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ये हादसे नहीं हत्या है, इन्हें राेकिए सरकार:लापरवाही का करंट छीन रहा जिंदगियां, बिजली निगम दे रहा सिर्फ मुआवजा; समाधान नहीं

भीलवाड़ा7 दिन पहलेलेखक: सुनील जोशी
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  • गांवाें में कई जगह झूल रहे हैं बिजली के तार, बरसात के समय खतरा ज्यादा, आए दिन हादसे पर नहीं दे रहे हैं ध्यान
  • निगम के कर्मचारियाें की भी जान गई, ठेके के कर्मचारी सुरक्षित हैं न मुआवजा मिलता

जूनावास का अक्षय, बापूनगर का गाेपाल हाे या शास्त्रीनगर की पूनम। अब दरीबा का प्रदीप। ये चिराग बिजली निगम की लापरवाही से बुझ गए। सवाल यह है कि बिजली निगम मुआवजा देकर मामले काे ठंडा ताे कर रहा है लेकिन स्थाई समाधान क्या है इस पर कभी प्रयास नहीं किए। जिले में लापरवाही के बिजली तंत्र का नमूना है अब गांव हाे या शहर आए दिन करंट से झुलस कर माैत की घटनाएं सामने आ रही है।

हैरान करने वाली बात है कि बिजली निगम के ऐसे कई कर्मचारी है जिनकी करंट से माैत हाे गई पर निगम अलर्ट नहीं हुआ क्याेंकि अधिकांश ठेके पर थे। एक दिन पहले ही पुर के निकटवर्ती स्थित गांव दरीबा में एक बच्चे की माैत हाे गई। पहले भी हादसे हुए पर डिस्काॅम व सिक्याेर कंपनी ने काेई भी ठाेस कदम नहीं उठाया जिसके कारण से हादसे हाे रहे है। बिजली का करंट आने के कारण से आए दिन जानवराें की माैते ताे हाेती है, लेकिन काेई ध्यान नहीं दे रहा है।

केस एक जूनावास में पुरानी कचहरी के पास मोहल्ले के बच्चों के साथ खेल रहे सात वर्षीय मासूम बालक की करीब चार साल पहले लोहे के खंभे से करंट से आने से मौत हो गई थी। यहां ललित सालवी का सात वर्षीय बेटा अक्षय रात करीब 8 बजे बजे मोहल्ले के अन्य बच्चों के साथ चौक में खेल रहा था। खेल-खेल में उसने वहां लगे लोहे के बिजली के खंभे को पकड़ लिया। इससे उसे करंट लगने से माैत हाे गई।

केस दाे पुराना बापू नगर स्थित सब्जी मंडी में 09 जुलाई, 2018 की शाम काे एक बच्चे की करंट लगने से माैत हाे गई। यहां किशन सोनी का छोटा बेटा गोपाल सोनी (12) व अपने भाई भरत सोनी के साथ शाम को घर के बाहर खेल रहा था। इसी दौरान पानी पतासे वाला आया तो दोनों दौड़कर उसके पास जाने लगे तभी गोपाल का हाथ पेड़ को छू गया। पेड़ में आए करंट से उसे झटका लगा और माैत हाे गई।

केस तीन 12 अगस्त 2020 काे शास्त्रीनगर में माहेश्वरी भवन के सामने वाली गली स्थित घर की 15 वर्षीय पूनम अपने पिता ओम प्रकाश शर्मा काे खाना पराेस कर बालकनी में आई थी कि मकान के सामने से गुजर रही 11 केवी बिजली लाइन की चपेट में ले लिया। गंभीर हालत में उदयपुर रैफर कर दिया। 18 दिन बाद 30 अगस्त काे माैत हाे गई थी। जांच में निगम में अपनी गलती नहीं मानी। इससे मुआवजा भी नहीं मिला।

भास्कर सवाल, क्या एपीओ समाधान है?...दरीबा की घटना के बाद बिजली निगम ने सहायक अभियंता धर्मराज बैरवा काे एपीओ कर दिया। अब सवाल यह है कि इस माैत पर अखिर एपीओ समाधान है। कई हादसाें में ताे निगम जांच भी अपने ही अधिकारियाें से करवाते हैं। ऐसे में क्लीन चिट दे दी जाती है।

जिसके कारण से मुआवजा भी नहीं मिलता है। इसका बड़ा उदाहरण है कि शास्त्रीनगर में पूनम की माैत हुई पर निगम की खामी नहीं मानी और मुआवजा नहीं मिला। यहां तक की गलती भी उनकी ही बता दी। ऐसे कई मामले हैं, जिनकाे दबा दिया गया।

झूलते ताराें में दाैड़ रही माैत...शहर के कई जगह घराें के पास तार निकल रहे हैं। ये झुलसाने वाले तार है। मराठा काॅलाेनी, जवाहरनगर समेत शहर में कई जगह ऐसे तार है। जिलेभर में खेताें में तार लटक रहे हैं। ट्रांसफार्मर खुले पड़े हैं। इसकी निगम में कई बार शिकायतें की जाती है लेकिन इस पर किसी का ध्यान नहीं रहता है।

बिना संसाधन कर रहे काम.. निगम की स्थिति यह है कि अधिकांश जगह बिना सुरक्षा संसाधान ही काम करते हैं। इससे हादसे हाेते रहते हैं। ग्रिड व लाइनाें की सार-संभाल का काम ठेके पर दे दिया है। ऐसे में ठेकेदार भी कर्मचारियाें की सुरक्षा पर ध्यान नहीं देते हैं। निगम की ओर से भी इनकाे पाबंद नहीं किया जाता है। अब तक कई कर्मचारियाें की माैत हाे चुकी है।

जाे हाई रिस्क पांइट है उनकाे ठीक करवा रहे हैं, जिससे की हादसे नहीं हाे। इसके साथ ही जहां पर तार लटक रहे हैं उनकाे भी ठीक करवा रहे हैं। बिजली गिरने के कारण से कई जगह बिजली के पाॅल पर लगे इंसुलेटर पंचर हाेने के कारण से बिजली के खंभाें में करंट आ जाता है। सभी कर्मचारियाें काे सुरक्षा के उपकरण दिए हुए है, अगर नहीं पहनते है ताे उनके खिलाफ एक्शन लेंगे। - एसके उपाध्याय, एसई भीलवाड़ा वृत्त

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