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भीलवाड़ा खदान हादसे की भयावह तस्वीर:एक साथ 6 लोगों का अंतिम संस्कार, 25 किमी दूर मजदूरी करने जाते थे; घर से मुस्कुराते हुए निकले थे, अब लौटी लाशें

भीलवाड़ाएक वर्ष पहले
केमरी गांव में सभी 6 मजदूरों का एक साथ हुआ अंतिम संस्कार।

भीलवाड़ा में बुधवार को लाछुड़ा की अवैध खदान धंसने से 7 लोगों की मौत हो गई। इनमें 3 युवती और 4 युवक थे। गुरुवार सुबह इनमें से छह लोगों की लाश एक साथ केमरी गांव आई। सातवीं लाश लापलिया खेड़ा गांव पहुंची। केमरी गांव से गणेश, कन्हैया, प्रहलाद, हिंगलाज, धर्मा और मीना हंसते मुस्कुराते मजदूरी करने लाछुड़ा के लिए निकले थे। गुरुवार सुबह इन छह लोगों के शव एक साथ गांव में आए। शवों को देख गांव में कोई भी अपने आंसू नहीं रोक पाया। सभी 6 लोगों का एक साथ केमरी गांव में अंतिम संस्कार हुआ।

आसींद थाना क्षेत्र के लाछुड़ा गांव में अवैध माइनिंग का मलबा ढहने से 7 मजदूरों की मौत हो गई थी। गुरुवार सुबह इनका अंतिम संस्कार किया गया। 6 मजदूर केमरी गांव के थे। वहीं, सातवीं मीना लापलिया की रहने वाली थी। इन सभी के शवों को बुधवार देर रात मलबे से निकाल लिया गया था। करेड़ा अस्पताल में शवों का पोस्टमार्टम करने के बाद गुरुवार सुबह परिजनों को सौंप दिया गया। मांडल विधायक रामलाल जाट, करेड़ा एसडीएम महिपाल सिंह, करेड़ा तहसीलदार हरेन्द्रसिंह, आसींद सीओ रोहित मीणा व करेड़ा थाना प्रभारी सुरेंद्र गोदारा ने मृतकों के परिवारों को सांत्वना दी।

मृतकों के परिवारों को सांत्वना देते मांडल विधायक रामलाल जाट।
मृतकों के परिवारों को सांत्वना देते मांडल विधायक रामलाल जाट।

पेट पाल सके इसलिए सस्ती मजदूरी करने जाते थे माइंस पर
कोराना काल के बाद से ही रोजगार पूरी तरह से ठप हो गए थे। मृतकों को भी अपने स्थानीय क्षेत्र में रोजगार नहीं मिल पा रहा था। अपना पेट पालने के लिए यह सभी सस्ती मजदूरी होने के बावजूद 25 किलोमीटर दूर लाछुड़ा माइंस पर खनन करने के लिए जाते थे। बताया जा रहा है कि इस माइंस पर खनन कार्य करने के लिए पुरुष मजदूरों को 300 और महिला मजदूरों को 250 रुपए दिए जाते थे। यह मेहनताना काफी कम है। गरीब तबके के लिए इनके पेट भरने का यही एकमात्र साधन था।

गांव में तैनात किया गया भारी पुलिस बल
हादसे के बाद केमरी गांव में किसी भी प्रकार का विवाद की आशंका के मद्देनजर एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल तैनात किया गया। जिला मुख्यालय से भी भारी संख्या में पुलिस जवानों को कैमरी गांव भेजा गया था।

6 लोगों का शव केमरी गांव पहुंचा।
6 लोगों का शव केमरी गांव पहुंचा।

केमरी गांव के इन 6 लोगों की हुई मौत

हिंगलाज और प्रहलाद है भाई बहन
हादसे का शिकार हुए हिंगलाज और प्रहलाद दोनों भाई-बहन हैं। दोनों एक साथ सुबह खदान पर मजदूरी के लिए निकले थे। इन दोनों को मिलाकर घर में 6 भाई बहन थे।

गणेश के ऊपर से पहले ही उठ चुका है मां-बाप का साया
हादसे में जान गंवाने वाले गणेश उर्फ जगदीश पुत्र नाथू भील अपने छह भाई-बहनों में सबसे छोटा है। गणेश के मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी है। इस खदान पर मजदूरी कर अपना गुजर बसर कर रहा था।

कन्हैयालाल की मां की बचपन में हो गई थी मौत
कन्हैयालाल की मां की मौत उसके बचपन में ही हो गई थी। कन्हैयालाल के आठ भाई-बहन है। छोटे से घर में सभी एक साथ रहते हैं। कन्हैयालाल की मौत के बाद उसके पिता और भाई बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

धर्मा के माता-पिता की पहले हो चुकी मौत
हादसे का शिकार हुआ धर्मा पुत्र तेजा भाट पांच भाई-बहन हैं। धर्मा के मां-बाप की पहले ही मौत हो चुकी है। पांचों भाई बहन मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे थे।

सबसे छोटी थी मीना
मीना पुत्री हजारी भील अपने घर में सबसे छोटी थी। मीना के माता-पिता और उसके घर में चार भाई-बहन हैं। मीना की मौत के बाद उसका परिवार अपनी सबसे छोटी बेटी को खोने का विलाप कर रहा है।

लापलिया खेड़ा की एक युवती की हुई मौत

इकलौती बेटी थी मीना
लापलिया खेड़ा की रहने वाली मीना पुत्री बाबू भील अपने पिता की अकेली बेटी थी। मीना का एक भाई है। बेटी की मौत के बाद अब घर में एक लड़का ही बचा है।

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क्रेडिट - सुरेश श्रोत्रिय, करेड़ा

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