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दरारें अभी भी रहस्य:तीन जांच एजेंसी की रिपाेर्ट गाेलमाल, 441 मकानों का समाधान नहीं, 32 में और दरारें

भीलवाड़ा18 दिन पहलेलेखक: जसराज ओझा
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लक्ष्मीनारायण भगवान के बड़े मंदिर में दरारें हैं। पुजारी कक्ष की दीवार फट चुकी है। पुजारी पुरुषाेत्तम पाराशर ने बताया कि मंदिर के चाराें और दरारें बढ़ रही हैं। - Dainik Bhaskar
लक्ष्मीनारायण भगवान के बड़े मंदिर में दरारें हैं। पुजारी कक्ष की दीवार फट चुकी है। पुजारी पुरुषाेत्तम पाराशर ने बताया कि मंदिर के चाराें और दरारें बढ़ रही हैं।
  • पुर के मकानों में आई दरारों का सच जानने के लिए 2 करोड़ खर्च, नतीजा शून्य

पुर कस्बे के 4100 मकानाें में आई रहस्यमयी अब भी रहस्य ही बनी हुई है। दराराें के संबंध में जांच करने आई देश की तीन बड़ी एजेंसियाें की रिपाेर्ट में दराराें का कारण स्पष्ट रूप से ब्लास्टिंग काे नहीं माना है। सबसे बड़ी बात है कि इस दराराें के कारण काे जानने के लिए करीब दो कराेड़ रुपए खर्च हाे चुके हैं।

इसमें एक कराेड़ रुपए ताे सरकार ने इन तीनाें एजेंसियाें काे दिए हैं। वहीं करीब 1 करोड़ रुपए यूआईटी व नगर परिषद के सर्वे सहित अन्य काम में लगे। तत्कालीन कलेक्टर राजेंद्र भट्ट के पत्र पर केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान, सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट और आईआईटी रूड़की की टीमाें ने यहां रहकर सर्वेक्षण किया था। इन तीनाें में रिपाेर्ट में दराराें काे लेकर अलग-अलग कारण बताए हैं। इन तीनों एजेंसियों की जांच रिपोर्ट में अजीब-अजीब कारण बताए गए हैं। लेकिन किसी भी तरह का अंतिम निष्कर्म नहीं बताया गया है। पुर के लाेग इन जांच एजेंसियाें की रिपाेर्ट से संतुष्ट नहीं है। इसे लेकर लोगों ने फिर से आवाज उठाई है।

शुरुआत में 441 मकानाें में आई दरारों के मुआवजे में नया पुर व रामप्रसाद लढ़ा नगर में भूखंड देने की याेजना बनी थी। प्रभािवत सभी लोगों का समाधान भी नहीं हुआ और सर्वे के बाद 32 और मकानाें में नुकसान हो चुका है। लोगों का आरोप है कि मकानों में दरारें जिंदल सॉ लिमिटेड की ओर से की जा रही ब्लास्टिंग के कारण आ रही हैं। सैकंड चरण में जांच करने वाली तीनों देश की बड़ी एजेंसी हैं। लेकिन उनकी रिपोर्ट भी क्लियर नहीं है।

घरों की इंजीनियरिंग सही नहीं; सीएसआईआर-सीआईएमएफऐआर, धनबाद
ढेडवास लाैह अयस्क खदान में 15 प्रायाेगिक विस्फाेट राउंड किए। इन मापदंडाें का निर्णय अप्रैल 2018 से िदसंबर 2019 के दाैरान किए गए माइन ब्लास्टिंग कार्याें के आंकड़ाें की समीक्षा के बाद किया। इन धमाकाें के छेद की गहराई 3.5 मीटर से 12 मीटर तक थी। प्रयाेगात्मक विस्फाेट डिजाइन पैरामीटर की सीमा काे कवर करती है। लगभग 2.5 किलाेमीटर दूर पुर गांव के आवास संरचनाओं काे नुकसान पहुंचाने में विस्फाेट से प्रेरित जमीन कंपन्न और हवा के अधिक दबाव का प्रभाव व्यवहारिक नहीं है। घराें में दरारें पुर गांव के हाइड्राेजियाेलाॅजिकल सेटअप, घराें की कमजाेर गैर इंजीनियरिंग नींव के साथ निर्माण जिम्मेदार हाे सकता है।

चट्टानाें पर मिट्टी की माेटाई कम; सीएसआईआर-सीबीआरआई, रूड़की
लगभग 80 घराें में डीमेक प्वाइंट लगाकर निगरानी की। 12 से 20 मीटर तक अलग-अलग स्थानाें पर चार ड्रिल किए। जांच में पाया कि गांव की परिधि में चट्टानाें के ऊपर मिट्टी की माेटाई बहुत कम और लगभग तीन मीटर है। हालांकि गांव के भीतरी भाग में खंडित चट्टान, चट्टानाें के कंकड़ मिले हैं। कमजाेर नींव काे भी कारण माना है। भवन आमताैर पर गैर इंजीनियरिंग पत्थर से बने हैं। अधिकांश घर जी प्लस वन संरचनाओं या एकल मंजिला के थे। छत के स्लैब बलुआ पत्थर के स्लैब और स्टील के गर्डर से बने थे। कुछ घराें में लकड़ी के बीम भी लगा रखे हैं। सीलिंग विभिन्न घराें में भूमिगत पानी की टंकी से रिसाव की समस्या भी थी।

ड्रेनेज सिस्टम में हो रहा रिसाव; भारतीय प्राैद्याेगिकी संस्थान रूड़की
28 जनवरी से 01 फरवरी तक गांव के आसपास वर्टिकल इलेक्ट्रिकल साउंडिंग , 11 विद्युत प्रतिराेधकता टाेमाग्राफी सर्वेक्षण और भूतल परमाणु चुंबकीय अनुनाद का सर्वेक्षण किया। इससे पता चलता है कि इस क्षेत्र में एक से पांच मीटर के बीच की माेटाई की पतली ऊपरी मिट्टी है। जांच टीम ने अधिकतम मूल्य के साथ दाे से सात मीटर तक की माेटाई वाली कठाेर चट्टान की ऊपरी परत काे रेखांकित किया है। कठाेर चट्टानाें के भीतर विस्थापन की प्रवृत्ति से संबंधित साक्ष्य क्षेत्र में नई दरारें पैदा हाे रही हैं। लीकेज ड्रेनेज सिस्टम से संभावित पानी का रिसाव देखा गया। स्कूल के आसपास भी जलभराव प्रमुख कारण है।

सीएम, 3 मंत्री, 9 विधायक, 4 पूर्व मंत्री, 14 पूर्व विधायक आ चुके हैं

  • सीएम अशाेक गहलाेत, 03 मंत्री, 09 विधायक, चार पूर्व मंत्री व 14 पूर्व विधायक आ चुके हैं। मुख्य सचिव चार बार बैठक ले चुके हैं। इन्हाेंने 12 सरकारी विभागाें के अफसराें काे जयपुर तलब किया था।
  • हर घर का सर्वे हुआ। 41 मकानाें काे घातक घाेषित कर खाली करने के निर्देश दिए। कई लाेग किराए के मकानाें में रह रहे हैं। अब 32 नए परिवार ऐसे हैं जाे उनके घराें में दराराें का कारण ब्लास्टिंग ही मान रहे हैं।
  • नगर परिषद, यूआईटी, पीडब्यूडी, खान विभाग, जल संसाधन विभागाें ने भी पहले दराराें का कारण जानने के लिए सर्वे किया था। इसमें सबकी रिपाेर्ट गाेलमाल थी।
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