महामारी का कहर:मुझे ऑक्सीजन बेड चाहिए, अस्पताल का जवाब पंजीयन करा दें; जगह खाली हाेने पर करेंगे फोन

भीलवाड़ा6 महीने पहले
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टीबी अस्पताल में बनाया कोरोना वार्ड - Dainik Bhaskar
टीबी अस्पताल में बनाया कोरोना वार्ड
  • 535 पाॅजिटिव मिले, 66 स्वस्थ हुए, काेराेना संक्रमण के भयावह भंवर में भीलवाड़ा

काेराेना का हमला लगातार जारी है। अस्पतालाें में ऑक्सीजन बेड नहीं मिल रहे हैं। हालात यह है कि अब महात्मा गांधी जिला अस्पताल में जाे मरीज आ रहे हैं उन्हें भर्ती करने की स्थिति तक नहीं है। बुधवार काे भी यही हाल थे। शास्त्रीनगर क्षेत्र से आए 52 वर्षीय मरीज ने कहा कि उसे सांस लेने में तकलीफ है। इस पर इमरजेंसी से जवाब मिला कि अभी पंजीयन करा दीजिए। जैसे ही बेड खाली हाेगा, फाेन कर दिया जाएगा।

अब ताे हालात ये हैं कि काेराेना जांच के सैंपल देने भी डिस्पेंसरियाें में लाेगों से अगले दिन आने के लिए कहा जा रहा है। इसमें तर्क दे रहे हैं कि जांच किट नहीं हैं। निजी अस्पतालाें में वैसे ही ऑक्सीजनयुक्त बेड का संकट चल रहा है।

जिले में बुधवार काे काेराेना के 535 संक्रमित आए है। साथ ही 66 लाेग ठीक भी हुए है। अब तक जिले में 14 हजार 306 लाेग ठीक हाे चुके है तथा 22 हजार 470 पाॅजिटिव आ चुके है। जिले में अभी 8 हजार 408 एक्टिव केस है। वहीं 15 मोते हुई है , अब तक 314 लोगों की कोरोना उपचार के दौरान मौत हो चुकी है।

जहाजपुर निवासी 65 साल की महिला, काेटड़ी के 64 साल के बुजुर्ग, काेटड़ी के 45 साल के व्यक्ति, बापूनगर के 79 साल के बुजुर्ग, आजाद नगर की 51 साल की महिला, मांडल निवासी 50 साल के व्यक्ति, कांवा खेड़ा की 47 साल की महिला, दादाबाड़ी निवासी 70 साल के बुजुर्ग, बाबाधाम के 60 साल के बुजुर्ग, तिलक नगर निवासी 56 साल के व्यक्ति, बापूनगर निवासी 62 साल के बुजुर्ग, मांडल निवासी 53 साल के व्यक्ति, बापूनगर निवासी 40 साल की महिला, तिलक नगर निवासी 89 साल की बुजुर्ग महिला, साेनियाणा के 52 साल के व्यक्ति की काेराेना उपचार के दाैरान माैत हाे गई।

सैंपल के लिए निराश हाेकर लाैट रहे हैं लाेग

शहर में की सभी डिस्पेंसरी काेराेना के सैंपल देने की शुरुआत कर दी है, यहां पर भी 25 से 30 ही सैंपल ही लिए जा रहे है। जिससे लाेगाें काे निराश लाैटना पड़ रहे है। अभी एमजी अस्पताल के काेराेना सैंपल केंद्र में हर दिन सैंपल देने वालाें की भीड़ लगी रहती है।

चिकित्सा विभाग के स्टाॅफ व परिजनाें के लिए मेडिकल सेल का गठन

काेराेना संक्रमण काे देखते हुए चिकित्सा विभाग के स्टाॅफ व उनके परिजनाें के लिए काेराेना से हाेनी वाली परेशानियाें के लिए तुंरत प्रभाव से समाधान के लिए मेडिकल सेल का गठन किया गया। इसकाे लेकर एमजी अस्पताल के पीएमओ ने आदेश जारी किया है।

आदेश के अनुसार डाॅ. दाैलत मीणा काे नाेडल ऑफिसर बनाया गया है। साथ ही टीम में प्रमुख मुख्य चिकित्सा अधिकारी डाॅ. वीडी शर्मा, फारुक माेहम्मद, लाेकेश शर्मा, कृष्ण गाेपाल सर्वा, डेविड शर्मा काे शामिल किया गया है।

राहत -टीबी अस्पताल में 20 बेड का वार्ड

एमजी अस्पताल में स्थित टीबी अस्पताल में 20 ऑक्सीजन युक्त बेड लगाए है। यहां पर उन मरीजाें काे रखा जाएगा जिनकाे घर जाने की ताे छूट्टी नहीं दे सकते है। पीएमओ डाॅ. अरुण गाैड़ ने बताया कि 20 बेड का वार्ड शुरु कर रहे है। यहां पर लाे प्लाे ऑक्सीजन लेवल की जरुरत है उनकाे यहां पर रखेंगे। अभी एमजी अस्पताल में अभी गंभीर मरीजाें का उपचार किया जा रहा हैं।

वहां पर सभी मरीजाें काे हाई प्लाे ऑक्सीजन लेवल की जरुरत है, उनकाे यहां पर रखा हुआ है। लाे प्लाे वाले मरीजाें काे वहां पर भर्ती करेंगे। शहर में स्थित सरकारी व सभी निजी अस्पताल के काेराेना वार्ड में जगह नहीं है। किसी भी अस्पताल में चले जाए ताे वहां पर बेड खाली की कहने पर जवाब ना में ही मिलेगा।

एमजी अस्पताल में ताे हर दिन 50 से अधिक लाेग केवल बेड के लिए आ रहे है। यहां पर भी जिनकी स्थित गंभीर हाे उनकाे भी 4 से 5 घंटे में नंबर अा रहा है। यहां पर भर्ती मरीजाें काे दूसरी जगह शिफ्ट करने के बाद ही नंबर आ रहा है। ऐसा ही हाल शहर के निजी अस्पताल में भी है। वहां भी बेड मिल जाए यह कह नहीं सकते।

इसलिए पड़ी जरूरत

उल्लेखनीय है कि गत दिनाें ने काेराेना सैंपल लेने वाले लैब टैक्निशियन काे काेराेना हाे गया था। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर गए पर बेड उपलब्ध नहीं हाे पाया। तबीयत अधिक खराब हाेने पर अस्पताल में बेड मिला भी। तब तक देर हो गई और उपचार के दाैरान माैत हाे गई। इससे सैंपल कलेक्शन व जांच करने वाले कर्मचारियाें में राेष था और उन्हाेंने सैंपल नहीं लेने व जांच नहीं करने की चेतावनी दी थी।

जिला प्रशासन व मेडिकल काॅलेज प्रशासन हरकत में आया और सेल का गठन किया। नर्सेज यूनियन के फरीद मोहम्मद बताया कि जाे कर्मचारी अपनी जान की बाजी लगाकर सैंपल लेने, जांच करने व काेराेना मरीजाें का उपचार कर रहे हैं, उनकाे ताे समय पर बेड मिलना चाहिए। साथ ही समय पर रेमडेसिविर भी मिले इसके प्रयास भी करना चाहिए।

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