के इस गांव का ठग गिराेह, बड़ी हाेटलाें में कमरा लेकर वहीं से करते हैं ठगी
  • देर रात करते हैं ऑनलाइन ठगी, क्योंकि नींद के चलते खातेदार काे अपने बैंक खाते से रुपए निकलने का तुरंत पता नहीं चले

बिहार का शेखपुरा गांव जहां के बदमाश ठगी में झारखंड के जामताड़ा से भी ज्यादा कुख्यात हैं। इस गांव में दस साल उम्र से बच्चाें काे ठगी के लिए ट्रेंड किया जाता है। यहां के अपनढ़ बच्चे भी फर्राटेदार अंग्रेजी बाेलकर अच्छे-अच्छे पढ़े-लिखाें से चंद मिनटाें में लाखाें रुपए की ऑनलाइन ठगी कर लेते हैं। इस गिराेह के हर ठग के नाम-पते फर्जी हैं, एक ठग के चार-चार आधार कार्ड, जिनमें माता-पिता का नाम ही गलत। एड्रेस भी दूसरे गांव का है।

बैंक खाताें के दस्तावेजाें में झूठ का ऐसा जाल है कि पकड़ना मुश्किल हाेता है। गिराेह के ठग गांव में लाेगाें काे चंद रुपयाें का लालच देकर उनके असली दस्तावेज और बैंक खाते खरीद लेते हैं। उनमें फर्जीवाड़ा कर एक अकाउंट नंबर काे कई दस्तावेजाें से जाेड़कर ठगी करते हैं।

पुलिस इन्वेस्टिगेशन में सामने आया कि झारखंड के जामताड़ा से भी ज्यादा खतरनाक ठग बिहार के शेखपुरा के हैं। भीलवाड़ा के कपड़ा व्यापारी से हुई 77 लाख की ठगी में पुलिस जिन छह आराेपियाें काे गिरफ्तार कर लाई है उनमें से दाे शेखपुरा के ही हैं। ये ठगी के लाखाें रुपए दर्जनाें खाताें में ट्रांसफर कर कुछ ही घंटाें में एटीएम कार्ड के जरिए निकाल लेते हैं।

साइबर टीम ने खंगाला 8 राज्याें के 25 लाख माेबाइल नंबराें का डाटा

जिले की सबसे बड़ी ऑनलाइन ठगी के मामले में पुलिस और साइबर एक्सपर्ट्स की टीम ने विभिन्न पहलुओं पर काम करते हुए झारखंड, बिहार, आंध्रप्रदेश, चेन्नई और महाराष्ट्र समेत देश के कई अलग-अलग स्थानों के बीटीएस डेटा इकट्ठा किए।

साइबर एक्सपर्ट एएसआई आशीष मिश्रा ने बताया कि कॉल डिटेल के माध्यम से 25 लाख से भी ज्यादा नंबरों का गहनता से विश्लेषण किया। कपड़ा व्यापारी के खाते से निकले रुपए जिन बैंक खाताें में गए, उनकी डिटेल खंगाली ताे पता चला कि उनमें हाेने वाला ट्रांजेक्शन संदिग्ध है। लगभग 100 बैंक खाताें की जानकारी जुटाई गई।

इसके बाद भीलवाड़ा पुलिस ने बैंक खाताें व संदिग्ध माेबाइल नंबराें के पंजीयन में दिए गए पते आधार पर झारखंड, बिहार, आंध्रप्रदेश, चेन्नई और महाराष्ट्र आदि प्रदेशाें के 54 गांवाें व कई शहराें में दबिश दी। जहां से कड़ी से कड़ी जाेड़ कर पुलिस ने 6 आराेपियाें काे गिरफ्तार किया।

ठगी का तरीका- चैन बनाकर कैसे हाेता है झुग्गी-झाेंपड़ी से दुबई तक ठगी का खेल

स्टेप फर्स्ट- बड़ी हाेटलाें में पहुंचते हैं दस्तावेज, फ्लाइट से लेने आता है सरगना

बिहार और झारखंड के छाेटे-छाेटे गांवाें में लाेग घूमते हैं। वहां गरीब आदमी काे लालच देकर उनके बैंक खाताें के दस्तावेज ले लेते हैं। इन दस्तावेजाें काे इकट्ठा कर 100 से 200 खाताें की डिटेल लेने वाले बड़े ठग काे बेच देते हैं। इस तरह बैंक खाताें की खरीद-फराेख्त हाेती है। गांव का सरगना लाखाें की ठगी का शिकार बनाने वाले ठग गिराेह के पास पहुंचता है।

