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सहाड़ा का अखाड़ा:संवेदनाओं के कैलाश पर गायत्रीदेवी, 42200 वोटों से प्रदेश की सबसे बड़ी जीत

भीलवाड़ा15 दिन पहले
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कोरोना गाइडलाइन के कारण मतगणना कर्मचारियों के लिए फेस शील्ड व मास्क लगाना जरूरी था। - Dainik Bhaskar
कोरोना गाइडलाइन के कारण मतगणना कर्मचारियों के लिए फेस शील्ड व मास्क लगाना जरूरी था।
  • कांग्रेस का कब्जा कायम, भाजपा अब ढाई साल के लिए क्वारेंटाइन में
  • दिवंगत कैलाश त्रिवेदी 7006 वोटों से जीते थे, पत्नी की जीत 6 गुना बड़ी

प्रदेश की तीन विधानसभा सीट के उपचुनाव में सबसे चर्चित रही सहाड़ा का नतीजा जीत के अंतर के लिहाज से टॉप पर रहा। कांग्रेस की गायत्रीदेवी ने भाजपा के डॉ. रतनलाल जाट को 42200 वोटों से मात देकर इतिहास रचा। 1952 से अब तक हुए 15 चुनाव-उपचुनाव में यह सबसे बड़ी जीत रही। इससे पहले 1980 में कांग्रेस के रामपाल उपाध्याय 21 हजार 722 वोट से जीते थे। उनका रिकाॅर्ड 41 साल बाद करीब दाे गुना वाेट से टूटा है। गायत्री देवी को 81700, डॉ. रतनलाल जाट को 39500, आरएलपी के बद्रीलाल जाट को 12202 वोट व नोटा को 4108 वोट मिले। 17 अप्रैल काे कुल 140368 वाेट डाले गए थे।

इनमें 58.20 प्रतिशत वाेट गायत्रीदेवी को मिले। उनकी जीत दिवंगत पति कैलाश त्रिवेदी की पिछली जीत के मुकाबले भी 6 गुना वोटों से रही।राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सहानुभूति की लहर, कांग्रेस का माइक्रो लेवल प्लान, भाजपा में खेमेबाजी और पितलिया प्रकरण का प्रभाव इस जीत के कारण रहे। टिकट देने से पहले भाजपा-कांग्रेस मुकाबले में बराबरी पर लग रही थी लेकिन टिकट की घोषणा और पितलिया के ऑडियो-वीडियो बम ब्लास्ट के साथ भाजपा बैकफुट पर चली गई। चुनाव से दो दिन पूर्व भाजपा के प्रत्याशी डॉ. रतनलाल जाट कोरोना संक्रमित होकर चुनावी मैदान से क्वारेंटाइन हाे गए। इनका चुनावी प्रबंधन देख रहे पुत्र और पूर्व प्रधान कमलेश चौधरी भी संक्रमित हो गए।

उपचुनाव में कांग्रेस ने बाजी मारी और भाजपा फिर से ढाई साल के लिए क्वारेंटाइन में चली गई। निकटतम प्रतिद्वंद्वी रहे डाॅ. रतनलाल जाट ने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता कभी नहीं हारता है। या तो वह जीतता है या सीखता है। जनता जनार्दन का जनादेश शिरोधार्य है।

भाजपा की हार क्यों } भाजपा में वसुंधरा खेमे के जिले के नेता ने दूरी बनाई रखी। ढाई साल से सक्रिय रहे रूपलाल जाट का टिकट काटा र पूर्व मंत्री डाॅ. रतनलाल जाट काे टिकट दिया। जमीनी स्तर पर भाजपा का प्लान नहीं बना, ऐसे में कार्यकर्ता एकजुट नहीं हाे पाए। गुटबाजी हावी रही।

कांग्रेस की जीत इसलिए कांग्रेस का सहानुभूति का वाेट कार्ड काम आया। उपचुनाव से पहले कांग्रेस कमजाेर दिख रही थी लेकिन फिर माइक्राे लेवल पर प्लान बनाया। प्रदेश से लेकर स्थानीय स्तर पर हर नेता काे अलग-अलग पंचायतवार जिम्मेदारी दी। क्षेत्र की जीत काे इन नेता की परफाेरमेंस का आधार बनाया इसलिए पंचायत स्तर पर काम हुआ। सत्ता का फायदा बहुत मिला।

पितलिया का असर उपचुनाव के नतीजों में लादूलाल फैक्टर खास हो गया। पितलिया का प्रभाव हाेने से पहले कांग्रेस ने साथ लाना चाहा। फिर भाजपा ने इसलिए पार्टी में वापस लिया कि टिकट दिए बिना काम चल जाएगा। जब निर्दलीय नामांकन किया ताे दबाव की राजनीति हुई, लेकिन गेम उलटा हाे गया। जाे भी वीडियाे व ऑडियाे आए, इससे भाजपा काे नुकसान हुआ।

गायत्री देवी के वोट का 48.34% ही डाॅ. रतनलाल को मिले...भाजपा के रतनलाल जाट को कुल वोटों के 28.14% वोट मिले जबकि गायत्री देवी को 58.21 प्रतिशत। यानी रतनलाल को गायत्री देवी के मुकाबले में सिर्फ 48.34% वोट ही मिले। इस उपचुनाव में तीसरे स्थान पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रत्याशी बद्रीलाल जाट रहे। पार्टी की ओर से भाजपा के पूर्व प्रत्याशी रुपलाल जाट के भाई बद्रीलाल को प्रत्याशी बनाया। पार्टी संयोजक हनुमान बेनीवाल ने तीन दिन तक विधानसभा क्षेत्र में मोर्चा संभाले रखा, धुआंधार प्रचार किया। फिर भी 8.71 प्रतिशत वोट ही मिले। जबकि पिछली बार चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे निर्दलीय प्रत्याशी रहे लादूलाल को 17.8% वोट मिले थे।

साहब... आपके सपने अब मैं पूरे करूंगी : गायत्री देवी
विधायक बनकर रायपुर निवास पर पहुंची गायत्रीदेवी ने सबसे पहले पति दिवंगत विधायक कैलाश त्रिवेदी की तस्वीर के समक्ष नमन किया। वे उन्हें साहब कहा करती थीं। चुनाव प्रचार में कहती थीं, साहब के सपने में मैं पूरे करूंगी। जीत के बाद बातचीत में भी यही बात दोहराईं। उन्होंने कहा- सहाड़ा-रायपुर मेरा परिवार है। इसके जाे दुख दर्द दूर करूंगी। भाजपा के चाल-चरित्र से जनता वाकिफ है इसलिए जनता ने दरकिनार किया। गहलाेत सरकार ने ढाई साल में जाे िवकास कराया, उस पर जनता ने मुहर लगाई है।

नोटा के वोट 1.62% बढ़े...पिछले चुनाव में नोटा को 3055 वोट मिले जो कि कुल वोटों का 1.3 प्रतिशत था। इस बार नोटा को 4108 वोट मिले है जो कि कुल वोटों का 2.92 प्रतिशत है यानी नोटा में भी 1.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। राजस्थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ समर्थित निर्दलीय दिनेशकुमार शर्मा को सिर्फ 390 वोट ही मिले।

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