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बदलाव की ओर बढ़ते कदम:लोगों को नई राह दिखाने रोज 10 किमी पर नया पड़ाव, संदेश ‘अहिंसा परमोधर्म’

भिलवाड़ाएक महीने पहले
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जावद में अिहंसा यात्रा के मंगल प्रवेश के दौरान आचार्यश्री व संत-साध्वियां। - Dainik Bhaskar
जावद में अिहंसा यात्रा के मंगल प्रवेश के दौरान आचार्यश्री व संत-साध्वियां।

हर दिन नया पड़ाव, नई यात्रा। करीब 97 मुनि व साध्वियाें के साथ श्रद्धालुओं का हुजूम। जिसमें 53 साध्वियां व 44 जैन मुनि हैं। करीब 16 हजार किलाेमीटर हाे चुकी इस अहिंसा यात्रा में आचार्यश्री सद्‌भावना, नैतिकता व नशामुक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं। तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्यश्री महाश्रमण ने इस यात्रा का नाम अहिंसा यात्रा दिया है जो तीन देशाें के साथ ही 20 राज्याें में जा चुकी है।

अगले चार माह पड़ाव भीलवाड़ा के तेरापंथनगर में हाेगा। 18 जुलाई काे आचार्यश्री भीलवाड़ा में मंगल प्रवेश करेंगे। इस खास माैके पर दैनिक भास्कर टीम मध्यप्रदेश के जावद पहुंची। मंगलवार काे टीम यात्रा में 10 किलाेमीटर पैदल चली अाैर अहिंसा यात्रा का उद्देश्य जाना।

लाइव - आचार्यश्री के दर्शन के लिए लोग आगे से आगे हर गांव में खड़े हैं, वे हर पड़ाव पर लोगों से बात करते हैं

दिनचर्या - यात्रा में तप व साधना के साथ माैन भी...आचार्य महाश्रमण सुबह चार बजे उठते हैं। इसके बाद सुबह छह बजे यात्रा शुरू हाे जाती है। करीब दस से 12 किलाेमीटर का राेजाना सफर पूरा करने के बाद पड़ाव अगले गांव में हाेता है। वहां पहुंचते ही आचार्य कुछ देर विश्राम कर लाेगाें से मिलते हैं। गांव के लाेगाें से भी चर्चा कर नशामुक्ति का संदेश देते हैं। वहां प्रवचन भी हाेते हैं। शाम काे चार से सात बजे तक आचार्यश्री का माैन रहता है।

समरसता - सभी स्वागत काे आतुर, कर रहे दर्शन...भास्कर टीम मंगलवार काे पदयात्रा में साथ रही ताे देखा कि आचार्य महाश्रमण की यात्रा में हर धर्म व समुदाय की सहभागिता है। गांवाें में जैन समाज के अलावा अन्य समाजाें के लाेग भी दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। जावद से पहले माेरका गांव के ग्रामीणाें के साथ ही महिलाएं व बच्चे भी स्वागत करने पहुंचे। महिलाओं ने बताया कि संत की कीर्ति सुनी इसलिए दर्शन करने आए हैं।

ध्यान - व्यस्तता के बीच पढ़ाते हैं पाठ...आचार्य की यात्रा में दिनचर्या काफी व्यस्त रहती है। सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्माे के बाद आत्ममंथन करते हैं। चर्चाएं, लेखन के साथ प्रतिक्रमण भी हाेता है। यह यात्रा एक लक्ष्य लेकर चल रही है। इसमें शिष्य भी हैं जाे संस्कृति, जैन दर्शन अादि ग्रंथाें की पढ़ाई करते हैं और पाठ भी पढ़ाते हैं। इस दाैरान वे आत्मकथा के साथ ही अन्य साहित्य भी खते हैं।

प्रबंधन - तकनीक का तालमेल...यह यात्रा प्रवचन तक की सीमित नहीं है। एक वैन में पूरा मिनी सचिवालय जैसा काम हाेता है। फाेटाेग्राफी, लेपटाॅप, प्रिंटर, स्कैनर, वाई-फाई आदि सुविधाएं हैं। प्रवचन कार्यक्रम का विभिन्न चैनल्स पर लाइव प्रसारण हाेता है। अभी काेविड की वजह से गांवाें में भी ऑनलाइन ही प्रवचन हाे रहे हैं। एक प्रचार-प्रसार केंद्र भी बना हुआ है। इससे यात्रा की लाेकेशन देशभर में प्रसारित हाेती रहती है।

जानिए... यात्रा के बारे में सब कुछ
चलता फिरता अस्पताल...अहिंसा यात्रा में एक चल चिकित्सालय भी है। इसमें डाॅक्टर, नर्सिंग स्टाफ व जांच सुविधा भी है। श्रावक-श्राविकाओं की भी स्वास्थ्य जांच हाेती है। अभी रतलाम के बाद से ही इस चल चिकित्सालय में वैक्सीनेशन भी किया गया। अभी गांवाें में जरुरतमंदाें काे दवाएं भी दी गई।
बाहर से आने वालाें के लिए दाे लग्जरी कोच...बाहर से जो श्रद्धालु आते हैं उनके रहने के लिए दाे लग्जरी काेच है। एसी, सीसीटीवी कैमरे, लाॅकर भी हैं। इन काेच के लिए पहले स्वीकृति लेनी पड़ती है।
नशा मुक्ति के साथ साहित्य का प्रचार...इस अहिंसा यात्रा में एक माेबाइल वैन चल रही है जिसमें नशा मुक्ति के लिए प्रेरित किया जाता है। जिस गांव में पड़ाव हाेता है वहां एक दिन पहले यह वैन पहुंचती है और लाेगाें काे जागरुक करते हैं।
शुद्ध पानी के साथ ही कई जगह के रसोड़े...अहिंसा यात्रा में एक वाटर कंटेनर चलता है। इसमें दाे हजार लीटर से ज्यादा का स्टाेरेज है। आरओ सिस्टम में साेलर लगा है। यात्रा में तमिलनाडू, राजस्थान, एमपी, महाराष्ट्र के जैन समाज के रसोड़े चलते हैं। इसमें मुनि व साध्वियां गाेचरी लेने आते हैं और बाहर के श्रद्धालु भाेजन भी करते हैं। यात्रा में टेंट, राशन सामग्री आदि सुविधाओं का ट्रक साथ चलता है।

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