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थानाें में महिला हेल्प डेस्क:पुरुष पुलिसकर्मी सुनते हैं पीड़िताओं के परिवाद, बैठने की जगह तक नहीं

भीलवाड़ा2 महीने पहले
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महिला सुरक्षा और उनकी पीड़ा सुनकर सहायता करने के लिए थानों में बनाई गई महिला हेल्प डेस्क के हाल ठीक नहीं हैं। कहीं महिला पुलिसकर्मियों और महिला परिवादियों के अलग से बैठने की व्यवस्था नहीं तो कई थानाें में अलग से महिला डेस्क के कमरे दे रखे हैं। वहां थाने के स्टाेर रूम या अन्य शाखा के उपयाेग में आ रहे हैं। वहीं कुछ थानाें में पुरुष पुलिसकर्मी महिला परिवादियों की पीड़ा सुनते हैं। केन्द्र सरकार की ओर से करीब 100 कराेड़ का फंड जारी करने के करीब 6 महीने बाद अब प्रदेश सरकार जागी है।

राज्य सरकार ने प्रदेश के 500 थानाें में महिला हेल्प डेस्क के लिए 5 कराेड़ रुपए का बजट दिया है। इससे हर थाने में महिला डेस्क के लिए 1 लाख रुपए के संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे, जिससे थानों में महिला डेस्क मजबूत होगी। दिल्ली की निर्भया के बाद हैदराबाद में महिला डॉक्‍टर और उत्तरप्रदेश के उन्‍नाव में युवती की गैंगरेप के बाद जिंदा जलाने की घटनाओं के बाद महिला सुरक्षा के लिए केन्द्र सरकार ने पिछले साल 100 कराेड़ का निर्भया फंड जारी किया था। इसके बावजूद थानाें में महिला हेल्प डेस्क के हालात नहीं सुधरे।

थानों में महिला हेल्प डेस्क के लिए अलग ये जगह नहीं होने से महिलाओं के साथ विभाग की महिला पुलिसकर्मियाें को भी परेशान होना पड़ता है। जिन थानों में महिला पुलिसकर्मी नहीं हैं या कम हैं, उनके लिए यह समस्या और भी ज्यादा है। महिला पुलिसकर्मी के छुट्टी पर हाेने या किसी अन्य ड्यूटी में हाेने पर पीड़ित महिला को थाने में इंतजार करना पड़ता है। दुष्कर्म, छेड़छाड़ जैसे मामलाें में पीड़िताएं अपनी आपबीती पुरुष पुलिसकर्मियाें काे बताने में संकाेच करती हैं। राज्य सरकार की ओर से जारी एक-एक लाख रुपए का बजट मिलने पर महिला डेस्क के लिए कंप्यूटर, अन्य उपकरण, फर्नीचर आदि मिल पाएंगे।
यह थी याेजना : दिसंबर 2019 में केन्द्र सरकार की ओर से जारी बजट के बाद योजना के मुताबिक महिला हेल्‍प डेस्‍क पर अनिवार्य रूप से महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती के निर्देश दिए गए थे। पीड़ा लेकर थाने आने वाली महिलाओं से संवेदनशील तरीके से पेश आने के लिए पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया था। हेल्प डेस्क कानूनी सहायता, परामर्श, आश्रय, पुनर्वास और प्रशिक्षण आदि की सुविधा देने के लिए वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, गैर सरकारी संगठनों और विशेषज्ञों के पैनल को सूचीबद्ध करती है। ये सभी पीड़ित महिलाओं की सहायता में मददगार हाेते हैं।

बदनाैर : महिला डेस्क के कमरे में बना रखा स्टाेर
बदनाेर थाना परिसर में महिला डेस्क के नाम पर महज औपचारिकता हाे रही है। एक कमरे के बाहर महिला डेस्क की नेमप्लेट लगी है, लेकिन उसमें कोई सुविधाएं नहीं हैं। ना डेस्क है ना कंप्यूटर उपकरण। जब कोई पीड़िता आती है तो डेस्क के लिए नियुक्त महिला हैड कांस्टेबल अपने विश्राम गृह में सुनवाई करती है।
सिटी काेतवाली : काेतवाली थाने में महिला डेस्क के लिए कमरा बना है, लेकिन वहां दूसरे पुलिसकर्मी बैठते हैं। महिला डेस्क के लिए इसके अलावा अलग से काेई कमरा और उपकरण नहीं हैं। गंभीर मामला हाेने पर थाने के अन्य कमराें में महिला पुलिसकर्मी सुनवाई करती हैं।

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