सरगना पुलिस से बचने के लिए फ्लाइट से रांची, पटना या लखनऊ जैसे बड़े शहर में जाकर ये दस्तावेज लेकर बदले में तय पैमेंट कर देते हैं। यानि बैंक खाता बेचने वालाें से लेकर पहुंचाने वाला दलाल तक नहीं जानता कि सरगना काैन है और इन खाताें का किस तरह उपयाेग किया जाता है।

स्टेप सैकंड- हाेटलाें में रात में बैठकर करते हैं ठगी

बैंक खाताें की डिटेल सरगना के पास पहुंचते ही ये लाेग हाेटलाें में बैठकर ठगी करते हैं। बिना काॅल किए ही खाताें से पैसा उड़ाते हैं। एक साथ खाते में पैसा आते ही इनके पास 300 से ज्यादा खाते और एटीएम कार्ड रहते हैं। उनमें तुरंत पैसा ट्रांसफर कर देते हैं। वहां से इनके गुर्गे एटीएम में पहुंचकर पैसा निकाल देते हैं। भीलवाड़ा पुलिस ने भी एक युवक काे एटीएम से पैसे निकालते हुए फुटेज के आधार पर ही पकड़ा।

ठगी के लिए देर रात का समय चुना जाता था, जिसमें कई लाेगाें काे ताे उनके खाताें से रुपए गायब हाेने का पता घंटाें बाद चलता था। ठगी का शिकार हाेने वाले लाेग पुलिस या बैंकाें तक शिकायत करते, तब तक रुपए खाताें से निकाल लिए जाते थे।

ठगों की तुलना- कैसे झारखंड के जामताड़ा से भी शातिर बिहार के शेखपुरा के ठग

जामताड़ा- यहां का एक हैलाे चंद सैकंडाें में कर सकता है कंगाल

किसी समय बाॅक्साइट की खदानाें के लिए पहचाना जाने वाला झारखंड का जामताड़ा जिला कुछ समय से यहां के साइबर ठगाें के कारण अब पहचाना जा रहा है। साइबर ठगी में लिप्त रहने वाले यहां के युवाओं की लाइफ स्टाइल बदल चुकी है।

कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ हाेने के बावजूद छप्पर में बैठकर फाेन पर फर्राटेदार अंग्रेजी और अधिकारियाें जैसे लहजे में बात करने वाले युवा चंद सैकंडाें में काॅल उठाने वालाें से ओटीपी मांगकर उनके बैंक खाते से 10 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक उड़ा देते हैं। करीब दाे साल पहले यहां के युवाओं पर बनी वेब सीरिज ने इस जिले का नाम देश भर में चर्चित कर दिया।​​​​​​​

शेखपुरा- बिना काॅल किए ही बैंक खाताें से लाखाें रुपए कर देते ट्रांसफर

बिहार का शेखपुरा ऐसी जगह है, जहां के ठग फाेन पर इनामी प्रतियाेगिता, चेहरा पहचानाे प्रतियाेगिता और अन्य साइबर ठगी में लिप्त रहते थे। यहां के शातिर ठग अब ऐसे लाेगाें के संपर्क में आने लगे हैं, जाे बिना फाेन किए या ओटीपी पूछे साइबर ठगी के जरिए चंद मिनटाें में लाखाें रुपए उड़ा लेते हैं।

यहां के अधिकांश लाेग कच्चे घराें में रहते हैं। इनका काेई व्यापार नहीं है, लेकिन यहां के शातिर हर तरह की ठगी करते हैं। जाे अनपढ़ हैं वे भी फर्राटेदार अंग्रेजी बाेलकर फर्जी काॅल से ठगी कर लेते हैं। यहां दस साल की उम्र से ही अधिकांश बच्चाें काे ठगी के तरीके सिखाए जाते हैं। यहां के साइबर ठग देशभर में कुख्यात झारखंड के जामताड़ा के ठगाें से भी ज्यादा शातिर हैं।​​​​​​​

खातेदार को पता चलने से पहले ही रुपए गायब

ये ठग देर रात में वारदाताें काे अंजाम देते हैं ताकि माेबाइल या ईमेल पर ओटीपी आए ताे रात के समय साेए बैंक खातेदार काे इसका पता ही नहीं चले। बिहार के शेखपुरा गांव की झुग्गी झाैपड़ी या कच्चे मकानाें में रहने वाले ये शातिर ठग रात के समय बड़ी-बड़ी हाेटलाें में कमरा किराए लेकर वहीं से ऑनलाइन ठगी का यह सारा खेल चलाते हैं।

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